फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Natak Manchan at Punjab Kala Bhawan

शिष्य को सिखाते-सिखाते गुरु खुद बना राजनीति का शिकार

Wed, 26 Mar 2014 01:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 26 Mar 2014 01:57 PM IST
विज्ञापन
Natak Manchan at Punjab Kala Bhawan
राजनीति के तीन सूत्र पहला जो अपना कहे उसी पर ज्यादा शक करो, दूसरा किसी रिश्ते को न मानकर भावुक न हों और तीसरा जो आसान लगे वही मुश्किल है।
विज्ञापन


यह तीन सूत्र सिखाते सिखाते गुरु अपने शिष्य को ऐसी गंदी राजनीति सीखाता है, जिसका शिकार एक दिन उन्हें खुद होना पड़ता है। शगुफे -2014 थिएटर फेस्टिवल के तहत दूसरे और अंतिम दिन नाटक ‘लल्लू राजकुमार ते तिन रंगी परी’ खेला गया। पाली भूपिंदर के लिखे नाटक का निर्देशन किया बरिंदरजीत बन्नी ने।

नाटक की शुरूआत नुक्कड़ नुमा सेट से होती है, जिसमें एक नट और नटी नाटक की शुरूआत करते हैं। थ्री इडियट्स नुमा तीन मस्खरे कहानी आगे बढ़ाते हैं। नाटक की शुरूआत में एक औपचारिक घोषणा होती हैं।
विज्ञापन


इसमें एक राजा अपने बेटे को राजनीति सिखाने के लिए एक शिक्षक नियुक्त करने की बात करते हैं। साथ ही उसे अपना आधा राज्य देने की भी बात करते हैं। इसी बीच एक बूढ़ा चरवाहा वहां आता है और राजा की बात मानते हुए राजा के बेटे लल्लू को राजनीति सिखाने की बात कहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


चरवाहा सबसे पहले लल्लू को एक कहानी सुनाता है। इसमें जनता देवी की बेटी आजादी एक राक्षस के पास कैद है। उसे छुड़ाने के बाद ही लल्लू एक कामयाब राज संभाले वाला बनेगा।

गुरु का दांव अंत में गुरु पर ही भारी पड़ जाता है, जब लल्लू आखिर में सबक सीख जाता है कि राजनीति क्या होती है। लल्लू गुरु को अपना आधा राज्य देने की जगह राजनीति का ज्ञान किसी और को न देने की सूरत में उसकी जबान काट देता है।


नाटक उस वक्त और दमदार लगता है, जब बीच-बीच में होने वाले अंग्रेजी संवाद नाटक की पेस को बढ़ाते हैं। अदाकारी में बॉडी लैंग्वेज का काफी शानदार तालमेल देखने को मिला।

दर्शकों की राय
नाटक देख कर अच्छा लगा। ऐसे नाटक देखकर पता चलता है कि राजनीति कितनी मुश्किल है। खासकर लल्लू का रोल और उस कलाकार का काम बहुत पसंद आया।
-सुखप्रीत सिंह

नाटक के डायलॉग बहुत दमदार थे। बीच-बीच में अंग्रेजी के संवाद एक नए रूप में पेश किए गए, जो सराहनीय हैं।
- रशमिंदर सिंह
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed