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आत्मनिर्भर बनाने की कवायद : पंजाब में अब चीनी मिल करेंगी अल्कोहल का उत्पादन

Sun, 25 Jul 2021 04:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 25 Jul 2021 04:24 AM IST
सार

  • चीनी मिलों में चीनी के साथ शुरू होगा सह-उत्पादन

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Now sugar mills will produce alcohol in Punjab
चीनी मील - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पंजाब में अब चीनी मिलों में चीनी उत्पाद के साथ ही प्रसिद्ध अल्कोहल (इथोनाल) का भी उत्पादन किया जाएगा। सरकार ने मिलों को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद शुरू कर दी है। चीनी उत्पादन करने वाले मिलों को अब इथोनोल, को-जेनरेशन, बायो सीएनजी और रिफाइंड शुगर प्रोजेक्ट में तब्दील करने का सरकार ने खाका तैयार कर लिया है। जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम आने शुरू हो जाएंगे।

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इस कवायद के तहत गुरदासपुर और बटाला में नए शुगर प्लांटों और डिस्टिलरी को स्थापित करना शुरू कर दिया गया है। सहकारी चीनी मिलों को आत्मनिर्भर बनाने और ऊर्जा के नवीकरणी स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए पेराई के बाद गन्ने के बचे प्रेस मड से ग्रीन एनर्जी की पैदावार की कवायद भी सहकारिता विभाग ने शुरू कर दी है। इसके लिए हाल ही में निजी सार्वजनिक हिस्सेदारी (पीपीपी) के तहत सहकारी चीनी मीलों को बायो सीएनजी योजनाएं स्थापित करनी शुरू कर दी गई हैं। 
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को-जनरेशन, बायो उत्पादन और इथोनाल के जरिये मिलों से वार्षिक 1 करोड़ से 75 लाख रुपये की कमाई की योजना है। इन योजनाओं के जरिये सहकारी चीनी मिलों में न केवल गन्ने के अवशेष का निपटारा होगा, बल्कि अतिरिक्त आय के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी की पैदावार में भी विस्तार होगा। गन्ने की प्रेस मड के अलावा कृषि के अवशेष जैसे कि पोल्ट्री फार्मों और सब्जी और फलों के अवशेष और गोबर आदि का प्रयोग कर बायो सीएनजी (ग्रीन एनर्जी) गैस का उत्पादन किया जाएगा। इससे न केवल वातावरण साफ रखने में मदद मिलेगी, बल्कि इलाके में और ज्यादा रोजगार के अवसर के अलावा किसानों और कृषि के सहयोगी धंधे कर रहे किसानों की आमदन में विस्तार होगा। 
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किसानों को मिलेगी जैविक खाद
बायो सीएनजी के उत्पादन के बाद बचे हुए अवशेष का प्रयोग जैविक खाद के रूप में किया जाएगा। जो क्षेत्र के विकासशील किसानों को वितरित की जाएगी। इससे किसानों को अच्छी फसल के साथ ही आर्थिक लाभ भी होगा। 


इन योजनाओं के शुरू होने से सहकारी चीनी मिलों में न केवल गन्ने के अवशेष के निपटारे के लिए आने वाली मुश्किलों से राहत मिलेगी, बल्कि इससे मिलों को अतिरिक्त आय के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी की पैदावार में विस्तार होगा।
-सुखजिंदर सिंह रंधावा, सहकारिता मंत्री, पंजाब।

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