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हरियाणा: मंडियों में अब रोजाना 200 किसान ला सकेंगे अनाज, प्रदेश में चीनी का उत्पादन भी बढ़ा

Sat, 25 Apr 2020 12:52 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 25 Apr 2020 12:52 AM IST
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Now 200 farmers will be able to bring grains daily in the mandis in Haryana
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

हरियाणा में आढ़तियों की हड़ताल खत्म होने के बाद मंडियों में अब गेहूं खरीद सुचारु और सामान्य रूप से चले, इसके लिए हरियाणा सरकार शिद्दत से प्रयासरत है। इसी के मद्देनजर सरकार ने अब प्रदेश की मंडियों (प्रिंसिपल यार्ड और सब यार्ड) में रोजाना फसल बेचने वाले किसानों की संख्या को बढ़ाकर अब 200 कर दी है। जबकि अभी तक ये लिमिट कुल सौ किसानों की ही थी। मगर अब 100 किसान सुबह के समय और 100 किसान दोपहर बाद अपने शेड्यूल के अनुसार मंडियों में फसल बेच सकेंगे। 

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इसी तरह अन्य खरीद केंद्रों में भी सुबह और दोपहर 25-25 किसान फसल बेच पाएंगे। जबकि पहले खरीद केंद्रों में पूरे दिन में सिर्फ 25 किसानों को ही फसल बेचने की अनुमति थी। हरियाणा में इस वक्त कुल 1831 मंडियों और खरीद केंद्रों में गेहूं और सरसों की खरीद का काम चल रहा है। हालांकि आढ़तियों की हड़ताल की वजह से गेहूं खरीद का काम कुछेक दिन प्रभावित जरूर हुआ है। जिस वजह से गेहूं की सरकारी खरीद की रफ्तार बहुत धीमी रही। 
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गत दिवस प्रदेश सरकार इस हड़ताल को खत्म करने में कामयाब रही और अब प्रदेश के सभी मंडियों व खरीद केंद्रों में जल्द से जल्द गेहूं खरीद का काम खत्म हो, इसके लिए भी सरकार विभिन्न तैयारियों में जुट गई है। इस संदर्भ में हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड ने सभी मार्केट कमेटी के अधिशासी अधिकारियों एवं सचिवों को उक्त निर्देश जारी कर दिए हैं। 
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अफसरों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि इस सारी व्यवस्था में सोशल डिस्टेंसिंग प्रोटोकॉल का खासतौर पर ध्यान रखना है। उन्हें सुनिश्चित रखना है कि कोविड-19 के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए खरीद कार्य पूरी तरह से सुरक्षित ढंग से किया जा रहा है और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने में आढ़ती भी पूरा सहयोग कर रहें हैं।

किसानों की इच्छा, किसके जरिए बेचना है अनाज

मंडियों और खरीद केंद्रों पर यह किसान की इच्छा पर निर्भर होगा कि वे किसके माध्यम से अपना अनाज बेचना चाहता है। कई जिलों में किसान उत्पादक संगठनों व ग्राम पंचायतों ने कच्ची आढ़त का लाइसेंस लिया हुआ है। जबकि कई जगह सरकारी एजेंसियां भी खरीद कर रही हैं। ऐसी स्थिति में यदि किसान इनके माध्यम से अपनी फसल सरकार को बेचना चाहता है तो उनकी शेड्यूलिंग संबंधित मार्केट कमेटी के सचिव करेंगे। जबकि वे किसान जो अपनी फसल आढ़तियों के माध्यम से ही बेचना चाहते हैं तो उनकी शेड्यूलिंग आढ़तियों के माध्यम से ही प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी।

मंडियों से अनाज का उठान भी बड़ी चुनौती
हरियाणा की मंडियों में खरीद कार्य को सुचारु रूप से शुरू हो चुका है। लेकिन पैक हो चुके अनाज का समय से उठान भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रदेश की कई मंडी और खरीद केंद्रों में अभी भी अनाज की काफी संख्या में बोरियों उठान के इंतजार में पड़ी हुई है। हरियाणा व्यापार मंडल के अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने बताया कि अधिकतर खरीद केंद्रों में न तो अनाज रखने के लिए लकड़ी के कैरेट है और न ही तिरपाल की व्यवस्था।

उठान कार्य भी बहुत धीमा चल रहा है, इसलिए सरकार को चाहिए कि कम से कम मंडियों और खरीद केंद्रों में जरूरी मूलभूत सुविधाएं तो उपलब्ध करवाएं। ताकि खरीद का काम आसानी से चल सके और समय पर उठान कार्य भी हो सके। वरना बारिश आने पर मंडी और खरीद केंद्रों पर पड़ा गेहूं भीग जाएगा।

प्रदेश में चीनी का उत्पादन बढ़ा, नहीं होगी कमी

महामारी के इस दौर में प्रदेश किसी भी प्रकार से चीनी की किल्लत नहीं होगी। प्रदेश की सभी सहकारी और प्राइवेट चीनी मिलों में इस बार पिछले साल के अपेक्षाकृत चीनी की रिकवरी अधिक हुई है। यह प्रदेश सरकार और जनता दोनों के लिए राहत की बात है। यह खुलासा शुक्रवार को सभी चीनी मिलो मैं चीनी रिकवरी की रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान हुआ। 

सहकारी चीनी मिलों व निजी क्षेत्र की चीनी मिलों ने सीजन 2019-20 में पिछले सीजन 2018-19 से अधिक चीनी रिकवरी प्राप्त की है। जबकि  सीजन 2019-20 में 15 अप्रैल 2020 तक 611.44 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई कर औसतन 10.45 प्रतिशत चीनी की रिकवरी प्राप्त की है। सीजन 2019-20 में 624.98 लाख क्विटंल गन्ने की पिराई कर औसतन 10.19 प्रतिशत चीनी की रिकवरी प्राप्त की है।

सहकारिता मंत्री डा. बनवारी लाल ने बताया कि सहकारी चीनी मिलों ने सीजन 2019-20 में 353.48 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई कर औसतन 9.95 प्रतिशत चीनी की रिकवरी प्राप्त की। जबकि निजी चीनी मिलों से 257.96 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई कर औसतन 11.13 प्रतिशत चीनी की रिकवरी प्राप्त की। उन्होंने बताया कि गन्ने की अगेती किस्म के लिए 340 रूपए प्रति क्विंटल तथा अन्य के लिए 335 रूपए प्रति क्विंटल का मूल्य राज्य सरकार द्वारा किसानों को दिया जा रहा है, जोकि भारत में सबसे अधिक है।

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