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नो ट्री ऑफ पलाश इन चंडीगढ़, पर्यावरण प्रेमी ने यूटी प्रशासक को शिकायत दी
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 24 May 2017 04:49 PM IST
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नो ट्री ऑफ पलाश इन चंडीगढ़
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अब कोई भी अभिभावक अपने बच्चों को यह नहीं दिखा पाएंगे कि चंडीगढ़ का स्टेट फ्लावर (पलाश) कौन सा है, क्योंकि पलाश के फूल समाप्त हो गए हैं। इस समय सिर्फ पंजाब राजभवन में पलाश का एक पेड़ लगा हुआ है। जहां पर बिना रोक टोक जाना आसान नहीं है। पर्यावरण प्रेमी एवं सेक्टर-27 डी निवासी राहुल महाजन ने सूचना के अधिकार के तहत प्रशासन और नगर निगम के बागवानी विभाग से इस संबंध में जानकारी मांगी थी।
जवाब में प्रशासन की ओर से बताया गया कि सिर्फ राजभवन में ही पलाश का एक पेड़ है। जबकि नगर निगम ने सूचना देने की बजाय यह कहा है कि इनकी गिनती ही संभव नहीं है। हकीकत यह है कि शहर में पलाश फूल के पेड़ ही दिखाई नहीं देते हैं। इसकी शिकायत राहुल महाजन ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से की है। राहुल महाजन का कहना है कि पिछले 20 वर्षों से शहर में पलाश के पौधे ही नहीं लगाए गए हैं।
महाजन ने बताया कि प्रशासन और नगर निगम के पास कोई ऐसा रिकार्ड नहीं है कि उन्होंने कितने पलाश के पौधे लगाए हैं। महाजन ने शिकायत में यह भी कहा है कि शहर में ग्रीनरी का भी यह हाल है। संबंधित विभाग की ओर से शहर में लगे पेड़ों की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है उन्होंने आशंका जताई कि इस समय जो हाल सुखना का हो गया है, कही ऐसा ही आने वाले वर्षों में शहर की हरियाली का हो जाए। ऐसे में शहर में पौधों को बचाने के लिए मुहिम चलानी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी के लिए हरियाली बचाई जाए।
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जवाब में प्रशासन की ओर से बताया गया कि सिर्फ राजभवन में ही पलाश का एक पेड़ है। जबकि नगर निगम ने सूचना देने की बजाय यह कहा है कि इनकी गिनती ही संभव नहीं है। हकीकत यह है कि शहर में पलाश फूल के पेड़ ही दिखाई नहीं देते हैं। इसकी शिकायत राहुल महाजन ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से की है। राहुल महाजन का कहना है कि पिछले 20 वर्षों से शहर में पलाश के पौधे ही नहीं लगाए गए हैं।
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महाजन ने बताया कि प्रशासन और नगर निगम के पास कोई ऐसा रिकार्ड नहीं है कि उन्होंने कितने पलाश के पौधे लगाए हैं। महाजन ने शिकायत में यह भी कहा है कि शहर में ग्रीनरी का भी यह हाल है। संबंधित विभाग की ओर से शहर में लगे पेड़ों की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है उन्होंने आशंका जताई कि इस समय जो हाल सुखना का हो गया है, कही ऐसा ही आने वाले वर्षों में शहर की हरियाली का हो जाए। ऐसे में शहर में पौधों को बचाने के लिए मुहिम चलानी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी के लिए हरियाली बचाई जाए।
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