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डाडम में अवैध खनन: NGT का कड़ा एक्शन, दो ठेकेदारों पर 66 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

Wed, 19 Oct 2022 01:47 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 19 Oct 2022 01:47 AM IST
सार

जस्टिस प्रीतम पाल ने कहा कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति और अवैध खनन के एवज में दोनों ठेकेदारों को जुर्माना राशि भरनी ही होगी। जब तक राशि जमा नहीं होगी, डाडम में खनन शुरू नहीं हो पाएगा। चूंकि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 10 प्रतिशत राशि जमा होने के बाद ही खनन का अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करेगा।

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NGT imposes fine of Rs 66 crore on two contractors in illegal mining case
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल - फोटो : फाइल

विस्तार

हरियाणा के भिवानी जिले की डाडम खान में अवैध खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ी कार्रवाई है। दो ठेकेदारों पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और अवैध खनन करने के लिए 66 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें वर्तमान और पिछला ठेकेदार यानि प्रोजेक्ट प्रोपोनेंट शामिल हैं। एनजीटी की मुख्य बेंच ने हरियाणा की निगरानी समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया है।

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एनजीटी की हरियाणा निगरानी समिति के चेयरमैन सेवानिवृत्त जस्टिस प्रीतम पाल ने बताया कि हरियाणा सरकार को दोनों ठेकेदारों से जुर्माना वसूलने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। आदेश की कॉपी उनके पास भी पहुंच गई है। कुल जुर्माना राशि में से 10 फीसदी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में जमा करवानी होगी, इसका उपयोग पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई पर किया जाएगा।
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डाडम में अवैध खनन के खिलाफ एनजीटी के पास शिकायत आई थी, उसके बाद मुख्य बेंच ने मेरी अध्यक्षता में आठ सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। इसमें हरियाणा की पूर्व मुख्य सचिव उर्वशी गुलाटी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन एवं पर्यावरण, खान एवं भूगर्भ विभाग के अधिकारी शामिल रहे। समिति ने मौके का जायजा लेने के साथ ही हरसेक से सैटेलाइट इमेज प्राप्त की थी। नासा से भी सैटेलाइट इमेज ली गईं, उसके बाद विस्तृत जांच रिपोर्ट बनाकर मुख्य बेंच को सौंपी थी।

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रिपोर्ट में बताया गया था कि अवैज्ञानिक खनन हुआ है। सिंचाई विभाग की ड्रैनेज क्षतिग्रस्त कर दी गई। मंदिर को नुकसान पहुंचाया। वन क्षेत्र में अवैध खनन किया। डाडम खान में पहाड़ की कटाई नब्बे डिग्री एंगल पर कर दी गई। इसकी अनुमति होती ही नहीं है। यही कारण रहा कि इसी साल जनवरी महीने में चट्टान गिरी और पांच से अधिक मजदूरों की जान चली गई।

जस्टिस प्रीतम पाल ने कहा कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति और अवैध खनन के एवज में दोनों ठेकेदारों को जुर्माना राशि भरनी ही होगी। जब तक राशि जमा नहीं होगी, डाडम में खनन शुरू नहीं हो पाएगा। चूंकि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 10 प्रतिशत राशि जमा होने के बाद ही खनन का अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करेगा। इसके साथ ही एनजीटी की तरफ से जारी अन्य हिदायतों का भी पालन करना पड़ेगा। वर्तमान ठेकेदार पर 29 करोड़ रुपये का जुर्माना सरकार ने पूर्व में लगाया था, जिसमें से 24 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है।

जुर्माना क्यों लगा ये जानना जरूरी

  • 300 वर्गमीटर तक जंगल का सीना छलनी किया
  • लीज क्षेत्र से बाहर ठेकेदार ने 0.8 हेक्टेयर क्षेत्र में अवैध खनन किया
  • नया ठेकेदार ने अपनी खनन नीति ही नहीं बनाई
  • हरसेक हिसार की रिपोर्ट अनुसार सतह से 78 मीटर नीचे तक ही खनन की अनुमति, 109 मीटर तक कर दिया गया, कहीं 200-250 मीटर नीचे तक भी खुदाई हुई

ठेकेदारों के सामने हाईकोर्ट विकल्प
एनजीटी के जुर्माना लगाने के खिलाफ दोनों ठेकेदार के सामने अब हाईकोर्ट जाने का ही विकल्प बचा है। जुर्माना राशि अधिक होने को ठेकेदार चुनौती दे सकते हैं। पूर्व में हुई कार्रवाई के खिलाफ भी ठेकेदार हाईकोर्ट का रुख कर चुके हैं। 

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