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Carmel Convent School Accident: चंडीगढ़ का सबसे बड़ा दुख...पेड़ किसका है? प्रूनिंग के लिए बस चक्कर ही काटते रहते हैं लोग

Sat, 09 Jul 2022 10:55 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 09 Jul 2022 10:55 AM IST
सार

निजी स्कूल में पेड़ गिरने के हादसे के बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया व अलग-अलग माध्यम से अपने अनुभव साझा किए। लोगों ने बताया कि एक सूखे पेड़ को हटाने के लिए उन्हें औसतन तीन महीने से एक साल तक का समय लग जाता है।

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No pruning of trees on time by administration and Horticulture Department of Municipal Corporation in Chandigarh
चंडीगढ़ में कई पेड़ गिरने के कगार पर हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के सेक्टर-9 स्थित कार्मल कान्वेंट स्कूल में शुक्रवार सुबह 250 साल पुराना पेड़ गिरने से एक बच्ची की मौत हो गई थी। प्रशासन ने इस पेड़ को हेरिटेज का दर्जा दिया हुआ था। चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल को हरियाली के लिए जाना जाता है लेकिन ये हरियाली लोगों की जान लेने लगी है। कारण है कि प्रशासन और नगर निगम के बागवानी विभाग की तरफ से समय पर पेड़ों की कटाई-छंटाई नहीं करना। लोग शिकायत करते रह जाते हैं, लेकिन प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी एक-दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी डालते रहते हैं।

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शहर में पेड़ों के रखरखाव का जिम्मा कई विभागों के पास है। सरकारी घरों के अंदर के पेड़ प्रशासन के पास है, जबकि घरों के बाहर के पेड़ नगर निगम के पास है। इसी तरह अलग-अलग सड़क किनारे के पेड़ अलग-अलग विभाग के पास हैं जबकि प्रशासन के वन विभाग ने कई पेड़ हेरिटेज घोषित किए हैं, उनकी देखभाल वह करते हैं। इसी तरह प्रशासन का अलग बागवानी विभाग है और नगर निगम का अलग बागवानी विभाग है। कौन सा पेड़ किसके पास है, इसे लेकर लोगों में काफी असमंजस की स्थिति रहती है। लोग अपने घरों के पेड़ों की कटाई-छंटाई के लिए विभागों के चक्कर काटते रह जाते हैं। 
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स्कूल में पेड़ गिरने के हादसे के बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया व अलग-अलग माध्यम से अपने अनुभव साझा किए। लोगों ने बताया कि एक सूखे पेड़ को हटाने के लिए उन्हें औसतन तीन महीने से एक साल तक का समय लग जाता है। ये पीरियड बहुत खतरनाक होता है, क्योंकि इसी समय पेड़ गिरने का खतरा रहता है। बता दें कि नगर निगम ने इस व्यवस्था को ऑनलाइन कर दिया है, लेकिन उसमें भी इजाजत मिलने के बाद काम होने के लिए कई महीने इंतजार करना पड़ता है। इस बीच कई मामले ऐसे आए हैं कि इंतजार के दौरान ही पेड़ गिर जाता है।

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केस-1

कलाग्राम लाइट प्वाइंट की ओर से हाउसिंग बोर्ड लाइट प्वाइंट की तरफ जाने वाली सड़क के बीचोंबीच दो सफेदे के पेड़ कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। ये सड़क की तरफ तिरछे हो चुके हैं। समस्या समाधान टीम के क्रांति शुक्ला की तरफ से जून 2020 में नगर निगम के आयुक्त को लिखित में शिकायत दी गई थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। यहां कभी भी हादसा हो सकता है।

केस-2  

पंजाब पुलिस हेडक्वार्टर के पीछे कई पेड़ हैं, जिन्हें कंक्रीट से ढक दिया गया। इसकी वजह से पेड़ सूख रहा है और कमजोर हो गया है। किसी भी समय गिर सकता है। इसे लेकर खुड्डा अलीशेर के प्रवीण ने जुलाई 2019 में शिकायत दी थी। उन्हें नगर निगम के कर्मचारी ने फोन कर कहा कि वो जगह उनके क्षेत्राधिकार में नहीं आती है। प्रवीण ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल से लेकर तमाम अधिकारियों को पत्र लिखे लेकिन आज तक वह पेड़ कंक्रीट से ढके हुए हैं।

10 दिन पहले सलाहकार के सामने डिप्टी मेयर ने बोला- पेड़ों की प्रूनिंग के लिए काटने पड़ते हैं चक्कर

पेड़ों की प्रूनिंग को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। 28 जून को हुई एक बैठक में डिप्टी मेयर अनूप गुप्ता ने पेड़ों की प्रूनिंग पर सवाल उठाए थे। कहा था कि पेड़ छंटवाने के लिए प्रशासन की तरफ से छह-छह महीने मंजूरी का इंतजार करना पड़ता है। अगर इजाजत मिल भी जाती है तो जेई कई दिनों तक लोगों को घुमाते रहते हैं। इस पर सलाहकार धर्मपाल ने चीफ इंजीनियर से जवाब भी मांगा था।


 

पेड़ों की कटाई-छंटाई में क्यों देरी होती है, इस पूरे प्रोसेस को मैं जल्द ही रिव्यू करूंगा। ये देखा जाएगा, कि किस स्तर पर और क्यों परमिशन देने में देरी होती है। लोगों की अकसर शिकायत रहती है, इसे दूर किया जाएगा। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक 

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