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Navratri 2020: काली बाड़ी में इस बार नहीं होगा 'सिंदूर खेला', प्रतिमा विसर्जन के लिए विशेष शर्त
Sat, 17 Oct 2020 10:50 AM IST
खुशबू गोयल
नीरज कुमार, चंडीगढ़
नीरज कुमार, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 17 Oct 2020 10:50 AM IST
सार
- मां को पुष्पांजिल में फूल अर्पित नहीं कर पाएंगे भक्त
- कालीबाड़ी में पहली बार नहीं होगा सार्वजनिक समारोह
- प्रतिमा विसर्जन के लिए भी तय किए गए दिशा निर्देश
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Sindoor Khela
- फोटो : AmarUjala
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विस्तार
शारदीय नवरात्र शुरू हो गए हैं, लेकिन बड़े समारोह नहीं होंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं होंगे। कालीबाड़ी में भी इस बार भव्य आयोजन नहीं होगा। कालीबाड़ी में केवल पूजा होगी। सभी धर्मिक कार्यक्रम होंगे, लेकिन सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होंगे। इस बार कालीबाड़ी में दुर्गा पूजा पर रौनक नहीं होगी। कालीबाड़ी में ट्राइसिटी से बड़ी संख्या में लोग पूजा में शामिल होने के लिए आते हैं।
मां के दर्शन के लिए सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक ओर शाम साढ़े चार बजे से शाम छह बजे तक ही होगा। पुष्पांजिल में इस बार भक्त पुष्प भी अर्पित नहीं कर पाएंगे। दसवीं को मां दुर्गा की विदाई होगी। इससे पहले पूजा के बाद महिलाएं एक दूसरे को सिंदूर लगाती है। बंगाल में इसे सिंदूर खेला कहा जाता है। लेकिन इस बार केवल मां को ही सिंदूर लगाया जाएगा। आम महिलाएं एक दूसरे को सिंदूर नहीं लगाएंगी।
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मां के दर्शन के लिए सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक ओर शाम साढ़े चार बजे से शाम छह बजे तक ही होगा। पुष्पांजिल में इस बार भक्त पुष्प भी अर्पित नहीं कर पाएंगे। दसवीं को मां दुर्गा की विदाई होगी। इससे पहले पूजा के बाद महिलाएं एक दूसरे को सिंदूर लगाती है। बंगाल में इसे सिंदूर खेला कहा जाता है। लेकिन इस बार केवल मां को ही सिंदूर लगाया जाएगा। आम महिलाएं एक दूसरे को सिंदूर नहीं लगाएंगी।
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25 लोग प्रतिमा विसर्जन को जाएंगे
कालीबाड़ी के सचिव राजेश राय ने बताय भक्तों के दर्शन के लिए निशान बनाए गए है। एक बार में 25 लोगों के अंदर जाने का इंतजाम होगा। वह भी कालीबाड़ी कमेटी के पदाधिकारी ही होंगे। जब 25 भक्त दर्शन करने के बाद बाहर जाएंगे तो उसके बाद बाहर के लोगों को दर्शन के लिए अंदर आने दिया जाएगा। वह भी सरकार के निर्देशों के अनुसार।
कालीबाड़ी में इस वर्ष मां दुर्गा की स्थापना का 50 वर्ष है। बड़े आयोजनों की तैयारी थी, लेकिन कोविड के कारण कार्यक्रम नहीं होंगे। राजेश राय ने बताया कि मां की छोटी प्रतिमा स्थापित की जाएगी, ताकि विसर्जन के लिए परेशानी न हो। मंदिर में आने से पहले थर्मल स्क्रीन के साथ हाथों को सैनिटाइज किया जाएगा। उसके बाद ही मंदिर में प्रवेश मिलेगा। बिना मास्क के पंडाल में प्रवेश नहीं मिलेगा।
कालीबाड़ी में इस वर्ष मां दुर्गा की स्थापना का 50 वर्ष है। बड़े आयोजनों की तैयारी थी, लेकिन कोविड के कारण कार्यक्रम नहीं होंगे। राजेश राय ने बताया कि मां की छोटी प्रतिमा स्थापित की जाएगी, ताकि विसर्जन के लिए परेशानी न हो। मंदिर में आने से पहले थर्मल स्क्रीन के साथ हाथों को सैनिटाइज किया जाएगा। उसके बाद ही मंदिर में प्रवेश मिलेगा। बिना मास्क के पंडाल में प्रवेश नहीं मिलेगा।