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पीजीआई की न्यूरो साइंस रिसर्च लैब को नेशनल अवार्ड
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 18 Apr 2014 11:18 AM IST
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क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया ने पीजीआई की न्यूरो साइंस रिसर्च लैबोरेटरी को शाह क्वालिटी नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया। लैब को यह अवार्ड दिल्ली में आयोजित एक समारोह में पद्मश्री कस्तूरीरंगन और प्लानिंग कमीशन के सदस्यों ने दिया। यह अवार्ड रिसर्च कैटेगिरी के तहत दिया गया है।
समारोह में यह पुरस्कार एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अक्षय आनंद, अवजित बनिक और श्वेता मोदगिल ने ग्रहण किया। देश की यह पहली लैब है जिसकी विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। हाल ही में एनआरएल ने न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर के दौरान किए जाने वाले 27 जेनेटिक टेस्ट की काबलियत विकसित की है।
क्वालिटी में विदेशों से आगे निकले:
डॉ. अक्षय आनंद के मुताबिक क्वालिटी ड्रग रिसर्च एवं टेस्ट में पीजीआई कई देशों से आगे निकल गया है। उन्होंने बताया कि साल 2003 में वे अमेरिका से लौटकर आए और तभी प्रण ले लिया था कि इस लैब के क्वालिटी मापदंड ऐसे विकसित किए जाएंगे जिससे इसकी विश्वसनीयता देश में नहीं बल्कि विदेशों में भी होगी।
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लैब में एक आडिट सेल बनाया गया जिसका काम हर चार से पांच दिन बाद डाटा चेक करना, उपकरण खराब होने से पहले उसे बदल लेना होगा। इसके अलावा नियमों का पूरी तरह से पालन करने जैसे कई मापदंड विकसित किए गए।
लैब में काम करने वाले डॉक्टर, कर्मचारी और स्टूडेंट ने भी इसके लिए बहुत मेहनत की। इसका फायदा अब यह होगा कि कंपनियां जो टेस्ट विदेशों में कराती थीं, वह अब यहां करा सकेंगी। इससे कंपनियों का रुपया और समय बचेगा।
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समारोह में यह पुरस्कार एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अक्षय आनंद, अवजित बनिक और श्वेता मोदगिल ने ग्रहण किया। देश की यह पहली लैब है जिसकी विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। हाल ही में एनआरएल ने न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर के दौरान किए जाने वाले 27 जेनेटिक टेस्ट की काबलियत विकसित की है।
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क्वालिटी में विदेशों से आगे निकले:
डॉ. अक्षय आनंद के मुताबिक क्वालिटी ड्रग रिसर्च एवं टेस्ट में पीजीआई कई देशों से आगे निकल गया है। उन्होंने बताया कि साल 2003 में वे अमेरिका से लौटकर आए और तभी प्रण ले लिया था कि इस लैब के क्वालिटी मापदंड ऐसे विकसित किए जाएंगे जिससे इसकी विश्वसनीयता देश में नहीं बल्कि विदेशों में भी होगी।
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लैब में एक आडिट सेल बनाया गया जिसका काम हर चार से पांच दिन बाद डाटा चेक करना, उपकरण खराब होने से पहले उसे बदल लेना होगा। इसके अलावा नियमों का पूरी तरह से पालन करने जैसे कई मापदंड विकसित किए गए।
लैब में काम करने वाले डॉक्टर, कर्मचारी और स्टूडेंट ने भी इसके लिए बहुत मेहनत की। इसका फायदा अब यह होगा कि कंपनियां जो टेस्ट विदेशों में कराती थीं, वह अब यहां करा सकेंगी। इससे कंपनियों का रुपया और समय बचेगा।