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सैंपल देने जा रहे हैं तो शीशी साथ लेकर जाएं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 04 Feb 2014 01:23 PM IST
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पीजीआई में आने वाले मरीजों को सैंपल लेने के लिए शीशी भी खुद खरीदनी पड़ रही है। इससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। खास तौर पर उन मरीजों की जो एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में आते हैं।
यहां पर आने वाले कई मरीजों को सैंपल की शीशी के लिए गोल मार्केट स्थित केमिस्ट शाप में भेजा जाता है। यहां पर उन्हें सात रुपये में शीशी मिलती है।
नियम के मुताबिक सैंपल के लिए शीशी का इंतजाम खुद हास्पिटल को करना पड़ता है। हालांकि ओपीडी और अन्य सेंटरों में शीशी दी जा रही है, लेकिन एपीसी के कई मरीजों को शीशी नहीं मिली।
सूचना मिलने के बाद जब अमर उजाला ने गोल मार्केट की केमिस्ट शॉप से जानकारी हासिल की तो सूचना की पुष्टि हो गई। पीजीआई का कहना है कि ऐसा तभी संभव है जिस दिन मरीजों की संख्या ज्यादा हो गई होगी। उसी दिन शार्टेज पड़ जाती है। कभी-कभार यह संभव हो सकता है।
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एक दुकान में रोजाना बिकती हैं सौ शीशियां:
अमर उजाला ने जब केमिस्ट शॉप से इस बारे में जानकारी मांगी तो जवाब मिला कि रोजाना कम से कम सौ शीशियां बिक जाती हैं। केमिस्ट शॉप ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके पास एपीसी और एडवांस कार्डियक सेंटर के मरीज शीशियां खरीदने आते हैं। जब दूसरे केमिस्ट शॉप से पूछा गया तो पता चला कि रोजाना 60-70 शीशियां पीजीआई के मरीज खरीदते हैं। पीजीआई में आधा दर्जन से ज्यादा केमिस्ट शॉप है। आंकड़ों के मुताबिक मरीजरोजाना 350-400 शीशियां खरीद रहे हैं। इससे पता चलता है कि कहीं न कही शीशियों की सप्लाई में गड़बड़ है, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
कोट
जब भी मरीजों की संख्या ज्यादा होती है तो संभव है कि कुछ मरीजों को शीशियां नहीं मिलती होगी। शीशियों की सप्लाई बिल्कुल सही तरीके से हो रही है।
- मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई
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यहां पर आने वाले कई मरीजों को सैंपल की शीशी के लिए गोल मार्केट स्थित केमिस्ट शाप में भेजा जाता है। यहां पर उन्हें सात रुपये में शीशी मिलती है।
नियम के मुताबिक सैंपल के लिए शीशी का इंतजाम खुद हास्पिटल को करना पड़ता है। हालांकि ओपीडी और अन्य सेंटरों में शीशी दी जा रही है, लेकिन एपीसी के कई मरीजों को शीशी नहीं मिली।
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सूचना मिलने के बाद जब अमर उजाला ने गोल मार्केट की केमिस्ट शॉप से जानकारी हासिल की तो सूचना की पुष्टि हो गई। पीजीआई का कहना है कि ऐसा तभी संभव है जिस दिन मरीजों की संख्या ज्यादा हो गई होगी। उसी दिन शार्टेज पड़ जाती है। कभी-कभार यह संभव हो सकता है।
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एक दुकान में रोजाना बिकती हैं सौ शीशियां:
अमर उजाला ने जब केमिस्ट शॉप से इस बारे में जानकारी मांगी तो जवाब मिला कि रोजाना कम से कम सौ शीशियां बिक जाती हैं। केमिस्ट शॉप ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके पास एपीसी और एडवांस कार्डियक सेंटर के मरीज शीशियां खरीदने आते हैं। जब दूसरे केमिस्ट शॉप से पूछा गया तो पता चला कि रोजाना 60-70 शीशियां पीजीआई के मरीज खरीदते हैं। पीजीआई में आधा दर्जन से ज्यादा केमिस्ट शॉप है। आंकड़ों के मुताबिक मरीजरोजाना 350-400 शीशियां खरीद रहे हैं। इससे पता चलता है कि कहीं न कही शीशियों की सप्लाई में गड़बड़ है, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
कोट
जब भी मरीजों की संख्या ज्यादा होती है तो संभव है कि कुछ मरीजों को शीशियां नहीं मिलती होगी। शीशियों की सप्लाई बिल्कुल सही तरीके से हो रही है।
- मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई