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Stubble Burning: पराली पर एनजीटी सख्त, पंजाब और हरियाणा को 2024 में समयबद्ध कार्य योजना बनाने का दिया निर्देश
Fri, 01 Dec 2023 05:12 PM IST
ajay kumar
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 01 Dec 2023 05:12 PM IST
सार
एनजीटी ने पंजाब और हरियाणा को एक जनवरी 2024 से एक सितंबर 2024 तक चरण-वार प्रस्तावित कार्रवाई समेत एक समयबद्ध कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया। एनजीटी ने कार्य योजना में अगले वर्ष के लिए विभिन्न निवारक कदम और जवाबदेह अधिकारी को भी शामिल करने की बात कही है।
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पराली की समस्या।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पंजाब और हरियाणा को एक जनवरी से एक सितंबर 2024 के बीच पराली जलाने से निपटने के लिए समयबद्ध योजना बनाने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने जोर दिया है कि खेतों में पराली जलाना एक गंभीर समस्या है और उपचारात्मक कार्रवाई की तैयारी अभी से शुरू होनी चाहिए।
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दरअसल, पंजाब में फसल अवशेष जलाने के कारण वायु प्रदूषण में वृद्धि के बारे में एक अखबार की रिपोर्ट का एनजीटी ने संज्ञान लिया है। इसी मामले में पीठ सुनवाई कर रही है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में पराली जलाने की 36,632 घटनाएं हुईं और इनमें से 2,285 घटनाएं इस साल 15 सितंबर से 28 नवंबर के बीच हुईं।
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पीठ ने कहा कि जिलेवार संचयी आंकड़ों के अनुसार 15 सितंबर से 16 नवंबर के बीच पंजाब के संगरूर जिले में सबसे अधिक 5352 पराली जलाने की घटनाएं हुईं जबकि हरियाणा के फतेहाबाद जिले में 476 स्थानों पर पराली जली। पीठ ने यह स्वीकार किया है कि खेत में पराली जलाने की घटनाएं कम हो रही हैं। पीठ में पीठ न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल हैं।
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पीठ ने बुधवार को पारित एक आदेश में कहा कि रिपोर्ट के अनुसार 28 नवंबर को हरियाणा में खेतों में आग लगने की कोई घटना नहीं हुई जबकि पंजाब में केवल 18 घटनाएं हुईं। इसमें कहा गया है कि धान के अवशेष जलाने का मुद्दा मुख्य रूप से 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच उठा।
एनजीटी ने कहा कि अवशेष जलाने की गंभीर समस्या हर साल पैदा होती है। इसलिए अगले साल यानी 2024 के लिए एक व्यापक योजना और उपचारात्मक कार्रवाई शुरू करने की जरूरत है।
एनजीटी ने पंजाब और हरियाणा को एक जनवरी 2024 से एक सितंबर 2024 तक चरण-वार प्रस्तावित कार्रवाई समेत एक समयबद्ध कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया। एनजीटी ने कार्य योजना में अगले वर्ष के लिए विभिन्न निवारक कदम और जवाबदेह अधिकारी को भी शामिल करने की बात कही है। अब मामले की 19 जनवरी को सुनवाई होगी। इस बीच पंजाब के वकील ने आश्वासन दिया है कि ऐसी कार्य योजना छह सप्ताह के भीतर प्रस्तुत की जाएगी।