ऊधम सिंह की शहादत पर चौंकाने वाला खुलासा
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केंद्र सरकार ऊधम सिंह को राष्ट्रीय शहीद नहीं मानती। दरअसल सरकार के पास सिंह के शहीद होने संबंधी कोई जानकारी नहीं है। यहां तक कि नेशनल आर्काइव ऑफ इंडिया के पास भी ऊधम सिंह के राष्ट्रीय शहीद होने का रिकॉर्ड नहीं है।
लेखक राकेश कुमार की ओर से सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है। राकेश कुमार ने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय से शहीद ऊधम सिंह के बारे में जानकारी मांगी गई थी।
कम्पयूटर में भी नहीं मिला कोई रिकॉर्ड
आरटीआई में कहा गया था कि ऊधम सिंह जिन्होंने इंग्लैंड में जनरल डायर को मारा था और 31 जुलाई 1940 को उन्हें लंदन में फांसी दे दी गई थी, क्या वह भारत के राष्ट्रीय शहीद हैं? दूसरा भारत सरकार ने उनके राष्ट्रीय शहीद होने की कब घोषणा की थी?
इस पर गृह मंत्रालय ने सीधा जवाब देने के बजाय सूचना अधिकार पत्र को भारत सरकार के विभाग नेशनल आर्काइव ऑफ इंडिया को भेज दिया। आर्काइव ने 23 जुलाई 2014 को दी जानकारी में बताया कि शुरुआती कंप्यूटरीकृत रिकॉर्ड की खोजबीन के बाद ऊधम सिंह के बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है।
आजादी के लिए लड़ी थी जंग
जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लेने के लिए ऊधम सिंह ने 13 मार्च 1940 को लंदन में माइकल डायर, मारकूअस ऑफ जेट लैंड, लूइस डेन, लार्ड लेमिगटन पर छह गोलियां दागीं। डायर की मौके पर ही मौत हो गई जबकि बाकी सभी घायल हो गए। यह सब भारत में गवर्नर रह चुके थे और भारत की आजादी के खिलाफ थे।
ऊधम सिंह को डायर की हत्या के दोष में 31 जुलाई 1940 को अंग्रेजों ने लंदन में फांसी लगा दी थी। ऊधम सिंह को उसी जेल में बने कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया था। 19 जुलाई 1974 को केंद्र सरकार ऊधम सिंह की अस्थियां भारत लाई। 31 जुलाई 1974 को अस्थियों को ऊधम सिंह के जन्म स्थान सुनाम में अग्नि को समर्पित कर दिया गया।