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चिंता की जरूरत नहीं, टीकाकरण के 30 दिनों में ही दुष्प्रभाव का खतरा : प्रो. मधु
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चंडीगढ़। कोविशील्ड वैक्सीन के टीकाकरण के 21 से 30 दिन के अंदर ही दुष्प्रभाव दिखाई दे सकता है। उसके बाद इसके दुष्प्रभाव का खतरा नहीं रहता इसलिए जिन्होंने भी यह वैक्सीन लगवाई है, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसके साथ भारत सरकार ने इस संभावित जोखिम को ध्यान में रखते हुए 2021 में एडवाइजरी भी जारी कर दी थी। ये बातें पीजीआई में कोविशील्ड के ट्रायल की प्रमुख अन्वेषक रही सामुदायिक चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर मधु गुप्ता ने बुधवार को कहीं।
कोविशील्ड वैक्सीन और दुर्लभ रक्त के थक्के के दुष्प्रभाव के बीच संभावित संबंध के बारे में एस्ट्राजेनेका की घोषणा के बाद टीकाकरण कराने वाले लोगों के मन में उठ रहे सवालों को देखते हुए प्रोफेसर मधु ने यह जानकारी दी और आश्वस्त किया। उन्होंने बताया कि अत्यंत दुर्लभ दुष्प्रभाव जिससे थ्रांबोसिस विद थ्रांबोसाइटोपेनिया सिंड्रोम कहा जाता है, टीकाकरण के 21 से 30 दिन के बीच सामने आ सकता है इसलिए अब चिंता करने की कोई भी वजह नहीं है।
प्रो. मधु ने बताया कि कोविशील्ड टीके को लेकर देशभर के 17 केंद्रों में तीन ह्यूमन ट्रायल हुए थे। उन केंद्रों में पीजीआई भी शामिल था। पीजीआई में 250 प्रतिभागियों को यह टीका लगाया गया था लेकिन उनमें से किसी में भी यह दुष्प्रभाव सामने नहीं आया। उन्होंने बताया कि ह्यूमन ट्रायल में देश भर में 1600 प्रतिभागी शामिल थे। उनमें से किसी में भी इस दुष्प्रभाव की पुष्टि नहीं हुई है।
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सात करोड़ टीकाकरण में से एक को खतरा
प्रो. मधु ने बताया कि मई 2021 में भारत सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी में विशेष रूप से इस दुर्लभ दुष्प्रभाव का उल्लेख किया गया था और कहा गया था कि इस तरह के प्रतिकूल घटनाओं के लक्षण वाले व्यक्ति को इसकी दूसरी खुराक नहीं दी जानी चाहिए। वहीं सिरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के आंकड़ों से पता चलता है कि यह दुष्प्रभाव सात करोड़ टीकाकरण में से एक में हो सकता है। इस आंकड़े का उल्लेख उनके सूचनात्मक पत्रक में भी किया गया है। प्रो. मधु ने बताया कि पीजीआई में जिन स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लगाया गया और निगरानी की गई, उनमें गंभीर बीमारी और मौत को रोकने में टीका 70 प्रतिशत तक प्रभावशाली पाया गया।
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कोविशील्ड वैक्सीन और दुर्लभ रक्त के थक्के के दुष्प्रभाव के बीच संभावित संबंध के बारे में एस्ट्राजेनेका की घोषणा के बाद टीकाकरण कराने वाले लोगों के मन में उठ रहे सवालों को देखते हुए प्रोफेसर मधु ने यह जानकारी दी और आश्वस्त किया। उन्होंने बताया कि अत्यंत दुर्लभ दुष्प्रभाव जिससे थ्रांबोसिस विद थ्रांबोसाइटोपेनिया सिंड्रोम कहा जाता है, टीकाकरण के 21 से 30 दिन के बीच सामने आ सकता है इसलिए अब चिंता करने की कोई भी वजह नहीं है।
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प्रो. मधु ने बताया कि कोविशील्ड टीके को लेकर देशभर के 17 केंद्रों में तीन ह्यूमन ट्रायल हुए थे। उन केंद्रों में पीजीआई भी शामिल था। पीजीआई में 250 प्रतिभागियों को यह टीका लगाया गया था लेकिन उनमें से किसी में भी यह दुष्प्रभाव सामने नहीं आया। उन्होंने बताया कि ह्यूमन ट्रायल में देश भर में 1600 प्रतिभागी शामिल थे। उनमें से किसी में भी इस दुष्प्रभाव की पुष्टि नहीं हुई है।
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सात करोड़ टीकाकरण में से एक को खतरा
प्रो. मधु ने बताया कि मई 2021 में भारत सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी में विशेष रूप से इस दुर्लभ दुष्प्रभाव का उल्लेख किया गया था और कहा गया था कि इस तरह के प्रतिकूल घटनाओं के लक्षण वाले व्यक्ति को इसकी दूसरी खुराक नहीं दी जानी चाहिए। वहीं सिरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के आंकड़ों से पता चलता है कि यह दुष्प्रभाव सात करोड़ टीकाकरण में से एक में हो सकता है। इस आंकड़े का उल्लेख उनके सूचनात्मक पत्रक में भी किया गया है। प्रो. मधु ने बताया कि पीजीआई में जिन स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लगाया गया और निगरानी की गई, उनमें गंभीर बीमारी और मौत को रोकने में टीका 70 प्रतिशत तक प्रभावशाली पाया गया।