फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Nrityanjali concludes with Kuchipudi dance of master vaijayanti

नृत्यांजलि: गुरु वैजयंती ने किया गांधारी के जीवन का खूबसूरत चित्रण

Wed, 18 May 2016 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 18 May 2016 12:16 AM IST
विज्ञापन
Nrityanjali concludes with Kuchipudi dance of master vaijayanti
कुचिपुड़ी नृत्य करतीं गुरु वैजयंती - फोटो : amar ujala

सेक्टर - 18 स्थित टैगोर थिएटर में चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से चल रहे दो दिवसीय इंडियन क्लासिकल डांस नृत्यांजलि का मंगलवार को समापन हो गया। बंगलूरू से आए कुचिपुड़ी गुरु वैजयंती काशी ने शानदार प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि चंडीगढ़ प्रशासन के गृहसचिव अनुराग अग्रवाल उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने सभी कलाकारों को फूल देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना के साथ किया गया।

विज्ञापन


फिर पंचभूत नामक प्रस्तुति से जल, वायु, अग्नि, आकाश, पृथ्वी के महत्व के बारे में बताया गया । वैजयंती काशी और उनकी पुत्री  की जुगलबंदी देखने ही बनती थी। उन्होंने कृष्ण की लीला का प्रदर्शन किया। इसके बाद शिवजी का गान हुआ। यह प्रस्तुति नृत्य के देवता को समर्पित रही। वैजयंती काशी ने गांधारी में एकल प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं। इस प्रस्तुति में गांधारी के जीवन का खूबसूरत चित्रण किया गया। जिसमें दिखाया गया कि सुंदर दिखने वाली गांधारी के मन में हर लड़की की तरह शादी को लेकर बहुत से सपने थे। जिसको वैजयंती ने अपने भावों से बखूबी दर्शाया।
विज्ञापन


नृत्य के साथ कई और कलाओं की जानकारी जरूरी
कुचिपुड़ी नृत्यांगना गुरु वैजयंती काशी ने बताया कि यह एक ऐसी नृत्य शैली है जिसमें कलाकारों को केवल नृत्य  ही नहीं बल्कि अभिनय से लेकर शास्त्रों, रीति रिवाजों और अन्य नृत्य शैलियों के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए तभी जाकर वह इस शैली में निपुण बना सकता है। इस नृत्य शैली की शुरुआत के बारे में उन्होंने बताया कि इसकी शुरूआत आंध्रप्रदेश के गांव से हुई जिसका नाम भी कुचिपुड़ी था। उन्होंने बताया कि इस नृत्य को केवल  पुरुष  किया करते थे। वैसे भी आजादी से पहले औरतों का किसी भी कला को पेश करना अच्छा नहीं समझा जाता था। जिसके चलते पुरुष ही महिलाओं का रूप धारणकर बनाकर मंच पर अपनी प्रस्तुति देते थे। लेकिन आजादी के बाद भारत में बदलाव आया और महिलाएं भी अपनी कला को पेश करने लगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


शादी के बाद सीखा नृत्य
वैजयंती ने बताया कि  उन्होंने शादी के बाद ही कुचिपुड़ी सीखा। इसके पहले बचपन में मैंने भारनाट्यम भी सीखा फिलहाल 25 साल से कुचिपुड़ी कर रही हूं । इतने साल के अनुभव में मैंने यही जाना है कि एक ऐसी कला है जो इंसान के अंदर की कला को निखारती है। वैजयंती 25साल में 28 देशों में नृत्य की प्रस्तुति दे चुकी हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed