आवास खाली कर सिद्धू ने पेश की नजीर, लेकिन पंजाब के इन नेताओं का नहीं खत्म हो रहा मोह
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ लंबे विवाद के बाद नवजोत सिंह सिद्धू का जिस दिन इस्तीफा मंजूर हुआ, उसी दिन वे चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के आवास के साथ लगा सरकारी बंगला प्रशासन को सौंपते हुए अमृतसर स्थित अपने घर लौट गए। उन्होंने सारी सुविधाएं भी लौटा दीं। लेकिन पंजाब के कई सियासी नेता ऐसे भी हैं, जो कोई पद न होने के बावजूद सरकारी बंगलों और अन्य सुविधाओं का सुख भोग रहे हैं।
राज्य प्रशासनिक विभाग की ओर से उन्हें बार-बार भेजे नोटिस भी बेअसर रहे हैं। इनमें सबसे पहला नाम राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री और जलालाबाद के पूर्व विधायक सुखबीर सिंह बादल का है। उन्होंने हाल के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद विधायक पद से तो इस्तीफा दे दिया, पर आज तक सरकारी फ्लैट नंबर 35 खाली नहीं किया। सरकार की ओर से उन्हें कई नोटिस भी भेजे गए लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ा। अब राज्य सरकार उनसे मार्केट रेट पर किराया वसूलने और जुर्माना लगाने पर विचार रही है।
दूसरा नाम पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता राजिंदर कौर भट्ठल का है। उन्होंने बीते 28 महीने से चंडीगढ़ में सरकारी बंगले पर कब्जा किया हुआ है। इसके लिए उन पर हर माह के 4.60 लाख रुपये मार्केट रेट पर किराये के रूप में अब तक कुल 1.29 करोड़ रुपये की पेनल्टी भी बन चुकी है।
खास बात यह है कि पंजाब सरकार ने भट्ठल के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की बजाए जुलाई, 2018 में उन्हें राज्य योजना बोर्ड की उप चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया जिससे वे चंडीगढ़ में सरकारी आवास की पात्र हो गई हैं।
चूंकि उन्होंने कब्जाए हुए सरकारी बंगले के लिए 1.29 करोड़ रुपये की बकाया राशि जमा नहीं कराई है, इसलिए सरकार की ओर से उन्हें उप चेयरपर्सन के तौर पर नया सरकारी आवास भी अलॉट नहीं किया जा रहा। दरअसल भट्ठल के पास इस समय जो सरकारी बंगला नंबर 8 सेक्टर 2 में है, वह अकाली-भाजपा सरकार के समय मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अलॉट किया था। तब उन्हें यह बंगला बतौर विधायक दिया गया था लेकिन 2017 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद वे अब विधायक भी नहीं हैं।
पंजाब सरकार के ही एक अन्य विधायक राणा गुरजीत सिंह का नाम भी इस फेहरिस्त में शामिल रहा है। रेत खड्डों की नीलामी में घिरने के बाद राणा गुरजीत सिंह ने बिजली मंत्री का पद तो छोड़ दिया लेकिन मंत्री के तौर पर मिले सरकारी बंगले पर कब्जा जमाए रखा। इसे लेकर मीडिया में जब नया विवाद खड़ा हुआ तो उन्होंने सरकारी बंगला तो छोड़ दिया लेकिन सरकार ने उनसे कोई पेनल्टी वसूल नहीं की।
खैरा ने खाली किया बंगला: सुखपाल सिंह खैरा ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद छिनने के बाद सेक्टर 16 में अलॉट किया गया सरकारी बंगला भी तुरंत खाली कर दिया था।