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नौनिहाल समेत 6 को दिए थे 4 करोड़: कक्कड़
अमर उजाला चंडीगढ़
Updated Tue, 14 Jan 2014 01:00 PM IST
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विदेश भेजने के नाम पर छात्रों से ठगी करने की आरोपी हेल्दी वे इमिग्रेशन कंपनी के मालिक अमित कक्कड़ ने पूर्व एसएसपी और एक मौजूदा डीएसपी समेत छह लोगों पर चार करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया है।
कक्कड़ ने जिन पर आरोप लगाया है उनमें पूर्व एसएसपी नौनिहाल सिंह, डीएसपी अनिल जोशी, एक इमिग्रेशन कंपनी चलाने वाले कर्ण अरोड़ा, सब इंस्पेक्टर राजदीप सिंह, स्टेट बैंक आफ इंडिया के पूर्व चीफ मैनेजर अविनाश चंद्र धवन और इंस्पेक्टर दीवान सिंह शामिल हैं।
ये रुपये कक्कड़ के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के दस मामलों में मदद करने और उसके परिजनों को गिरफ्तार न करने तथा उसे जमानत दिलाने में सहायता करने के नाम पर लिए गए।
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कक्कड़ ने अपनी शिकायत ई-मेल से आईजी आरपी उपाध्याय को भेजी है। शिकायत मिलने के बाद आईजी ने मामले की जांच एसएसपी डॉ. सुखचैन सिंह गिल को सौंप दी है।
कुल 11 मामले बनाए
अमित कक्कड़ ने सोमवार को प्रेस कान्फ्रेंस कर बताया कि वर्ष 2011 के अगस्त में एसएसपी नौनिहाल सिंह ने अपने दोस्त और इमिग्रेशन कंपनी के मालिक कर्ण अरोड़ा के कहने पर उनके परिवार पर धोखाधड़ी के दस केस दर्ज किए।
उनके पिता पर छेड़छाड़ और मारपीट का भी एक केस दर्ज किया गया। मामला दर्ज होने के बाद 16 अगस्त उन्होंने जिला अदालत में सरेंडर किया।
इसके बाद 18 अगस्त को सेक्टर 36 पुलिस स्टेशन में डीएसपी आशीष कपूर, एसएसपी नौनिहाल सिंह और करण अरोड़ा उनसे आकर मिला। एसएसपी ने कहा कि मामला सेटल कर्ण अरोड़ा करवाएगा। इससे बातचीत करो।
मामले में पिता, मां और पत्नी की गिरफ्तारी न करने के नाम पर कर्ण अरोड़ा ने 2 करोड़ 35 लाख रुपये एसएसपी के नाम पर मांगे।
इस मांग को पूरा करने के लिए उसने अपने सेक्टर 42बी के मकान नं 1266 को चार करोड़ और सेक्टर 43 के मकान नं 805 को तीन करोड़ 72 लाख रुपये में बेचा।
इस बीच एसआईटी इंचार्ज डीएसपी अनिल जोशी को लगा दिया गया। कक्कड़ के अनुसार रुपयों की पहली किस्त लेने कजहेड़ी में एसआई राजदीप सिंह, कर्ण अरोड़ा और एसएसपी के दोस्त जसविंदर सिंह पहुंचे।
रुपये कर्ण अरोड़ा ने लिए। दूसरी एक करोड़ रुपये की किस्त जीरकपुर में जसविंदर सिंह और कर्ण अरोड़ा ने ली। तीसरी किस्त 35 लाख रुपये जसविंदर वालिया और कर्ण अरोड़ा ने ही ली।
मामले को सेटल करने के लिए उन्होंने अपने जानकार स्टेट बैंक आफ इंडिया के पूर्व चीफ मैनेजर अविनाश चंद्र धवन के जरिए जोशी से संपर्क किया। डीएसपी अनिल जोशी ने एक करोड़ 65 लाख रुपये की मांग की।
डीएसपी ने एक करोड़ रुपये लेने अविनाश के साथ सेक्टर 43 सब्जी मंडी पहुंचे। डीएसपी ने बैग में नीचे रुपये और ऊपर सब्जी रखने के लिए कहकर बैग लिया।
उसके बाद डीएसपी ने अपने स्टाफ केलिए 65 लाख रुपये लिए। कक्कड़ के अनुसार ये सारे पैसे उसके पिता ने दिए।
नौ मामलों में बरी हुआ
कक्कड़ के अनुसार पुलिस ने उस पर विदेश भेजने के नाम पर ठगी के दस मामले दर्ज किए थे इनमें से वह नौ मामलों में बरी हो चुका है।
पुलिस ने उस पर जाली कागजात के जरिए बच्चों को विदेश भेजने का मामला दर्ज किया था मगर चार्जशीट में कोई जाली कागजात नहीं लगाया।
अमित कक्कड़ ने बताया कि सेक्टर 43 के मकान नं 805 को एसआईटी इंचार्ज डीएसपी अनिल जोशी के भतीजे ने तीन करोड़ 72 लाख रुपये में खरीदा है। जबकि दूसरी कोठी का सौदा एसआई ने करवाया था।
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कक्कड़ ने जिन पर आरोप लगाया है उनमें पूर्व एसएसपी नौनिहाल सिंह, डीएसपी अनिल जोशी, एक इमिग्रेशन कंपनी चलाने वाले कर्ण अरोड़ा, सब इंस्पेक्टर राजदीप सिंह, स्टेट बैंक आफ इंडिया के पूर्व चीफ मैनेजर अविनाश चंद्र धवन और इंस्पेक्टर दीवान सिंह शामिल हैं।
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ये रुपये कक्कड़ के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के दस मामलों में मदद करने और उसके परिजनों को गिरफ्तार न करने तथा उसे जमानत दिलाने में सहायता करने के नाम पर लिए गए।
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कक्कड़ ने अपनी शिकायत ई-मेल से आईजी आरपी उपाध्याय को भेजी है। शिकायत मिलने के बाद आईजी ने मामले की जांच एसएसपी डॉ. सुखचैन सिंह गिल को सौंप दी है।
कुल 11 मामले बनाए
अमित कक्कड़ ने सोमवार को प्रेस कान्फ्रेंस कर बताया कि वर्ष 2011 के अगस्त में एसएसपी नौनिहाल सिंह ने अपने दोस्त और इमिग्रेशन कंपनी के मालिक कर्ण अरोड़ा के कहने पर उनके परिवार पर धोखाधड़ी के दस केस दर्ज किए।
उनके पिता पर छेड़छाड़ और मारपीट का भी एक केस दर्ज किया गया। मामला दर्ज होने के बाद 16 अगस्त उन्होंने जिला अदालत में सरेंडर किया।
इसके बाद 18 अगस्त को सेक्टर 36 पुलिस स्टेशन में डीएसपी आशीष कपूर, एसएसपी नौनिहाल सिंह और करण अरोड़ा उनसे आकर मिला। एसएसपी ने कहा कि मामला सेटल कर्ण अरोड़ा करवाएगा। इससे बातचीत करो।
मामले में पिता, मां और पत्नी की गिरफ्तारी न करने के नाम पर कर्ण अरोड़ा ने 2 करोड़ 35 लाख रुपये एसएसपी के नाम पर मांगे।
इस मांग को पूरा करने के लिए उसने अपने सेक्टर 42बी के मकान नं 1266 को चार करोड़ और सेक्टर 43 के मकान नं 805 को तीन करोड़ 72 लाख रुपये में बेचा।
इस बीच एसआईटी इंचार्ज डीएसपी अनिल जोशी को लगा दिया गया। कक्कड़ के अनुसार रुपयों की पहली किस्त लेने कजहेड़ी में एसआई राजदीप सिंह, कर्ण अरोड़ा और एसएसपी के दोस्त जसविंदर सिंह पहुंचे।
रुपये कर्ण अरोड़ा ने लिए। दूसरी एक करोड़ रुपये की किस्त जीरकपुर में जसविंदर सिंह और कर्ण अरोड़ा ने ली। तीसरी किस्त 35 लाख रुपये जसविंदर वालिया और कर्ण अरोड़ा ने ही ली।
मामले को सेटल करने के लिए उन्होंने अपने जानकार स्टेट बैंक आफ इंडिया के पूर्व चीफ मैनेजर अविनाश चंद्र धवन के जरिए जोशी से संपर्क किया। डीएसपी अनिल जोशी ने एक करोड़ 65 लाख रुपये की मांग की।
डीएसपी ने एक करोड़ रुपये लेने अविनाश के साथ सेक्टर 43 सब्जी मंडी पहुंचे। डीएसपी ने बैग में नीचे रुपये और ऊपर सब्जी रखने के लिए कहकर बैग लिया।
उसके बाद डीएसपी ने अपने स्टाफ केलिए 65 लाख रुपये लिए। कक्कड़ के अनुसार ये सारे पैसे उसके पिता ने दिए।
नौ मामलों में बरी हुआ
कक्कड़ के अनुसार पुलिस ने उस पर विदेश भेजने के नाम पर ठगी के दस मामले दर्ज किए थे इनमें से वह नौ मामलों में बरी हो चुका है।
पुलिस ने उस पर जाली कागजात के जरिए बच्चों को विदेश भेजने का मामला दर्ज किया था मगर चार्जशीट में कोई जाली कागजात नहीं लगाया।
अमित कक्कड़ ने बताया कि सेक्टर 43 के मकान नं 805 को एसआईटी इंचार्ज डीएसपी अनिल जोशी के भतीजे ने तीन करोड़ 72 लाख रुपये में खरीदा है। जबकि दूसरी कोठी का सौदा एसआई ने करवाया था।