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बेअदबी की घटनाओं की जांच के लिए नया आयोग गठित, 6 महीने में पूरी करनी होगी जांच
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 15 Apr 2017 09:26 AM IST
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बेअदबी की घटना पर नया आयोग गठित
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बेअदबी की घटनाओं की जांच के लिए कैप्टन सरकार ने नया आयोग गठित कर दिया है। खास बात है कि छह महीने में नए आयोग को अपनी जांच को पूरा करना है। जोरा आयोग की रिपोर्ट को ‘अपर्याप्त’ करार देकर खारिज कर चुकी पंजाब सरकार ने शुक्रवार को राज्य में पवित्र ग्रंथों की बेअदबी के सभी मामलों की जांच के लिए जस्टिस (सेवानिवृत्त) रणजीत सिंह की अध्यक्षता में एक नए आयोग का गठन कर दिया है।
गृह मामले एवं न्याय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में, पंजाब सरकार ने श्रीमद्भगवत गीता, पवित्र कुरान शरीफ और श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के सभी मामलों को शामिल कर जांच का काम पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज रह चुके जस्टिस रंजीत सिंह आयोग के सुपुर्द कर दिया है। नए आयोग का गठन जांच अधिनियम 1952 की धारा 11 के तहत किया गया है और इसकी अवधि छह महीने तय की गई है।
जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि इन घटनाओं के पीछे विस्तृत तथ्य, परिस्थितियां और घटनाओं के कारण क्या थे। इसके साथ ही आयोग बेअदबी के मामलों में यह भी तय करेगा कि इनमें विभिन्न व्यक्तियों ने क्या भूमिका निभाई।
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गृह मामले एवं न्याय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में, पंजाब सरकार ने श्रीमद्भगवत गीता, पवित्र कुरान शरीफ और श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के सभी मामलों को शामिल कर जांच का काम पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज रह चुके जस्टिस रंजीत सिंह आयोग के सुपुर्द कर दिया है। नए आयोग का गठन जांच अधिनियम 1952 की धारा 11 के तहत किया गया है और इसकी अवधि छह महीने तय की गई है।
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जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि इन घटनाओं के पीछे विस्तृत तथ्य, परिस्थितियां और घटनाओं के कारण क्या थे। इसके साथ ही आयोग बेअदबी के मामलों में यह भी तय करेगा कि इनमें विभिन्न व्यक्तियों ने क्या भूमिका निभाई।
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बेअदबी की घटना पर प्रदर्शन
- फोटो : File Photo
अधिसूचना का ब्योरा देते हुए सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि आयोग बेअदबी की घटनाओं में पुलिस अधिकारियों, सिविल अधिकारियों और उन लोगों की वास्तविक भूमिका की जांच करेगा, जो इसमें दोषी हो सकते हैं। आयोग को 14 अक्तूबर, 2015 में कोटकपूरा में फायरिंग और फरीदकोट जिले हुई घटनाओं के मामले में पूछताछ का काम भी सौंपा गया है, जिनमें दो व्यक्तियों की मौत हो गई थी।
एडवोकेट जनरल की राय के बाद लिया फैसला :
राज्य सरकार द्वारा यह अधिसूचना, पंजाब के एडवोकेट जनरल द्वारा दी गई राय पर विचार करने के बाद जारी की गई है। एडवोकेट जनरल ने पंजाब सरकार को बताया था कि पूर्व सरकार द्वारा गठित जस्टिस जोरा सिंह आयोग ने बेअदबी की घटना और पुलिस की भूमिका के संदर्भ में कोई तथ्यात्मक जवाब नहीं दिया है।
एडवोकेट जनरल ने यह भी पाया कि आयोग ने जांच के मौलिक अंग को पूरा नहीं किया है, इसलिए ऐसी घटनाओं में वास्तव में क्या हुआ और इसमें लोगों की भूमिका क्या थी, के बारे में सच्चाई पेश नहीं की।
एडवोकेट जनरल की राय के बाद लिया फैसला :
राज्य सरकार द्वारा यह अधिसूचना, पंजाब के एडवोकेट जनरल द्वारा दी गई राय पर विचार करने के बाद जारी की गई है। एडवोकेट जनरल ने पंजाब सरकार को बताया था कि पूर्व सरकार द्वारा गठित जस्टिस जोरा सिंह आयोग ने बेअदबी की घटना और पुलिस की भूमिका के संदर्भ में कोई तथ्यात्मक जवाब नहीं दिया है।
एडवोकेट जनरल ने यह भी पाया कि आयोग ने जांच के मौलिक अंग को पूरा नहीं किया है, इसलिए ऐसी घटनाओं में वास्तव में क्या हुआ और इसमें लोगों की भूमिका क्या थी, के बारे में सच्चाई पेश नहीं की।