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सेनाकर्मियों के पति और पत्नियों को हाउस टैक्स में नो रिलीफ, ये रही वजह

Thu, 28 Dec 2017 11:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 28 Dec 2017 11:26 AM IST
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no relief in house tax to indian army personnel staying in chandigarh
हाउस टैक्स - फोटो : DEMO Pics
चंडीगढ़ में रहने वाले आर्मी में कार्यरत और पूर्व फौजियों की पत्नियों और पतियों को हाउस टैक्स में छूट देने के लिए नगर निगम तैयार नहीं है। इसके लिए नगर निगम ने पंजाब सरकार की ओर से जारी अधिसूचना का हवाला दिया है। रिटायर्ड फौजी इसकी मांग कर रहे थे। इस मांग पर प्रशासन ने नगर निगम से उनकी राय पूछने के साथ साथ यह भी बताने के लिए कहा था कि अगर यह छूट दी जाती है तो कितना वित्तीय बोझ नगर निगम पर बढ़ेगा।
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लेकिन नगर निगम के अतिरिक्त कमिश्नर की ओर से गृह एवं स्थानीय सचिव को जो पत्र भेजा गया उसमें कहा गया है कि इस बारे में पंजाब सरकार से पूछा गया था। पंजाब सरकार की ओर से जो पत्र आया है उसमें 16 दिसंबर, 2014 की अधिसूचना का भी जिक्र किया है। इसमें कहा गया है कि कार्यरत और पूर्व फौजियों की पत्नियों और पतियों को हाउस टैक्स में छूट देने का कोई प्रावधान नहीं है।
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नगर निगम ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई रिकार्ड नहीं है जिससे यह पता चल सके कि शहर में रिटायर्ड फौजियों के कितने घर हैं इसलिए वित्तीय बोझ की गणना नहीं हो सकती। मालूम हो कि मनोनीत पार्षद एमएस कांडल ने भी पिछले दिनों प्रशासन के अधिकारियों से आर्मी में काम करने वाले फौजियों और रिटायर्ड फौजियों की पत्नियों को टैक्स में छूट देने की मांग की थी।
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पूर्व फौजियों और वीर नारियों को हाउस टैक्स छूट
शहर में सिर्फ पूर्व फौजियों और वीर नारियों को ही सिर्फ 12 मरले के घर तक हाउस टैक्स में छूट है। इसके साथ ही अगर किसी ने किराएदार रखा है तो टैक्स में छूट नहीं मिलेगी। इस समय शहर में 12 हजार फौजियों के घर हैं। रिटायर्ड मेजर एवं पूर्व मनोनीत पार्षद डीएस संधू ने पिछले साल पंजाब की तर्ज पर पूर्व फौजियों के हर एरिया के मकान पर हाउस टैक्स पर छूट देने की मांग प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से की थी, लेकिन अभी तक इन लोगों को भी कोई राहत नहीं मिली है।


रिटायर्ड मेजर डीएस संधू का कहना है कि  वह कोई अतिरिक्त सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि पंजाब में जो सुविधा मिल रही है उसे ही मांग कर रहे हैं। किराएदार की शर्त प्रशासन को हटानी चाहिए। प्रशासन ने जो 12 मरले तक छूट दी है वह एक तरह से चंडीगढ़ के रिटायर्ड फौजियों के साथ सौतेला व्यवहार है।
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