{"_id":"5f16a16d89ff3c5040068429","slug":"nitttr-suggestion-to-change-machines-of-jaypee-garbage-plant","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एनआईटीटीटीआर का सुझाव- जेपी प्लांट में कचरा प्रोसेस करना है तो बदलनी पड़ेंगी सभी मशीनें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनआईटीटीटीआर का सुझाव- जेपी प्लांट में कचरा प्रोसेस करना है तो बदलनी पड़ेंगी सभी मशीनें
Tue, 21 Jul 2020 01:34 PM IST
खुशबू गोयल
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 21 Jul 2020 01:34 PM IST
विज्ञापन
जेपी गारबेज प्लांट
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर (एनआईटीटीटीआर) ने सोमवार को जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट की रिपोर्ट नगर निगम को सौंप दी। एनआईटीटीटीआर की टीम ने रिपोर्ट में कहा है कि गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट में लगी सभी मशीनों को बदलना होगा। हालांकि, कुछ समय पहले लगी एक मशीन को सही बताया है।
एनआईटीटीटीआर ने रिपोर्ट में बताया है कि अभी जो मशीनें लगी हैं, वह काफी पुरानी टेक्नोलॉजी की हैं। इन मशीनों से केवल 15 से 20 प्रतिशत कार्य ही लिया जा सकता है। जोकि अभी चल रहा है। शहर में प्रतिदिन 500 टन कचरा निकलता है। ऐसे में पूरा कचरा प्रोसेस करने की क्षमता इन मशीनों में नहीं है। इसके लिए नई टेक्नोलॉजी वाली मशीनें ही लगानी होंगी।
हर दो से तीन घंटे में रोकनी पड़ती है मशीन
अधिकारियों का कहना है कि मशीनों की स्थिति वास्तव में काफी खस्ता हाल है। हर दो से तीन घंटे में मशीन गर्म हो जाती है। उसके बाद मशीन को रोकना पड़ता है। न रोकने के स्थिति में कई बार पट्टे में आग भी लग जाती है। पहले भी प्लांट में कचरे में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में मशीन पर बहुत ज्यादा बोझ नहीं डाला जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एनआईटीटीटीआर ने रिपोर्ट में बताया है कि अभी जो मशीनें लगी हैं, वह काफी पुरानी टेक्नोलॉजी की हैं। इन मशीनों से केवल 15 से 20 प्रतिशत कार्य ही लिया जा सकता है। जोकि अभी चल रहा है। शहर में प्रतिदिन 500 टन कचरा निकलता है। ऐसे में पूरा कचरा प्रोसेस करने की क्षमता इन मशीनों में नहीं है। इसके लिए नई टेक्नोलॉजी वाली मशीनें ही लगानी होंगी।
विज्ञापन
हर दो से तीन घंटे में रोकनी पड़ती है मशीन
अधिकारियों का कहना है कि मशीनों की स्थिति वास्तव में काफी खस्ता हाल है। हर दो से तीन घंटे में मशीन गर्म हो जाती है। उसके बाद मशीन को रोकना पड़ता है। न रोकने के स्थिति में कई बार पट्टे में आग भी लग जाती है। पहले भी प्लांट में कचरे में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में मशीन पर बहुत ज्यादा बोझ नहीं डाला जा सकता है।
विज्ञापन
12 साल पुरानी हैं मशीनें, अब रिपेयरिंग की भी स्थिति नहीं
रिपोर्ट में बताया गया है कि मशीनें 12 साल पुरानी टेक्नोलॉजी पर चल रही हैं। इस टेक्नोलॉजी की मशीनों को रिपेयर कराया जाएगा तब भी शत प्रतिशत कचरा प्रोसेस नहीं कराया जा सकता है, इसलिए मशीनों की रिपेयरिंग पर खर्चा करना ठीक नहीं। पुरानी मशीन होने के कारण बिजली की खपत भी ज्यादा है और कचरा प्रोसेस भी ठीक से नहीं हो रहा है।
नई तकनीक की मशीनों के लिए कचरा तो अलग-अलग करना ही होगा
अगर निगम ने नई तकनीक की मशीनें लगा भी लीं तब भी गीला व सूखा कचरा अलग-अलग तो करना ही होगा। चूंकि निगम के तीन मैटेरियल रिकवरी सेंटर बनने हैं। जहां सूखा, गीला व खतरनाक कचरा अलग-अलग होगा। उसके बाद कचरा प्रोसेस होने जाएगा। सेंटर तक अलग-अलग कचरा पहुंचाने के लिए निगम जल्द 450 गाड़ियां भी खरीदने जा रहा है। यह गाड़ियां स्मार्ट सिटी के तहत खरीदी जाएंगी। इनमें जीपीएस सिस्टम लगा होगा।
नई तकनीक की मशीनों के लिए कचरा तो अलग-अलग करना ही होगा
अगर निगम ने नई तकनीक की मशीनें लगा भी लीं तब भी गीला व सूखा कचरा अलग-अलग तो करना ही होगा। चूंकि निगम के तीन मैटेरियल रिकवरी सेंटर बनने हैं। जहां सूखा, गीला व खतरनाक कचरा अलग-अलग होगा। उसके बाद कचरा प्रोसेस होने जाएगा। सेंटर तक अलग-अलग कचरा पहुंचाने के लिए निगम जल्द 450 गाड़ियां भी खरीदने जा रहा है। यह गाड़ियां स्मार्ट सिटी के तहत खरीदी जाएंगी। इनमें जीपीएस सिस्टम लगा होगा।
रुड़की आईआईटी की रिपोर्ट के बाद निगम लेगा फैसला
अभी निगम ने एनआईटीटीटीआर से एक और रिपोर्ट मांगी है, जिसमें मशीनों की और गहराई से जांच की जा सकती है। वहीं, निगम को अभी आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट का इंतजार भी है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही निगम मशीनों के बदलने व अन्य विकल्पों पर निर्णय लेगा। चूंकि आईआईटी रुड़की की टीम ने प्लांट में विस्तृत रूप से निरीक्षण किया था।
एनआईटीटीटीआर ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें मशीनों की स्थिति ठीक नहीं बताई गई है। फिलहाल, अभी आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट का इंतजार है। उसके बाद सदन से सलाह लेने के बाद आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम
एनआईटीटीटीआर ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें मशीनों की स्थिति ठीक नहीं बताई गई है। फिलहाल, अभी आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट का इंतजार है। उसके बाद सदन से सलाह लेने के बाद आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम