Chandigarh: चंडीगढ़ में फिर गिरा पेड़, पास में हैं दो स्कूल, छुट्टी होने के कारण बड़ा हादसा टला
पेड़ करीब साढ़े 12 बजे गिरा लेकिन हॉर्टिकल्चर विभाग की टीम उसके दो घंटे बाद आई। पास में सीआरबी स्कूल है, जिसके जूनियर विंग की छुट्टी करीब साढ़े 12 बजे होती है। इसके अलावा केबीडीएवी स्कूल भी है। अगर रविवार का दिन नहीं होता तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था।
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चंडीगढ़ में पेड़ों के गिरने का सिलसिला नहीं थम रहा। रविवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे सेक्टर-7बी में धोबी घाट के पास एक विशाल पेड़ अचानक सड़क पर गिर गया। गनीमत रही कि छुट्टी का दिन होने की वजह से सड़क पर ज्यादा आवाजाही नहीं थी वरना बड़ा हादसा हो सकता था। पेड़ संपर्क सड़क के बीचोंबीच गिरा, जिसकी वजह से यातायात कई घंटे बाधित रहा।
पास में रहने वाले वकील संदीप ने बताया कि पेड़ करीब साढ़े 12 बजे गिरा लेकिन हॉर्टिकल्चर विभाग की टीम उसके दो घंटे बाद आई। पास में सीआरबी स्कूल है, जिसके जूनियर विंग की छुट्टी करीब साढ़े 12 बजे होती है। इसके अलावा केबीडीएवी स्कूल भी है। अगर रविवार का दिन नहीं होता तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था। इसके अलावा पास में मार्केट है, तो उसके लिए भी लोग इसी सड़क से गुजरते हैं। छुट्टी का दिन होने की वजह से सड़क पर ज्यादा आवाजाही नहीं थी। सेक्टर-7 के विवेक ने बताया कि पेड़ देखने में काफी हरा था मगर इसकी जड़ें खोखली हो चुकी थीं। पेड़ झुक भी गया था लेकिन किसी ने इसकी ओर ध्यान तक नहीं दिया।
प्रशासन ने कराया अल्ट्रासोनिक अध्ययन, रिपोर्ट में आया- पेड़ अंदर से खोखला
आठ जुलाई को सेक्टर-9 के कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में 250 साल पुराना पेड़ गिरने से बड़ा हादसा हुआ था। इसमें दसवीं की छात्रा हीराक्षी की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद प्रशासन ने देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट से हेरिटेज पेड़ों का अल्ट्रासोनिक अध्ययन कराया था। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, कॉर्मल कॉन्वेंट स्कूल में जो पेड़ गिरा था वह बाहर से भले हराभरा था लेकिन अंदर से खोखला हो चुका था। पेड़ में दीमक की भरमार थी। टीम की तरफ से ऐसे पेड़ों को बचाने के लिए सुझाव भी दिए जाएंगे।
घायल सहायिका शीला के बयान के बाद जांच होगी पूरी
कार्मल कान्वेंट में पेड़ गिरने का दोषी कौन है, इसकी जांच हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस जितेंद्र चौहान कर रहे हैं। जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है क्योंकि हादसे में घायल हुई स्कूल की सहायिका शीला अब तक बयान देने की हालत में नहीं है। बताया गया है कि शीला के बयान के बाद ही जांच पूरी हो पाएगी और यह स्पष्ट हो सकेगा कि गलती किसकी है। बता दें कि शीला पूरे हादसे के समय मौके पर मौजूद थी। बच्चों को बचाते समय उन्हें गंभीर चोट लगी थी। वह करीब एक महीने तक पीजीआई में भर्ती रहीं, जिसके बाद उन्हें छुट्टी मिली। हालांकि अभी भी वह पूरी तरह से ठीक नहीं हुई हैं।