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अब बायोप्सी के बजाय स्कैन कर मिलेगी रिपोर्ट
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चंडीगढ़। पीजीआई के नेहरू एक्सटेंशन ब्लॉक में शुक्रवार को देश की पहली अत्याधुनिक एचआर पीक्यूसीटी स्कैनर मशीन स्थापित की गई। इस अत्याधुनिक मशीन का उद्घाटन पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम ने किया।
एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. संजय भडाडा ने बताया कि अब मरीजों को बायोप्सी की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा बल्कि पीक्यूसीटी स्कैनर मशीन से स्कैनिंग कर रिपोर्ट तुरंत मिल जाएगी। बड़ी बात यह है कि इसमें रेडिएशन का खतरा न केबराबर होगा। उन्होंने बताया कि अब तक देश केकिसी भी चिकित्सा संस्थान में यह मशीन स्थापित नहीं की गई है। अभी प्रौद्योगिकी संस्थान में आविष्कार के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है।
प्रो. भडाडा ने बताया कि हाई रेजोल्यूशन पेरीफेरेल क्वांटेटिव कंप्यूटेड टोमोग्राफी (एचआर पीक्यूसीटी) मशीन से महज दो मिनट में बायोप्सी समेत कई महत्वपूर्ण जांच की जा सकेगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा हड्डी रोगियों को मिलेगा, क्योंकि किसी भी गंभीर बीमारी में हड्डी सबसे पहले खराब होना शुरू हो जाती है। इसके साथ मशीन से फॉलोअप के मरीजों के इलाज केपरिणाम का सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा। इसके परिणाम के आधार पर तय किया जा सकेगा कि इलाज सही चल रहा है या फिर बदलाव की जरूरत है। इस दौरान डीडीए कु मार गौरव धवन, वित्त सलाहकार कु मार अभय, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रमुख प्रो. वनीता सूरी और प्रो. विपिन कौशल मौजूद थे।
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हड्डी रोगों के इलाज में कारगर
ऑस्टियोपोरोसिस, प्राथमिक हाइपरथायरायडिज्म, स्टेरॉयड से हड्डी का नुकसान, मधुमेह में हड्डी रोग, सीलिएक रोग, प्रत्यारोपण हड्डी रोग जैसे विकारों के शुरुआती निदान के लिए यह मशीन बेहद उपयोगी रहेगी। थायराइड और पिट्यूटरी विकार व अन्य दुर्लभ हड्डी रोग के इलाज में अच्छे परिणाम मिलेंगे।
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एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. संजय भडाडा ने बताया कि अब मरीजों को बायोप्सी की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा बल्कि पीक्यूसीटी स्कैनर मशीन से स्कैनिंग कर रिपोर्ट तुरंत मिल जाएगी। बड़ी बात यह है कि इसमें रेडिएशन का खतरा न केबराबर होगा। उन्होंने बताया कि अब तक देश केकिसी भी चिकित्सा संस्थान में यह मशीन स्थापित नहीं की गई है। अभी प्रौद्योगिकी संस्थान में आविष्कार के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है।
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प्रो. भडाडा ने बताया कि हाई रेजोल्यूशन पेरीफेरेल क्वांटेटिव कंप्यूटेड टोमोग्राफी (एचआर पीक्यूसीटी) मशीन से महज दो मिनट में बायोप्सी समेत कई महत्वपूर्ण जांच की जा सकेगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा हड्डी रोगियों को मिलेगा, क्योंकि किसी भी गंभीर बीमारी में हड्डी सबसे पहले खराब होना शुरू हो जाती है। इसके साथ मशीन से फॉलोअप के मरीजों के इलाज केपरिणाम का सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा। इसके परिणाम के आधार पर तय किया जा सकेगा कि इलाज सही चल रहा है या फिर बदलाव की जरूरत है। इस दौरान डीडीए कु मार गौरव धवन, वित्त सलाहकार कु मार अभय, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रमुख प्रो. वनीता सूरी और प्रो. विपिन कौशल मौजूद थे।
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ऑस्टियोपोरोसिस, प्राथमिक हाइपरथायरायडिज्म, स्टेरॉयड से हड्डी का नुकसान, मधुमेह में हड्डी रोग, सीलिएक रोग, प्रत्यारोपण हड्डी रोग जैसे विकारों के शुरुआती निदान के लिए यह मशीन बेहद उपयोगी रहेगी। थायराइड और पिट्यूटरी विकार व अन्य दुर्लभ हड्डी रोग के इलाज में अच्छे परिणाम मिलेंगे।