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चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने सर्कुलर जारी करके स्पष्ट की स्थिति, नियमित कक्षाओं के लिए रखी शर्त
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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स्कूलों की नियमित कक्षाओं पर चंडीगढ़ प्रशासन ने फिलहाल अंतिम निर्णय नहीं लिया है। वीरवार को भेजे अपने सर्कुलर में शिक्षा विभाग ने कहा है कि 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थी 31 अक्तूबर तक स्वेच्छा से आएंगे। स्कूल आने के लिए उन पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जाएगा। इसके लिए जो नियम जारी किए गए थे, उनका सख्ती से पालन करना होगा। नियमित कक्षाओं पर फैसला बाद में लिया जाएगा।
यदि सब कुछ नियंत्रित रहा और अभिभावक बच्चों को भेजने के लिए तैयार रहे तो दो नवंबर से नौवीं से 12वीं कक्षाएं नियमित चलेंगी। हालांकि, प्राइवेट स्कूल संचालक अभी स्कूल खोलने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर अभिभावकों से इस बारे में पूछा कि क्या वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं, 90 फीसदी अभिभावकों ने फिलहाल बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मना कर दिया है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने सर्कुलर में यह भी कहा है कि पहली से आठवीं तक की कक्षाओं का पहले की तरह ऑनलाइन शिक्षण जारी रहेगा। जो विद्यार्थी और शिक्षक स्कूल आ रहे हैं, उन्हें कोविड-19 के दिशा-निर्देश और विभाग की ओर से जारी मानकों का पालन करना होगा। 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी अभिभावकों की अनुमति के साथ ही स्कूल आ सकेंगे। विद्यार्थियों के आने पर किसी का तरह का दबाव नहीं बनाया जाएगा।
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प्रशासन के फैसले के बाद ही खोलेंगे स्कूल
स्कूल खोलने को लेकर हम प्रशासन के फैसले के साथ चलेंगे। सर्वे में भी ज्यादातर अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने से मना किया है। ऐसे में जब तक 50 प्रतिशत तक अभिभावक स्कूल भेजने के लिए हामी नहीं भरते, तब तक नियमित कक्षाओं का कोई फायदा नहीं होगा।
- एचएस मामिक , अध्यक्ष, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
90 फीसदी अभिभावकों ने मना किया
हमने एक सर्वे कराया था, जिसमें 90 फीसदी अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मना कर दिया है। अधिकतर अभिभावकों ने ऑनलाइन एजुकेशन को तरजीह दी है। ऐसे में जब तक अभिभावक हामी नहीं भरते, तब तक स्कूल नहीं खोल सकते।
- रीमा दीवान, प्रिंसिपल दिल्ली पब्लिक स्कूल
ज्यादातर अभिभावक स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं
कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण और खतरे को देखते हुए ज्यादातर अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में प्रशासन को भी अभिभावकों के फैसले के साथ ही चलना चाहिए। विशेषज्ञ बता रहे हैं कि आने वाले दिनों में संक्रमण बढ़ सकता है तो प्रशासन को थोड़ा इंतजार करना चाहिए।
- नितिन गोयल, अध्यक्ष, पैरेंट्स एसोसिएशन
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यदि सब कुछ नियंत्रित रहा और अभिभावक बच्चों को भेजने के लिए तैयार रहे तो दो नवंबर से नौवीं से 12वीं कक्षाएं नियमित चलेंगी। हालांकि, प्राइवेट स्कूल संचालक अभी स्कूल खोलने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर अभिभावकों से इस बारे में पूछा कि क्या वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं, 90 फीसदी अभिभावकों ने फिलहाल बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मना कर दिया है।
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जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने सर्कुलर में यह भी कहा है कि पहली से आठवीं तक की कक्षाओं का पहले की तरह ऑनलाइन शिक्षण जारी रहेगा। जो विद्यार्थी और शिक्षक स्कूल आ रहे हैं, उन्हें कोविड-19 के दिशा-निर्देश और विभाग की ओर से जारी मानकों का पालन करना होगा। 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी अभिभावकों की अनुमति के साथ ही स्कूल आ सकेंगे। विद्यार्थियों के आने पर किसी का तरह का दबाव नहीं बनाया जाएगा।
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प्रशासन के फैसले के बाद ही खोलेंगे स्कूल
स्कूल खोलने को लेकर हम प्रशासन के फैसले के साथ चलेंगे। सर्वे में भी ज्यादातर अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने से मना किया है। ऐसे में जब तक 50 प्रतिशत तक अभिभावक स्कूल भेजने के लिए हामी नहीं भरते, तब तक नियमित कक्षाओं का कोई फायदा नहीं होगा।
- एचएस मामिक , अध्यक्ष, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
90 फीसदी अभिभावकों ने मना किया
हमने एक सर्वे कराया था, जिसमें 90 फीसदी अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मना कर दिया है। अधिकतर अभिभावकों ने ऑनलाइन एजुकेशन को तरजीह दी है। ऐसे में जब तक अभिभावक हामी नहीं भरते, तब तक स्कूल नहीं खोल सकते।
- रीमा दीवान, प्रिंसिपल दिल्ली पब्लिक स्कूल
ज्यादातर अभिभावक स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं
कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण और खतरे को देखते हुए ज्यादातर अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में प्रशासन को भी अभिभावकों के फैसले के साथ ही चलना चाहिए। विशेषज्ञ बता रहे हैं कि आने वाले दिनों में संक्रमण बढ़ सकता है तो प्रशासन को थोड़ा इंतजार करना चाहिए।
- नितिन गोयल, अध्यक्ष, पैरेंट्स एसोसिएशन