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मास्टर प्लान पर आपत्ति, होगी पर्सनल हियरिंग
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 12 Nov 2013 02:44 PM IST
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यूटी के ड्राफ्ट मास्टर प्लान-2013 पर आपत्तियां दर्ज कराने वालों को अब पर्सनल हियरिंग का मौका दिया जाएगा। इन आपत्तियों के लिए प्रशासन की ओर से गठित बोर्ड ऑफ इंक्वायरी एंड हियरिंग बोर्ड की सोमवार को यूटी सचिवालय में हुई पहली बैठक हुई।
इसमें तय हुआ कि 22 से 28 नवंबर तक बोर्ड के सदस्य ड्राफ्ट मास्टर प्लान पर आपत्तियां दर्ज कराने वाले सभी लोगों को निजी तौर पर सुनेगा। 22 नवंबर को रिहायशी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को बुलाया जाएगा, जबकि 23 को कामर्शियल क्षेत्र से लोगों को बुलाया जाएगा।
25 नवंबर को गांव के लोगों और 26 को उद्योग से जुड़े लोग बुलाए जाएंगे। 27 और 28 को आपत्तियां दर्ज कराने वाले अन्य संगठन और हरियाणा व पंजाब सरकारों के प्रतिनिधियों को बुलाया जाएगा। इसके बाद बोर्ड की नियमित तौर पर बैठकें होंगी।
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लोगों की पर्सनल हियरिंग के लिए एक तिहाई मेंबर्स का कोरम होना अनिवार्य है। बोर्ड की ओर से मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर आए सुझावों और आपत्तियों को कंपाइल किया जाएगा और इसके बाद इसे चंडीगढ़ के मुख्य प्रशासक और वित्त सचिव वीके सिंह को सौंपा जाएगा। इसके लिए बोर्ड को एक माह का समय दिया गया है।
बोर्ड का प्रयास रहेगा कि मास्टर प्लान-2031 में शहर के लोगों के सुझावों को भी शामिल किया जाए। सुझावों को शामिल करने और आपत्तियों को दूर करने के बाद ही फाइनल मास्टर प्लान की अधिसूचना जारी होगी।
प्रशासन की ओर से सीएचबी के चेयरमैन और पर्यावरण सचिव सत्यगोपाल की अध्यक्षता में बोर्ड ऑफ इंक्वायरी का गठन किया गया है। बोर्ड के सदस्यों में आईटी सचिव प्र्रेरणा पुरी, पूर्व मेयर रविंदर सिंह पाली, नगर निगम आयुक्त विवेक प्रताप सिंह, चीफ इंजीनियर एसके चड्ढा और केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के चीफ प्लानर शामिल हैं।
चीफ आर्किटेक्ट सुमित कौर बोर्ड की संयोजक होंगी। ऐसा पहली बार हुआ है जब प्रशासन की किसी महत्वपूर्ण कमेटी में किसी राजनीतिक दल के नेता को शामिल किया गया है।
170 आपत्तियां व सुझाव आए
मास्टर प्लान पर प्रशासन ने सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की थीं, जिसकी अंतिम तिथि 10 सितंबर थी। प्रशासन के पास लगभग 170 आपत्तियां व सुझाव आए थे।
पंजाब और हरियाणा सरकारों के साथ पीजीआई, पंजाब यूनिवर्सिटी, नगर निगम, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स, चंडीगढ़ व्यापार मंडल, फॉसवेक सहित कई संगठनों के सुझाव और आपत्तियां आईं।
ड्राफ्ट मास्टर प्लान को प्रशासन की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया था। इसके साथ ही कई सार्वजनिक स्थानों पर भी मास्टर प्लान के ड्राफ्ट की प्रतियों को रखा गया था। ड्राफ्ट की प्रति छह हजार रुपये में उपलब्ध कराई गई थी।
तीन साल पहले हुआ था एक्सपर्ट कमेटी का गठन
ध्यान रहे कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर लगभग तीन साल पहले चीफ आर्किटेक्ट की अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया था।
इस संबंध में बोर्ड के सदस्य रविंदर सिंह पाली ने कहा कि यह ड्राफ्ट मास्टर प्लान शहर के लिए काफी अहम है। बोर्ड आपत्तियां दर्ज कराने वाले सभी लोगों को निजी तौर पर सुनने का मौका देगी और इसके बाद ही रिपोर्ट कंपाइल होगी।
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इसमें तय हुआ कि 22 से 28 नवंबर तक बोर्ड के सदस्य ड्राफ्ट मास्टर प्लान पर आपत्तियां दर्ज कराने वाले सभी लोगों को निजी तौर पर सुनेगा। 22 नवंबर को रिहायशी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को बुलाया जाएगा, जबकि 23 को कामर्शियल क्षेत्र से लोगों को बुलाया जाएगा।
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25 नवंबर को गांव के लोगों और 26 को उद्योग से जुड़े लोग बुलाए जाएंगे। 27 और 28 को आपत्तियां दर्ज कराने वाले अन्य संगठन और हरियाणा व पंजाब सरकारों के प्रतिनिधियों को बुलाया जाएगा। इसके बाद बोर्ड की नियमित तौर पर बैठकें होंगी।
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लोगों की पर्सनल हियरिंग के लिए एक तिहाई मेंबर्स का कोरम होना अनिवार्य है। बोर्ड की ओर से मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर आए सुझावों और आपत्तियों को कंपाइल किया जाएगा और इसके बाद इसे चंडीगढ़ के मुख्य प्रशासक और वित्त सचिव वीके सिंह को सौंपा जाएगा। इसके लिए बोर्ड को एक माह का समय दिया गया है।
बोर्ड का प्रयास रहेगा कि मास्टर प्लान-2031 में शहर के लोगों के सुझावों को भी शामिल किया जाए। सुझावों को शामिल करने और आपत्तियों को दूर करने के बाद ही फाइनल मास्टर प्लान की अधिसूचना जारी होगी।
प्रशासन की ओर से सीएचबी के चेयरमैन और पर्यावरण सचिव सत्यगोपाल की अध्यक्षता में बोर्ड ऑफ इंक्वायरी का गठन किया गया है। बोर्ड के सदस्यों में आईटी सचिव प्र्रेरणा पुरी, पूर्व मेयर रविंदर सिंह पाली, नगर निगम आयुक्त विवेक प्रताप सिंह, चीफ इंजीनियर एसके चड्ढा और केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के चीफ प्लानर शामिल हैं।
चीफ आर्किटेक्ट सुमित कौर बोर्ड की संयोजक होंगी। ऐसा पहली बार हुआ है जब प्रशासन की किसी महत्वपूर्ण कमेटी में किसी राजनीतिक दल के नेता को शामिल किया गया है।
170 आपत्तियां व सुझाव आए
मास्टर प्लान पर प्रशासन ने सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की थीं, जिसकी अंतिम तिथि 10 सितंबर थी। प्रशासन के पास लगभग 170 आपत्तियां व सुझाव आए थे।
पंजाब और हरियाणा सरकारों के साथ पीजीआई, पंजाब यूनिवर्सिटी, नगर निगम, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स, चंडीगढ़ व्यापार मंडल, फॉसवेक सहित कई संगठनों के सुझाव और आपत्तियां आईं।
ड्राफ्ट मास्टर प्लान को प्रशासन की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया था। इसके साथ ही कई सार्वजनिक स्थानों पर भी मास्टर प्लान के ड्राफ्ट की प्रतियों को रखा गया था। ड्राफ्ट की प्रति छह हजार रुपये में उपलब्ध कराई गई थी।
तीन साल पहले हुआ था एक्सपर्ट कमेटी का गठन
ध्यान रहे कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर लगभग तीन साल पहले चीफ आर्किटेक्ट की अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया था।
इस संबंध में बोर्ड के सदस्य रविंदर सिंह पाली ने कहा कि यह ड्राफ्ट मास्टर प्लान शहर के लिए काफी अहम है। बोर्ड आपत्तियां दर्ज कराने वाले सभी लोगों को निजी तौर पर सुनने का मौका देगी और इसके बाद ही रिपोर्ट कंपाइल होगी।