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नवजोत कौर और करन सिद्धू नहीं संभालेंगे पद, नवजोत सिद्धू ने बताई वजह...जानिए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 28 May 2018 10:56 AM IST
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नवजोत सिद्धू का परिवार
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नवजोत कौर सिद्धू और करण सिद्धू ने अपने पद संभालने से इंकार कर दिया है। मंत्री नवजोत सिद्धू ने इसकी वजह बताई। पत्नी के बाद बेटे को भी सरकारी ओहदा मिलने से विरोधियों के निशाने पर आए पंजाब के निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने शनिवार को साफ कर दिया कि उनके बेटे करण सिद्धू असिस्टेंट एडवोकेट जनरल और पत्नी नवजोत कौर भी पंजाब वेयर हाउसिंग कारपोरेशन की चेयरपर्सन का ओहदा नहीं संभालेंगे। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह का आभार व्यक्त करते हुए सिद्धू ने कहा कि उन्होंने उनके परिवार को सेवा का मौका दिया।
अपने आवास पर बुलाई प्रेस कांफ्रेंस में सिद्धू ने कहा कि उनकी पत्नी और बेटे द्वारा लिए गए फैसले से उनका सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। सिद्धू ने कहा कि वे राजनीति में एक मिशन के तौर पर आए हैं। उनके परिवार के सभी सदस्य अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेते हैं। सिद्धू ने बताया कि उनके बेटे ने यह कहकर इस पद पर ज्वाइन करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह अपने करियर पर ज्यादा ध्यान देना चाहता है। उसने अमेरिका से लॉ में मास्टर्स की है। उन्होंने एडवोकेट जनरल का आभार जताया।
सिद्धू ने आगे कहा कि उनके व उनके परिवार के पास कोई जमीन-जायदाद नहीं है। उन्होंने एक जमीन राजनीति में रहते हुए खरीदी थी और तब अमृतसर से वादा किया था कि वहां घर बनाऊंगा। सिद्धू ने कहा कि उनका जो शोरूम पटियाला में है, वह 1996 से पहले का है। उसके बाद पत्नी और बेटे को प्लॉट खरीदकर दिए थे वो बेच दिए है।
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राजनीति में सबसे बड़ा चैलेंज है, लोग आप पर भरोसा करें: सिद्धू
निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने पत्रकार वार्ता के दौरान अपने जीवन के कई वाकये पत्रकारों से साझा किए। सिद्धू ने कहा कि उनका मानना है कि राजनीति में सबसे बड़ा चैलेंज यही है कि लोग आप पर भरोसा करें। उन्होंने कहा कि एक बार जब वे पाकिस्तान में इमरान खान के साथ कमेंटरी करने चले गए, तब कई लोगों के फोन आए कि चुनाव लड़ लो।
मैंने पत्नी से पूछा तो वह इसके लिए राजी नहीं हुईं। वैसे भी हम राजा की तरह रहते थे। 8-10 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट हाथ में होते थे। दो-तीन साल तक तो मैं होटल ओबराय में ही रहा। उसके बाद धनवंत सिंह और मेरे दोस्त बनी ने कहा कि चुनाव लड़ना चाहिए। तब 14 दिन बचे थे। मैं अमृतसर चला गया।
पहला भाषण दिया तो स्टेज पर करीब 2000 लोग चढ़ गए और स्टेज टूट गया। लोगों ने मुझे सवा लाख वोटों से जिताया। अगले दिन एक पत्रकार ने कहा कि आप माइग्रेटरी वर्ड हैं। मैंने उसी समय वादा किया कि कभी पटियाला नहीं जाऊंगा।
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अपने आवास पर बुलाई प्रेस कांफ्रेंस में सिद्धू ने कहा कि उनकी पत्नी और बेटे द्वारा लिए गए फैसले से उनका सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। सिद्धू ने कहा कि वे राजनीति में एक मिशन के तौर पर आए हैं। उनके परिवार के सभी सदस्य अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेते हैं। सिद्धू ने बताया कि उनके बेटे ने यह कहकर इस पद पर ज्वाइन करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह अपने करियर पर ज्यादा ध्यान देना चाहता है। उसने अमेरिका से लॉ में मास्टर्स की है। उन्होंने एडवोकेट जनरल का आभार जताया।
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सिद्धू ने आगे कहा कि उनके व उनके परिवार के पास कोई जमीन-जायदाद नहीं है। उन्होंने एक जमीन राजनीति में रहते हुए खरीदी थी और तब अमृतसर से वादा किया था कि वहां घर बनाऊंगा। सिद्धू ने कहा कि उनका जो शोरूम पटियाला में है, वह 1996 से पहले का है। उसके बाद पत्नी और बेटे को प्लॉट खरीदकर दिए थे वो बेच दिए है।
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राजनीति में सबसे बड़ा चैलेंज है, लोग आप पर भरोसा करें: सिद्धू
निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने पत्रकार वार्ता के दौरान अपने जीवन के कई वाकये पत्रकारों से साझा किए। सिद्धू ने कहा कि उनका मानना है कि राजनीति में सबसे बड़ा चैलेंज यही है कि लोग आप पर भरोसा करें। उन्होंने कहा कि एक बार जब वे पाकिस्तान में इमरान खान के साथ कमेंटरी करने चले गए, तब कई लोगों के फोन आए कि चुनाव लड़ लो।
मैंने पत्नी से पूछा तो वह इसके लिए राजी नहीं हुईं। वैसे भी हम राजा की तरह रहते थे। 8-10 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट हाथ में होते थे। दो-तीन साल तक तो मैं होटल ओबराय में ही रहा। उसके बाद धनवंत सिंह और मेरे दोस्त बनी ने कहा कि चुनाव लड़ना चाहिए। तब 14 दिन बचे थे। मैं अमृतसर चला गया।
पहला भाषण दिया तो स्टेज पर करीब 2000 लोग चढ़ गए और स्टेज टूट गया। लोगों ने मुझे सवा लाख वोटों से जिताया। अगले दिन एक पत्रकार ने कहा कि आप माइग्रेटरी वर्ड हैं। मैंने उसी समय वादा किया कि कभी पटियाला नहीं जाऊंगा।