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सीबीएसई को NCERT डायरेक्टर ने आड़े हाथों लिया, शिक्षा विभाग को भी लताड़ा
विशाल पाठक/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 21 May 2017 01:02 PM IST
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एनसीईआरटी डायरेक्टर ने प्राइवेट पब्लिशर्स की मनमानी को देखते हुए सीबीएसई को आड़े हाथों लिया, वहीं शिक्षा विभाग को भी लताड़ लगाई। प्राइवेट स्कूलों में आज भी विद्यार्थियों के कंधों पर प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों का बोझ डाला जा रहा है। इसका असर अभिभावकों की जेब पर भी पड़ रहा है।
इसके बावजूद शिक्षा विभाग चुप्पी साधे है। दूसरी ओर इस बोझ को कम करने में सीबीएसई अब तक पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। आज भी देश के अधिकतर हिस्सों में प्राइवेट स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें पढ़ने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
दूसरी ओर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के अथक प्रयास व्यर्थ जा रहे हैं। प्राइवेट पब्लिशर्स व स्कूलों की बढ़ती मनमानी रोकने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) कई बार हिदायतें जारी कर चुका है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग सीबीएसई के नियमों का सख्ती से पालन नहीं कर पा रहे हैं।
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इसके बावजूद शिक्षा विभाग चुप्पी साधे है। दूसरी ओर इस बोझ को कम करने में सीबीएसई अब तक पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। आज भी देश के अधिकतर हिस्सों में प्राइवेट स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें पढ़ने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
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दूसरी ओर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के अथक प्रयास व्यर्थ जा रहे हैं। प्राइवेट पब्लिशर्स व स्कूलों की बढ़ती मनमानी रोकने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) कई बार हिदायतें जारी कर चुका है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग सीबीएसई के नियमों का सख्ती से पालन नहीं कर पा रहे हैं।
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प्राइवेट पब्लिशर्स अभिभावकों में भ्रांतियां फैला रहे हैं
school students
अमर उजाला से विशेष बातचीत के दौरान एनसीईआरटी डायरेक्टर प्रो. हृषिकेश सेनापति ने कहा कि प्राइवेट पब्लिशर्स अभिभावकों में तरह-तरह की भ्रांतियां फैला रहे हैं। अभिभावकों को इन भ्रांतियां से दूर रहना चाहिए। प्रो. सेनापति ने कहा प्राइवेट पब्लिशर्स व स्कूलों की बढ़ रही मनमानी को रोकने के लिए सीबीएसई को ठोस कदम उठाने पड़ेंगे।
डायरेक्टर प्रो. हृषिकेश ने कहा एनसीईआरटी एक्सपर्ट्स पैनल की राय से सिलेबस तैयार करता है। एनसीईआरटी की किताबें न केवल सस्ती, बल्कि सिलेबस के लहजे से प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों से कई गुना बेहतर हैं। एनसीईआरटी की किताबों को बढ़ावा देने के लिए पूरे देश में इस वर्ष 480 की जगह 680 वेंडर हैं।
इस वर्ष 2091 स्कूल एनसीईआरटी को किताबों के लिए अनुरोध कर चुके हैं। प्रो. सेनापति ने कहा कि वे समय-समय पर सीबीएसई को भी फीडबैक भेजते रहते हैं। एनसीईआरटी यह पूर्ण रूप से सुनिश्चित करता है कि अधिकतर प्राइवेट स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू की जाएं ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाई जा सके।
डायरेक्टर प्रो. हृषिकेश ने कहा एनसीईआरटी एक्सपर्ट्स पैनल की राय से सिलेबस तैयार करता है। एनसीईआरटी की किताबें न केवल सस्ती, बल्कि सिलेबस के लहजे से प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों से कई गुना बेहतर हैं। एनसीईआरटी की किताबों को बढ़ावा देने के लिए पूरे देश में इस वर्ष 480 की जगह 680 वेंडर हैं।
इस वर्ष 2091 स्कूल एनसीईआरटी को किताबों के लिए अनुरोध कर चुके हैं। प्रो. सेनापति ने कहा कि वे समय-समय पर सीबीएसई को भी फीडबैक भेजते रहते हैं। एनसीईआरटी यह पूर्ण रूप से सुनिश्चित करता है कि अधिकतर प्राइवेट स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू की जाएं ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाई जा सके।
एनसीईआरटी डायरेक्टर का स्कूलों में औचक निरीक्षण
नई फीस पॉलिसी पर प्रशासक ने भी लगाई मुहर
- फोटो : File Photo
नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) के डायरेक्टर प्रो. हृषिकेश सेनापति ने शनिवार को सेक्टर-16 स्थित गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल और सेक्टर-18 स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल का औचक निरीक्षण किया। इसमें नौवीं के विद्यार्थियों ने उनसे शिकायत करते हुए कहा कि एनसीईआरटी की बुक्स में गलतियां हैं। इस पर उन्होंने बच्चों की परेशानी का समाधान करने का आश्वासन दिया है।
प्रो. हृषिकेश सेनापति शहर में आयोजित अचीवमेंट सर्वे पर आयोजित वर्कशॉप में भाग लेने आए थे। इसके बाद उन्होंने शहर के स्कूलों का निरीक्षण किया। डायरेक्टर प्रो. हृषिकेश सेनापति जब जीएमएसएसएस-16 के स्कूल में पहुंचे तो उन्होंने नौवीं और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों से बातचीत की। इस मौके पर नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने कहा कि पुस्तकों में काफी गलतियां हैं। इतिहास की पुस्तकों में गलत जानकारी है। इसके अलावा गणित में भी कुछ नियम गलत बताए गए हैं जिन्हें अध्यापक ही पढ़ाकर ठीक कराते हैं।
इस पर उन्होंने बच्चों को आश्वासन दिया कि गलतियों को रिव्यू करके जल्द ही ठीक कर दिया जाएगा। इसके बाद किसी को कोई परेशानी नहीं होगी। जीएमएसएसएस-16 स्कूल के विभिन्न कमरों में जाकर वहां की स्थिति को चेक किया। डायरेक्टर ने कहा कि बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने के लिए किए गए प्रयास बेहतर है। इससे बच्चों में पढ़ने का लालसा बढ़ती है और जो बात उन्हें सबसे ज्यादा मुश्किल लगती है वह हर रोज देखने पर आसानी से याद हो जाती है। उसके बाद प्रो. हृषिकेश ने जीएमएसएसएस-18 का दौरा किया। जहां पर बनाया गया साइंस पार्क को देखा और उसमें लगाए गए पौधों के बारे में जानकारी हासिल की।
प्रो. हृषिकेश सेनापति शहर में आयोजित अचीवमेंट सर्वे पर आयोजित वर्कशॉप में भाग लेने आए थे। इसके बाद उन्होंने शहर के स्कूलों का निरीक्षण किया। डायरेक्टर प्रो. हृषिकेश सेनापति जब जीएमएसएसएस-16 के स्कूल में पहुंचे तो उन्होंने नौवीं और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों से बातचीत की। इस मौके पर नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने कहा कि पुस्तकों में काफी गलतियां हैं। इतिहास की पुस्तकों में गलत जानकारी है। इसके अलावा गणित में भी कुछ नियम गलत बताए गए हैं जिन्हें अध्यापक ही पढ़ाकर ठीक कराते हैं।
इस पर उन्होंने बच्चों को आश्वासन दिया कि गलतियों को रिव्यू करके जल्द ही ठीक कर दिया जाएगा। इसके बाद किसी को कोई परेशानी नहीं होगी। जीएमएसएसएस-16 स्कूल के विभिन्न कमरों में जाकर वहां की स्थिति को चेक किया। डायरेक्टर ने कहा कि बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने के लिए किए गए प्रयास बेहतर है। इससे बच्चों में पढ़ने का लालसा बढ़ती है और जो बात उन्हें सबसे ज्यादा मुश्किल लगती है वह हर रोज देखने पर आसानी से याद हो जाती है। उसके बाद प्रो. हृषिकेश ने जीएमएसएसएस-18 का दौरा किया। जहां पर बनाया गया साइंस पार्क को देखा और उसमें लगाए गए पौधों के बारे में जानकारी हासिल की।