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सुखद तस्वीर : जागे अफसर, 14 दिन बाद कागजों की बजाय तारों में दौड़ा करंट
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चंडीगढ़। मलोया के स्मॉल फ्लैट में पिछले 14 दिनों से अंधेरे में रह रहे तीन परिवारों को वीरवार को बिजली का कनेक्शन मिल गया। इस मुद्दे को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। खबर प्रकाशित होने केअफसरों को अपनी गलती का एहसास हुआ और आनन-फानन में वीरवार को मीटर लगाया गया और कनेक्शन जोड़ कर बिजली बहाल की गई।
कागजों में बिजली, घर के तारों में करंट नहीं शीर्षक से अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद सुबह ही चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी हरकत में आए। सीईओ यशपाल गर्ग ने तुरंत बिजली मीटर लगाने और कनेक्शन जोड़ कर बिजली बहाल करने के आदेश दिए। कर्मचारी मलोया स्मॉल फ्लैट पहुंचे और बिजली कनेक्शन दिया। जिन तीन फ्लैट्स में पिछले 14 दिनों से बिजली नहीं आई थी, वीरवार को उन सभी घरों तक बिजली पहुंच गई। बिजली आने के बाद 2008/3 में पहने वाले यशपाल ने सभी का शुक्रिया किया।
बताया कि 27 अगस्त को उन्हें पजेशन लेटर मिला तो 28 से ही वह मकान में रहने लगे। शुरू में कहा गया कि जल्द ही उन्हें बिजली और पानी का मीटर लगाकर कनेक्शन दे दिया जाएगा। डायरेक्ट कनेक्शन के साथ बिना मीटर के पानी तो आ गया है, लेकिन बिजली नहीं आई, न ही मीटर लगाया गया। यशपाल ने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं। सबसे छोटी बेटी एक साल की है। अनुमान लगाना मुश्किल है कि पिछले करीब दो हफ्तों से वह बिना बिजली के कैसे रह रहे होंगे। अन्य की भी कमोवेश यही स्थिति थी।
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कागजों में बिजली, घर के तारों में करंट नहीं शीर्षक से अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद सुबह ही चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी हरकत में आए। सीईओ यशपाल गर्ग ने तुरंत बिजली मीटर लगाने और कनेक्शन जोड़ कर बिजली बहाल करने के आदेश दिए। कर्मचारी मलोया स्मॉल फ्लैट पहुंचे और बिजली कनेक्शन दिया। जिन तीन फ्लैट्स में पिछले 14 दिनों से बिजली नहीं आई थी, वीरवार को उन सभी घरों तक बिजली पहुंच गई। बिजली आने के बाद 2008/3 में पहने वाले यशपाल ने सभी का शुक्रिया किया।
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बताया कि 27 अगस्त को उन्हें पजेशन लेटर मिला तो 28 से ही वह मकान में रहने लगे। शुरू में कहा गया कि जल्द ही उन्हें बिजली और पानी का मीटर लगाकर कनेक्शन दे दिया जाएगा। डायरेक्ट कनेक्शन के साथ बिना मीटर के पानी तो आ गया है, लेकिन बिजली नहीं आई, न ही मीटर लगाया गया। यशपाल ने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं। सबसे छोटी बेटी एक साल की है। अनुमान लगाना मुश्किल है कि पिछले करीब दो हफ्तों से वह बिना बिजली के कैसे रह रहे होंगे। अन्य की भी कमोवेश यही स्थिति थी।
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