Chandigarh News: फर्जी दस्तावेजों पर बनाया पासपोर्ट, अब पूछताछ होगी, एपीओ को नोटिस जारी
लगभग चार साल पहले कानपुर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का एक गिरोह सक्रिय था। यह गिरोह किसी व्यक्ति के शैक्षणिक व अन्य जाली दस्तावेज बनाकर उनके आधार पर वैध पासपोर्ट बनवा देता था। सत्यापन को आए एक फार्म में लगे दस्तावेजों पर पुलिस अधिकारियों को शक हुआ। जांच करने पर पाया कि दस्तावेज फर्जी हैं। जांच में मामले का खुलास हुआ।
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विस्तार
चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्र में बतौर असिस्टेंट पासपोर्ट ऑफिसर (एपीओ) पदस्थ शैलेंद्र सिन्हा को कानपुर की कर्नलगंज थाना पुलिस ने अवैध दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनाने के मामले में पूछताछ करने के लिए नोटिस भेजा है। आरोप है कि वर्ष 2019 में जब सिन्हा कानपुर के पासपोर्ट कार्यालय में पदस्थ थे, उस दौरान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनाने के मामले में इनका नाम सामने आया था।
इसके बाद विभाग ने सिन्हा का तबादला पहले लखनऊ और उसके बाद चंडीगढ़ कर दिया था। कर्नलगंज पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सवालों के जवाब लेने के लिए सिन्हा को नोटिस भेजा गया है। उन्हें जल्द से जल्द आकर पूछताछ में शामिल होना होगा, नहीं तो पुलिस उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई करेगी।
यह था मामला
लगभग चार साल पहले कानपुर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का एक गिरोह सक्रिय था। जो किसी व्यक्ति के शैक्षणिक व अन्य जाली दस्तावेज बनाकर उनके आधार पर वैध पासपोर्ट बनवा देते थे। इसी दौरान सत्यापन के लिए आए एक फार्म में लगे दस्तावेजों पर पुलिस अधिकारियों को शक हुआ। जांच करने पर पाया कि दस्तावेज फर्जी हैं।
पुलिस जांच में एक टूर एंड ट्रैवल कंपनी चलाने वाले कानपुर निवासी वसीम अली और वाराणसी निवासी विपिन का नाम सामने आया था। दोनों ने मिलकर ऐसे सैकड़ों पासपोर्ट बनवाकर लोगों को दिए थे। इसके एवज में वह प्रत्येक व्यक्ति से लगभग 8 से 10 हजार रुपये भी लेते थे। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान एक आरोपी ने पुलिस के सामने पासपोर्ट कार्यालय के तत्कालीन अधिकारी शैलेंद्र सिन्हा का नाम लिया। इसके आधार पर सिन्हा भी पुलिस के शक के घेरे में आ गए। इस संबंध में सिन्हा से मिलने का प्रयास किया गया तो उन्होंने मिलने से स्पष्ट मना कर दिया।
इन मामलों में आया था नाम
केस-1:
श्वेता की मार्कशीट पर संतोष का पासपोर्ट
कानपुर में चले इस फर्जीवाड़े के खेल में कुशीनगर के खजुरी बाजार निवासी संतोष ने 2019 में पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया था। अक्तूबर 2019 को वह संबंधित प्रक्रिया पूरी करने कानपुर के पासपोर्ट सेवा केंद्र पहुंचा। दस्तावेजों में उसने 2006 की हाईस्कूल की मार्कशीट लगाई थी। उस मार्कशीट में जो रोल नंबर था वह किसी श्वेता नाम की छात्रा का था। इस बात की पुष्टि यूपी बोर्ड ने की है। इस फाइल को भी तत्कालीन पासपोर्ट अधिकारी शैलेंद्र सिन्हा ने ओके कर दिया था।
केस 2:
मार्कशीट से गायब था जिले का कोड
सुल्तानपुर के रहने वाले मोकिल अंसारी ने पासपोर्ट बनवाने के लिए जनता इंटर कॉलेज पचपेड़वा संत कबीर नगर की मार्कशीट लगाई थी। संबंधित मार्कशीट पर जिले का कोड नहीं था। अत: वह मार्कशीट फर्जी थी। इसके बावजूद इस फाइल को शैलेंद्र सिन्हा ने पास कर दिया। इसके बाद सात सितंबर 2019 में कानपुर पासपोर्ट सेवा केंद्र से पासपोर्ट जारी किया गया था।
केस 3:
विभागीय अधिकारी ने लगाई थी आपत्ति
कौशांबी के भरवारी का रहने वाले मोहम्मद जावेद 3 अक्तूबर 2019 को पासपोर्ट बनवाने के लिए कानपुर पासपोर्ट ऑफिस पहुंचे। यहां किसी अधिकारी को उसकी मार्कशीट फर्जी होने का शक हुआ। संबंधित अधिकारी ने उस पर आपत्ति लगा दी। अधिकारी द्वारा लगाई गई आपत्ति के बावजूद भी जावेद की फाइल तत्कालीन पासपोर्ट अफसर शैलेंद्र सिन्हा ने पास कर दी थी। इसके बाद जावेद को पासपोर्ट नंबर 10011093 जारी कर दिया गया।
चंडीगढ़ के एपीओ का नाम इस मामले में है, इसलिए उन्हें नोटिस भेजा गया है। वह समय से आकर पूछताछ में शामिल नहीं होंगे तो हम न्यायालय की मदद से अपनी आगे की कार्रवाई शुरू करेंगे। - त्रिपुरारी पांडे, एसीपी, थाना- कर्नलगंज, कानपुर।