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खून से हस्ताक्षर कर फौज का हिस्सा बने नेताजी के दोस्त नहीं रहे, 103 साल के थे
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Sun, 02 Jul 2017 03:24 PM IST
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खून से हस्ताक्षर कर फौज का हिस्सा बने नेताजी के दोस्त नहीं रहे
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खून से हस्ताक्षर करके आजाद हिन्द फौज का हिस्सा बने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के दोस्त नहीं रहे। उन्हें पंचतत्व में विलीन कर दिया गया, 103 साल के थे। अंग्रेजों से देश की आजादी के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ लड़ाई लड़ने वाले टेकराम धनखड़ का वीरवार देर शाम निधन हो गया। 103 वर्षीय टेकराम गांव करौंथा के रहने वाले थे।
शुक्रवार को उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान प्रशासन की ओर से एसडीएम अरविंद मल्हान और नायब तहसीलदार बंसीलाल ने गांव पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मनोज कुमार ने बताया कि उनके दादा टेकराम ने जाट कॉलेज से 10वीं पास की। उस दौरान नेताजी के भाषणों और विचारधारा से प्रभावित हुए।
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शुक्रवार को उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान प्रशासन की ओर से एसडीएम अरविंद मल्हान और नायब तहसीलदार बंसीलाल ने गांव पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मनोज कुमार ने बताया कि उनके दादा टेकराम ने जाट कॉलेज से 10वीं पास की। उस दौरान नेताजी के भाषणों और विचारधारा से प्रभावित हुए।
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बंसीलाल ने ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था
खून से हस्ताक्षर कर फौज का हिस्सा बने नेताजी के दोस्त नहीं रहे
फिर टेकराम साल 1936 में आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। दादा बताते थे कि भर्ती से पहले सुभाष चंद्र बोस ने कहा था कि वही व्यक्ति आजाद हिंद फौज में शामिल हो, जो अपने खून से हस्ताक्षर कर सके। खून से हस्ताक्षर करके दादा आजाद हिंद फौज में शामिल हुए। साल 1943 से 45 तक उन्होंने जापान और सिंगापुर में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
मनोज ने बताया कि दादा को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल ने ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था। मनोज ने बताया कि उम्र अधिक हो जाने की वजह से दादा शारीरिक तौर पर कमजोर हो गए थे। उनके एक बेटा जयसिंह, पुत्रवधू कमला, दो बेटियां, दो पौत्र वीरेंद्र व मनोज, चार पोतियां और दो प्रपौत्र हैं।
मनोज ने बताया कि दादा को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल ने ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था। मनोज ने बताया कि उम्र अधिक हो जाने की वजह से दादा शारीरिक तौर पर कमजोर हो गए थे। उनके एक बेटा जयसिंह, पुत्रवधू कमला, दो बेटियां, दो पौत्र वीरेंद्र व मनोज, चार पोतियां और दो प्रपौत्र हैं।