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बच्चा चोर गिरोह नेटवर्क, दो साल में चार नवजातों को चुराकर लाखों में बेचा... कांस्टेबल शामिल
Wed, 05 Aug 2020 02:43 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2020 02:43 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
पंजाब के मालेरकोटला से नवजात बच्चे को चुराकर चंडीगढ़ में एक शख्स को बेचने वाले गिरोह के तार पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, और राजस्थान से जुड़ रहे हैं। यह गिरोह पिछले दो साल में चार नवजातों का सौदा कर चुका है। गिरोह अस्पताल में बच्चे का जन्म होते ही चोरी कर लेता था। गिरोह ने लड़के की कीमत चार लाख और लड़की की कीमत लगभग 70 हजार से एक लाख रुपये तय कर रखी थी।
मंगलवार को पुलिस ने आरोपी सेक्टर-45 निवासी भावना (32), लुधियाना के गांव जलाल दिवाल निवासी मंदीप सिंह (35), पटियाला के गांव जहलन निवासी कुलदीप कौर (32), संगरूर के धूरी निवासी सरबजीत कौर (40) और बलौंगी थाने के कांस्टेबल अमरजीत सिंह को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर सात-सात दिन का रिमांड हासिल किया है।
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी भावना ने अपने साथियों के साथ मिलकर सेक्टर-40 में एक नवजात बच्ची को कुछ दिन पहले ही बेचा था। 11 दिन की बच्ची को पुलिस ने बरामद कर लिया है। इस बच्ची को एक लाख रुपये में बेचा गया था। पुलिस ने बच्ची को शेल्टर होम भेज दिया है। पुलिस अब बच्ची के घरवालों से पूछताछ कर रही है।
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गिरोह पंजाब के आशा वर्कर के संपर्क में था, जिसकी मदद से नवजात बच्चों को चुराकर बेचा करते थे। पुलिस जांच कर रही है कि बच्चे को उनके परिजनों की रजामंदी से बेचा जाता था या फिर आशा वर्करों की मिलीभगत थी। पुलिस ने गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए टीमें गठित की हैं, जो अलग-अलग राज्यों में जाकर तफ्तीश करेंगी।
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मंगलवार को पुलिस ने आरोपी सेक्टर-45 निवासी भावना (32), लुधियाना के गांव जलाल दिवाल निवासी मंदीप सिंह (35), पटियाला के गांव जहलन निवासी कुलदीप कौर (32), संगरूर के धूरी निवासी सरबजीत कौर (40) और बलौंगी थाने के कांस्टेबल अमरजीत सिंह को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर सात-सात दिन का रिमांड हासिल किया है।
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पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी भावना ने अपने साथियों के साथ मिलकर सेक्टर-40 में एक नवजात बच्ची को कुछ दिन पहले ही बेचा था। 11 दिन की बच्ची को पुलिस ने बरामद कर लिया है। इस बच्ची को एक लाख रुपये में बेचा गया था। पुलिस ने बच्ची को शेल्टर होम भेज दिया है। पुलिस अब बच्ची के घरवालों से पूछताछ कर रही है।
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गिरोह पंजाब के आशा वर्कर के संपर्क में था, जिसकी मदद से नवजात बच्चों को चुराकर बेचा करते थे। पुलिस जांच कर रही है कि बच्चे को उनके परिजनों की रजामंदी से बेचा जाता था या फिर आशा वर्करों की मिलीभगत थी। पुलिस ने गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए टीमें गठित की हैं, जो अलग-अलग राज्यों में जाकर तफ्तीश करेंगी।
ऐसे हुआ खुलासा
बता दें कि बीते सोमवार को पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पंजाब में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो नवजात बच्चे को चोरी कर लाखों रुपये में बेचता है। पुलिस ने जाल बिछाकर सेक्टर-37 निवासी एक शख्स का गिरोह की सेक्टर-45 निवासी भावना से संपर्क करवाया। इसके बाद उस शख्स का गिरोह से नवजात बच्चा खरीदने का चार लाख में सौदा हुआ। देर शाम भावना अपने साथियों के साथ ऑल्टो कार से जीरकपुर तक आई। कार को कांस्टेबल अमरजीत सिंह चला रहा था।
इसी बीच गिरोह से संपर्क करने वाले शख्स ने अपनी कार खराब होने का बहाना बनाकर आरोपियों को एयरपोर्ट लाइट प्वाइंट तक बुलाया। कार में पांचों आरोपी सवार थे। जैसे ही नवजात बच्चे को उस शख्स को दिया गया, पुलिस ने आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस पूछताछ में भावना ने बताया कि बच्चा मंदीप सिंह का है। उनका गिरोह करीब दो साल से अलग-अलग राज्यों में बच्चा चोरी और बेचने का काम कर रहा है।
मां बोली- डिलीवरी के दौरान हो चुकी है मौत
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों से बरामद नवजात बच्चे का बीते शनिवार को मालेरकोटला स्थित एक अस्पताल में जन्म हुआ था। पुलिस ने जन्म देने वाली मां से संपर्क किया तो कहा कि उसके बच्चे की डिलीवरी के दौरान ही मौत हो चुकी है। पुलिस को शक है कि या तो महिला झूठ बोल रही है या फिर उसे गुमराह किया गया है। पुलिस का कहना है कि मालेरकोटला जाने पर ही सही पता चलेगा कि बच्चे की मां ही बात कर रही है या कोई और। बुधवार को पुलिस की टीम मालेरकोटला समेत अलग-अलग राज्यों में जाकर जांच करेगी।
आरोपियों के मोबाइल पर बच्चों की कई फोटो
पुलिस की जांच में आरोपियों के मोबाइल से कई बच्चों के फोटो बरामद हुए हैं। इसके आधार पर पुलिस उनके परिवार का पता लगा रही है। आरोपियों ने लड़का और लड़की के अलग-अलग रेट तय कर रखे थे। लड़के को चार लाख और लड़की को करीब 70 हजार से एक लाख रुपये में बेचते थे।
इसी बीच गिरोह से संपर्क करने वाले शख्स ने अपनी कार खराब होने का बहाना बनाकर आरोपियों को एयरपोर्ट लाइट प्वाइंट तक बुलाया। कार में पांचों आरोपी सवार थे। जैसे ही नवजात बच्चे को उस शख्स को दिया गया, पुलिस ने आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस पूछताछ में भावना ने बताया कि बच्चा मंदीप सिंह का है। उनका गिरोह करीब दो साल से अलग-अलग राज्यों में बच्चा चोरी और बेचने का काम कर रहा है।
मां बोली- डिलीवरी के दौरान हो चुकी है मौत
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों से बरामद नवजात बच्चे का बीते शनिवार को मालेरकोटला स्थित एक अस्पताल में जन्म हुआ था। पुलिस ने जन्म देने वाली मां से संपर्क किया तो कहा कि उसके बच्चे की डिलीवरी के दौरान ही मौत हो चुकी है। पुलिस को शक है कि या तो महिला झूठ बोल रही है या फिर उसे गुमराह किया गया है। पुलिस का कहना है कि मालेरकोटला जाने पर ही सही पता चलेगा कि बच्चे की मां ही बात कर रही है या कोई और। बुधवार को पुलिस की टीम मालेरकोटला समेत अलग-अलग राज्यों में जाकर जांच करेगी।
आरोपियों के मोबाइल पर बच्चों की कई फोटो
पुलिस की जांच में आरोपियों के मोबाइल से कई बच्चों के फोटो बरामद हुए हैं। इसके आधार पर पुलिस उनके परिवार का पता लगा रही है। आरोपियों ने लड़का और लड़की के अलग-अलग रेट तय कर रखे थे। लड़के को चार लाख और लड़की को करीब 70 हजार से एक लाख रुपये में बेचते थे।