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'बात सूहे फुल्लां दी' और एक नारी का दर्द
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 03 Dec 2013 01:06 PM IST
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पंजाब कला भवन में बात सूहे फुल्लां दी नाटक का मंचन किया गया। नाटक की कहानी और निर्देशन डॉ.साहिब सिंह ने किया।
नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार एक मूर्ख व हठी राजा के फैसले से उसकी बेटी की जिंदगी खराब हो जाती है। नाटक में दिखाया जाता है कि एक राजा बेटे की चाहत में तपस्या करने जंगल चला जाता है। वह अपनी पत्नी को दो साल की बेटी अजीता को अकेला छोड़कर निकल पड़ता है।
12 साल बाद राजा वापस लौटता है, लेकिन उसे पुत्र प्राप्ति नहीं होती। राजा की पत्नी बेटी की शादी का जिक्र करती है। राजा कहता है कि कल सुबह उसे जो भी सबसे पहले नजर आएगा, उससे वह बेटी की शादी करवा देगा।
इस प्रकार वह एक 7 साल के बच्चे शेखर के साथ अजीता की शादी करवा देता है। शेखर हमेशा अजीता को अपने संबंध के बारे में पूछता है, लेकिन उसके पास कोई जवाब नहीं होता। गुस्से में आकर शेखर घर छोड़ देता है।
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10 साल बाद शेखर एक बड़ा कवि बनकर वापस घर लौटता है। घर लौटने पर उसे अजीता के साथ प्यार हो जाता है, लेकिन राजा अजीता की शादी किसी से करवा देता है। शेखर टूट जाता है और अपनी सारी कविताएं जला देता है।
शेखर की मौत हो जाती है और अजीता उसकी मौत के लिए राजा को ही कसूरवार ठहराती है। नाटक में कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों पर अमिट छोड़ी।
विशेष अजीता के किरदार में मल्लिका सिंह और नील ने बेहतरीन अभिनय किया। शेखर के किरदार में अर्शदीप और सार्थक नरूला ने भी सराहनीय अभिनय दिखाया।
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नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार एक मूर्ख व हठी राजा के फैसले से उसकी बेटी की जिंदगी खराब हो जाती है। नाटक में दिखाया जाता है कि एक राजा बेटे की चाहत में तपस्या करने जंगल चला जाता है। वह अपनी पत्नी को दो साल की बेटी अजीता को अकेला छोड़कर निकल पड़ता है।
12 साल बाद राजा वापस लौटता है, लेकिन उसे पुत्र प्राप्ति नहीं होती। राजा की पत्नी बेटी की शादी का जिक्र करती है। राजा कहता है कि कल सुबह उसे जो भी सबसे पहले नजर आएगा, उससे वह बेटी की शादी करवा देगा।
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इस प्रकार वह एक 7 साल के बच्चे शेखर के साथ अजीता की शादी करवा देता है। शेखर हमेशा अजीता को अपने संबंध के बारे में पूछता है, लेकिन उसके पास कोई जवाब नहीं होता। गुस्से में आकर शेखर घर छोड़ देता है।
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10 साल बाद शेखर एक बड़ा कवि बनकर वापस घर लौटता है। घर लौटने पर उसे अजीता के साथ प्यार हो जाता है, लेकिन राजा अजीता की शादी किसी से करवा देता है। शेखर टूट जाता है और अपनी सारी कविताएं जला देता है।
शेखर की मौत हो जाती है और अजीता उसकी मौत के लिए राजा को ही कसूरवार ठहराती है। नाटक में कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों पर अमिट छोड़ी।
विशेष अजीता के किरदार में मल्लिका सिंह और नील ने बेहतरीन अभिनय किया। शेखर के किरदार में अर्शदीप और सार्थक नरूला ने भी सराहनीय अभिनय दिखाया।