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नोटबंदी से आलू का सीजन पूरी तरह चौपट, ऐसे बर्बाद हुए किसान

Thu, 24 Nov 2016 05:27 PM IST
राजीव शर्मा/अमर उजाला, लुधियाना
राजीव शर्मा/अमर उजाला, लुधियाना Updated Thu, 24 Nov 2016 05:27 PM IST
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Nota ban impact on the potato season, ruin farmers
नोटबंदी का असर

नोटबंदी से पंजाब के आलू सीड मार्केट में सुनामी के हालात हैं। करेंसी की किल्लत के कारण किसान बर्बादी के कगार पर हैं। किसानों ने पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में सीड के लिए करीब 17 लाख क्विंटल (34 लाख बोरी) आलू की आपूर्ति कर दी थी पर नोटबंदी के कारण वहां के किसानों के पास बीज खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में आलू वहां पर अटक गया है।

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Nota ban impact on the potato season, ruin farmers
नोटबंदी का असर - फोटो : Getty

नोटबंदी से पहले आलू सीड की कीमत दो हजार रुपये प्रति 50 किलो पैकेट की थी, जो अब कम होकर  600 से 700 रुपये रह गई है। इस दाम पर भी खरीदार नहीं मिल रहे। काबिलेजिक्र है कि पूरे देश में पंजाब की पहचान आलू सीड मार्केट के तौर पर है। यहां औसतन अस्सी हजार हेक्टेयर जमीन में आलू पैदा किया जाता है। कुल उत्पादन का सत्तर फीसदी तक आलू सीड के लिए स्टोर किया जाता है। 

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नोटबंदी का असर - फोटो : social media

फरवरी मार्च में किसान स्टोर में आलू सीड का स्टॉक करते हैं। नवंबर में देश के अन्य राज्यों में इसकी सप्लाई की जाती है। पश्चिम बंगाल एवं कर्नाटक पंजाब के आलू सीड के प्रमुख खरीदार हैं। कंफेडरेशन ऑफ पटेटो सीड फारमर्स (पोस्कॉन) के प्रेसिडेंट सुखजीत सिंह भट्टी कहते हैं कि नोटबंदी पंजाब के आलू सीड किसानों पर सुनामी की तरह गिरी है। इसने किसानों को बर्बादी के कागार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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Nota ban impact on the potato season, ruin farmers
नोटबंदी का असर - फोटो : getty images

किसानों को पश्चिम बंगाल एवं कर्नाटक सीड भेजने में ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज, ढुलाई और तमाम खर्च जोड़ कर 1600 रुपये प्रति पैकेट लागत आती है। नोटबंदी से पहले दाम 2000 रुपये थे, अब वह सिमट कर 600-700 रुपये मिल रहे हैं। प्रति पैकेट नौ सौ से हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। पंजाब से 50 लाख बोरी (25 लाख क्विंटल) आलू सीड पश्चिम बंगाल को जाना था, इसमें से साठ फीसदी 30 लाख बोरी वहां भेज दी गई थी। 

Nota ban impact on the potato season, ruin farmers
नोटबंदी का असर

जबकि कर्नाटक में चार लाख बोरी भेजी गई थी। भट्टी ने कहा कि अब करेंसी की कमी से वहां माल बिक नहीं रहा है। नोटबंदी से सारा सिस्टम गड़बड़ा गया है। किसान को समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए। भट्टी ने कहा कि आलू सीड का सीजन सिर्फ बीस दिन का है। नोटबंदी ने सारा सीजन चौपट हो गया। अब पंजाब के किसानों के पास बीस लाख बोरी से अधिक आलू सीड का स्टॉक है। 

Nota ban impact on the potato season, ruin farmers
नोटबंदी का असर

सीड का आलू पुराना और साइज में छोटा होता है। बाजार में नया आलू आ गया है। ऐसे में पुराने आलू की मांग नहीं है। नतीजतन बीस लाख बोरी आलू सड़कों पर फेंकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। भट्टी ने कहा कि मौजूदा हालात को देउधखते हुए किसान अगले साल के लिए सीड का स्टॉक नहीं करेगा। सीड में करीब पचास फीसदी की कमी आने की संभावना है ऐसे में अगले सीजन में आलू की कीमतें आसमान पर होंगी। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद पंजाब के आलू किसान की नींद हराम हो गई है। सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करके राहत देनी होंगी। 

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