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सरकार का संकट : पंजाब की नई हुकूमत को भी कर्ज लेने की मजबूरी, कैग रिपोर्ट ने चेताया
Sun, 27 Mar 2022 04:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा
हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 27 Mar 2022 04:28 AM IST
सार
2028-29 तक 6.33 लाख करोड़ हो जाएगा ऋण। फिलहाल 3 लाख करोड़ के कर्ज में वादे पूरे करने की चुनौती।
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भगवंत मान, सीएम पंजाब
- फोटो : ANI
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विस्तार
प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई आम आदमी पार्टी (आप) के लिए पंजाब के सिर चढ़ा 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। कंट्रोलर आफ अकाउंट जनरल (कैग) की रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा सरकार को भी प्रदेश का खर्च और योजनाएं चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ेगा। यह कर्ज 2025 तक जहां 3.73 लाख करोड़ तक पहुंचेगा वहीं 2028-29 तक 6.33 लाख करोड़ हो जाएगा।
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मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार से प्रदेश की जनता की अपेक्षाएं भी बहुत ज्यादा हैं। चुनाव के दौरान आप की ओर से जो वादे किए गए हैं, उन्हें पूरा करने के लिए पार्टी ने धन के जुगाड़ का जो फार्मूला जनता के सामने रखा है, वह भी परिकल्पना पर आधारित है। यानी भ्रष्टाचार, शराब और रेत माफिया खत्म करके जो राजस्व आएगा, उससे वादे पूरे किए जाएंगे। हालांकि वस्तुस्थिति इससे अलग है।
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हर साल राज्य सरकार को प्राप्त होने वाले राजस्व का 40 फीसदी हिस्सा कर्ज और उसका ब्याज चुकाने में चला जाएगा। वहीं, पिछली कांग्रेस सरकार पावरकॉम को दिए जाने वाले बिजली सब्सिडी के 9600 करोड़ रुपये भी नई सरकार के सिर छोड़ गई है, जिसका भुगतान करने के अलावा आप सरकार को 300 यूनिट मुफ्त बिजली के अपने वादे के लिए 5000 करोड़ रुपये सब्सिडी राशि के तौर पर देने होंगे।
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इसके अलावा अब तक की गई घोषणाओं के तहत 35000 युवाओं को नियमित नौकरी से भी खजाने पर बोझ बढ़ेगा। अब तक सरकार के कुल राजस्व का 35 फीसदी हिस्सा वेतन-भत्ते और पेंशन पर खर्च हो जाता है। नई नियमित भर्ती इस खर्च में भी इजाफा करेगी।
पंजाब में शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार 10 साल के शासन के बाद 2017 में 1.82 लाख करोड़ का कर्ज छोड़ गई थी। इसमें सीसीएल का 11000 करोड़ भी शामिल था, जिसे गठबंधन सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में केंद्र से माफ कराने के बजाय पंजाब के खाते में डलवा दिया था। मार्च, 2017 से कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान पंजाब पर चढ़ा कर्ज बढ़कर 2.82 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। अब इस कर्ज का निपटारा या भावी रूपरेखा भगवंत मान सरकार को तैयार करनी है।
ये हैं पंजाब पर कर्ज बढ़ने के मुख्य कारण
नीति आयोग के आर्थिक व सामाजिक संकेतकों के अनुसार 2003 के बाद पंजाब में प्रति व्यक्ति आय घटकर 1,15,882 रुपये आंकी गई है, जो राष्ट्रीय औसत (1,16,067 रुपये) से कम है। वहीं पंजाब का कर्ज भी जीडीपी का करीब 50 फीसदी तक है। बीते दो दशकों के दौरान पंजाब में लोगों की आय में तेजी से गिरावट आई है। दूसरी ओर, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि घटती प्रति व्यक्ति आय, केंद्रीय धन पर बढ़ती निर्भरता, पूंजी निर्माण में घटता निवेश, मौजूदा कर्ज को चुकाने के लिए बार-बार बाजार से उधार लेना इसके प्रमुख कारण हैं। इसके साथ ही जहां देश के अन्य राज्य औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के प्रयास कर रहे हैं, पंजाब आज भी खुद को कृषि प्रधान राज्य के रूप में बनाए रखना चाहता है।
तीन माह के लेखानुदान पर भी कर्ज को बोझ
नई सरकार ने अप्रैल, मई और जून के लिए लेखानुदान प्रस्ताव पेश कर गुजारे लायक व्यवस्था तो कर ली है, लेकिन इस अवधि के लिए भी जुटाई गई राशि में राज्य का कर्ज 5,442 करोड़ रुपये आंका और कुल कर्ज पर ब्याज का भुगतान 4,788.20 करोड़ रुपये (कुल 10230.20 करोड़ रुपये) खर्च हो जाएंगे। फिलहाल राज्य सरकार तीन माह के दौरान कृषि क्षेत्र पर 2,356 करोड़ रुपये, शिक्षा, खेल, कला व संस्कृति पर 4,643 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर 1,340 करोड़ और बिजली क्षेत्र पर 1,097 करोड़ रुपये खर्च करेगी। पहले तीन महीने के लिए 37120 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया
साल दर साल ऐसे बढ़ा कर्ज
कैग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016-17 में पंजाब पर कुल कर्ज 1.82 लाख करोड़ रुपये था, जो 2017-18 में बढ़कर 1.95 लाख करोड़, 2018-19 में 2.11 लाख करोड़, 2019-20 में 2.28 लाख करोड़, 2020-21 में 2.52 लाख करोड़ और 2021-22 में 2.82 लाख करोड़ रुपये हो गया। कैग ने कर्ज बढ़ने की दर के हिसाब से अनुमान लगाया है कि वर्ष 2028-29 में पंजाब पर कुल कर्ज 6.33 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा।