एक हजार एनआरआई पंजाब पहुंचे, होटल की जगह क्वारंटीन केंद्र जा रहे सभी
- पंजाब सरकार ने होटलों में बनवाए हजारों पेड क्वारंटीन रूम
- अब तक पहुंचे लगभग एक हजार एनआरआई में कोई नहीं पहुंचा होटल
- सरकार ने सुविधायुक्त 3000 मुफ्त क्वारंटीन रूम बनाए, उसमें रह रहे सभी
विस्तार
केंद्र सरकार के कोविड-19 संबंधी दिशा निर्देशों के तहत पंजाब सरकार ने वंदे भारत स्कीम के तहत विदेश से लौट रहे पंजाबियों को उन्हीं के खर्च पर होटलों में क्वारंटीन करने का फैसला किया है। इसके लिए राज्य सरकार ने होटलों को क्वारंटीन योग्य कमरे तैयार करने को भी कहा था। लेकिन अब तक राज्य में लौटे लगभग एक हजार एनआरआई ने होटलों में क्वारंटीन होने की बजाय सरकार के क्वारंटीन केंद्रों में शरण ली है।
वहां उन्हें कोई फीस नहीं देनी पड़ेगी। राज्य के होटल व्यवसायियों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पंजाब में करीब 20 हजार एनआरआई के लौटने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए सरकार ने होटल व्यवसायियों को प्रतिदिन 1000 रुपये से 7000 रुपये तक की दर पर विशेष क्वारंटीन रूम तैयार करने को कहा था। सरकार की योजना यह भी थी कि कर्फ्यू-लॉकडाउन के कारण ठप हो चुके होटल व्यवसाय को फिर से पटरी पर लाया जा सके।
इस योजना के तहत राज्य में होटलों ने 3750 से अधिक क्वारंटीन रूम तैयार भी कर लिए गए। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने सरकारी सुविधा युक्त 3000 क्वारंटीन रूम भी तैयार किए जिनके लिए कोई फीस नहीं है। नतीजतन राज्य में अब तक लौटे एनआरआई ने मुफ्त क्वारंटीन रूम ही चुने हैं।
पंजाब होटल एसोसिएशन के प्रधान सतीश अरोड़ा का कहना है कि उनके पास अब तक किसी भी होटल में किसी एनआरआई के क्वारंटीन रूम में ठहरने की कोई जानकारी नहीं है। होटल मालिकों को रूम तैयार करने के लिए अलग से पैसा खर्च करना पड़ा है, जिसमें स्पेशल स्टाफ, सैनिटाइजेशन, मेडिकल और सुरक्षा आदि सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार मुफ्त सुविधा मुहैया करा रही है तो कोई पैसा खर्च कर क्वारंटीन में क्यों रहना चाहेगा? होटल व्यवसाय पहले ही भारी घाटे का शिकार हो चुका है और अब उन पर एक और मार पड़ रही है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार होटलों को हो रहे नुकसान के लिए व्यवसायियों को मुआवजा दे।
होटलों को सरकार ने यह दिया है आदेश
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने यह अनिवार्य कर दिया है कि एनआरआई को पंजाब क्वारंटीन रूम में रहना होगा। मानसा और तरनतारन को छोड़कर सभी जिलों ने डिप्टी कमिश्नरों की देखरेख में होटलों में कमरों की व्यवस्था की है। राज्य सरकार की ओर से दिए आदेश में होटलों से कहा गया है कि वे एक डॉक्टर की व्यवस्था करें जो दिन में एक बार होटल में मौजूद लोगों की जांच करेगा और जिले के नोडल अधिकारी को रिपोर्ट करेगा।
होटलों को प्रयोगशालाओं के साथ टाई-अप करने और कचरे के निपटान की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है कि कोई भी क्वारंटीन व्यक्ति होटल से न भागे। उनके रिश्तेदारों को भी उनसे दूर रखा जाए। आदेशों के अनुसार, यदि इनमें से किसी भी दिशा-निर्देश का उल्लंघन किया जाता है तो होटल मालिक पर आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) के तहत महामारी रोग अधिनियम 1897 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
जो खर्च नहीं उठा सकते, उन्हें मुफ्त सुविधा: राणा सोढी
पंजाब के प्रवासी भारतीय मामलों संबंधी मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी ने कहा है कि एनआरआई के लिए संबंधित जिलों के होटलों में उचित प्रबंध किए गए हैं। लेकिन जो विद्यार्थी और प्रवासी होटलों का खर्च नहीं उठा सकते, उनके लिए मुफ्त सुविधा उपलब्ध करवाई गई है।