फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   No Facility in Chandigarh for Fire Safety

सेफ्टी शून्य: एक चिंगारी, पूरे चंडीगढ़ पर भारी

Wed, 11 Jun 2014 11:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 11 Jun 2014 11:09 AM IST
विज्ञापन
No Facility in Chandigarh for Fire Safety

शहर में आग बुझाने के लिए कई जगह फायर हाइडेंट लगाए गए थे। वह अब नजर नहीं आते। कुछ अतिक्रमण के भेंट चढ़ गए तो कुछ को पानी के मिस्यूज के कारण बंद कर दिया गया। नगर निगम ने आग की घटनाओं से निपटने के लिए पिछले साल दो करोड़ का बजट रखा था, जिसमें से केवल 37 लाख रुपये ही खर्च किए गए। जबकि इस वर्ष बजट 12 करोड़ का है।

विज्ञापन


लापरवाही का आलम यह है कि विभाग ने सेक्टर-17 के फायर स्टेशन में फायर टेंडर बनाने के लिए छह साल पहले चेसिस खरीदी थी, जो आज तक खड़ी है। वहीं, तीन टाटा 207 खरीदी गई हैं, जिनमें आग बुझाने के उपकरण लगाए जाने हैं, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
विज्ञापन


कई वर्ष पहले फिनलैंड से 60 मीटर की हाइड्रोलिक फायर लैडर खरीदने की तैयारी की गई थी, लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अभी फायर विभाग के पास 42 मीटर की हाइड्रोलिक लैडर है।

विज्ञापन
विज्ञापन

फायर कर्मियों के साथ भेदभाव

No Facility in Chandigarh for Fire Safety

वर्ष 2008 में फायरकर्मी अमरजीत सिंह मावी की मौत के बाद नगर निगम ने पेंशन व अन्य सुविधाएं देने के लिए प्रस्ताव पास कर दिया था, लेकिन प्रशासन ने अभी तक फैसला नहीं लिया। अमरजीत सिंह मावी को शहीद का दर्जा मिल गया, लेकिन उसके परिवार को उसका लाभ नहीं मिला।

एमसी चंडीगढ़ फायर एंड इमरजेंसी इंप्लाइज यूनियन के प्रधान हरजिंदर सिंह बाजवा का कहना है कि शहीद को पूरा लाभ मिलना चाहिए। इसके तहत एक्सट्राआर्डिनरी पेंशन, 10 लाख रुपये मुआवजा और अन्य सुविधाएं मिले।

लेकिन, अभी तक कुछ भी नहीं हुआ। बाजवा का कहना है कि नगर निगम ने उस समय पांच लाख रुपये देने का एलान किया था, लेकिन नहीं दिया।

अब प्रशासन कराएगा स्ट्रक्चरल ऑडिट

No Facility in Chandigarh for Fire Safety

रविवार को सेक्टर-17 में एनआईईएलआईटी की इमारत के ढहने के बाद अब यूटी प्रशासन ने शहर की सालों पुरानी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की तैयारी शुरू कर दी है। चंडीगढ़ की कई इमारतें हैं जिनकी चेकिंग नहीं हो पाई है।

यूटी प्रशासन ने इससे पहले भी कई ऐसी इमारतों की पहचान की थी। प्रशासन ने कई पुरानी इमारतों का सर्वे कराने के बाद रिपोर्ट तैयार की थी।

इस सर्वे के दौरान ही यह स्पष्ट हुआ था कि कई इमारतों में अच्छी क्वालिटी की ईंटें नहीं हैं। यह सर्वे वर्ष 2007 में सेक्टर-26 में सब्जी मंडी में शेड के गिरने के बाद हुआ था।

गिराया जा सकता है असुरक्षित इमारतों को

No Facility in Chandigarh for Fire Safety

अब रविवार को हुई इस घटना से सबक लेते हुए प्रशासन ने यह तय किया है कि जल्द ही उन सभी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट करा लिया जाए। चंडीगढ़ के ड्राफ्ट मास्टर प्लान में भी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की बात कही गई है।

इसके बाद जिन इमारतों को असुरक्षित घोषित किया जाएगा उन्हें गिराया जा सकता है। ध्यान रहे कि चंडीगढ़ सेंसटिव जोन 4 में आता है और इससे यहां की कई इमारतों को खतरा है।

भूकंप आने पर इन इमारतों के गिरने की संभावना है। ऐसे में खस्ताहाल हो चुकी इन इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट जरूरी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed