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गैर कोविड मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए लगा रहे अस्पताल के चक्कर
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चंडीगढ़। कोरोना संक्रमण की रफ्तार धीमी होने के बावजूद गैर-कोविड मरीजों को राहत नहीं मिली है। स्थिति यह है कि तमाम मुश्किलों के बाद ओपीडी में दिखाने वाले मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने केलिए कई दिनों तक अस्पताल केचक्कर काटने पड़ रहे हैं। जल्दी इलाज मिलने की उम्मीद में गरीब व जरूरतमंद मरीजों को सरकारी सुविधा होने केबावजूद ज्यादा पैसे खर्च कर निजी सेंटरों में जांच कराना पड़ रहा है। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि संक्रमण से बचाव के मानकों का पालन करते हुए भीड़ से बचाव केलिए तय संख्या से ज्यादा मरीजों को अगली डेट पर बुलाया जा रहा है। कोरोना के कारण जब स्थिति भयावह थी, तब मरीजों को संक्रमण की बात कहकर वापस कर दिया जा रहा था। मरीजों का कहना है कि जब कोरोना के मरीज नहीं हैं तो सामान्य मरीजों के इलाज में देरी क्यों की जा रही है।
गैर-कोविड मरीजों की अब भी फजीहत
जीएमएसएच-16 में मेरा इलाज चल रहा था। ओपीडी में देखने केबाद डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। अस्पताल में कई दिन बाद की डेट मिल रही थी, इसलिए मुझे निजी सेंटर में ज्यादा पैसे खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा।
-नंदिनी देवी, हल्लोमाजरा
आखिर महामारी केनाम पर कब तक अन्य मरीजों को परेशान किया जाएगा। गरीब व जरूरतमंद मरीज निजी अस्पतालों में मोटी रकम खर्च कर इलाज नहीं करवा सकता। उन लाखों मरीजों के बारे में सोचने की जरूरत है। ऐसा न हो कि इलाज के इंतजार में वे जिंदगी की जंग हार जाएं।
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-धर्मवीर सिसौदिया, धनास
बॉक्स
अस्पताल प्रशासन संक्रमण का दे रहा हवाला
जीएमसीएच-32 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर गर्ग व जीएमएसएच-16 केचिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके नागपाल इलाज में देरी के लिए संक्रमण से बचाव के मानकों का हवाला दे रहे हैं। डॉ. सुधीर का कहना है कि इमरजेंसी और ट्रामा के मरीजों की जांच तत्काल की जाती है, लेकिन सामान्य मरीजों को उनकेक्रम केअनुसार बुलाया जाता है। डॉ. नागपाल का कहना है कि रेडियोलॉजिस्ट का प्रयास होता है कि वह ज्यादा से ज्यादा मरीजों की जांच करे, लेकिन इसके लिए सुरक्षा के मानकों की अनदेखी नहीं की जा सकती क्योंकि अल्ट्रासाउंड केदौरान डॉक्टर और मरीज का सीधा संपर्क होता है।
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गैर-कोविड मरीजों की अब भी फजीहत
जीएमएसएच-16 में मेरा इलाज चल रहा था। ओपीडी में देखने केबाद डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। अस्पताल में कई दिन बाद की डेट मिल रही थी, इसलिए मुझे निजी सेंटर में ज्यादा पैसे खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा।
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-नंदिनी देवी, हल्लोमाजरा
आखिर महामारी केनाम पर कब तक अन्य मरीजों को परेशान किया जाएगा। गरीब व जरूरतमंद मरीज निजी अस्पतालों में मोटी रकम खर्च कर इलाज नहीं करवा सकता। उन लाखों मरीजों के बारे में सोचने की जरूरत है। ऐसा न हो कि इलाज के इंतजार में वे जिंदगी की जंग हार जाएं।
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-धर्मवीर सिसौदिया, धनास
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अस्पताल प्रशासन संक्रमण का दे रहा हवाला
जीएमसीएच-32 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर गर्ग व जीएमएसएच-16 केचिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके नागपाल इलाज में देरी के लिए संक्रमण से बचाव के मानकों का हवाला दे रहे हैं। डॉ. सुधीर का कहना है कि इमरजेंसी और ट्रामा के मरीजों की जांच तत्काल की जाती है, लेकिन सामान्य मरीजों को उनकेक्रम केअनुसार बुलाया जाता है। डॉ. नागपाल का कहना है कि रेडियोलॉजिस्ट का प्रयास होता है कि वह ज्यादा से ज्यादा मरीजों की जांच करे, लेकिन इसके लिए सुरक्षा के मानकों की अनदेखी नहीं की जा सकती क्योंकि अल्ट्रासाउंड केदौरान डॉक्टर और मरीज का सीधा संपर्क होता है।