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Hindi News ›   Chandigarh ›   Natak Manchan at Punjab Kala Bhawan

मंच पर भगत सिंह और गांधी के विचारों की लड़ाई

Wed, 26 Mar 2014 01:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 26 Mar 2014 01:25 AM IST
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Natak Manchan at Punjab Kala Bhawan
मैं गांधी जी के विचारों की कद्र करता हूं, लेकिन उनसे एक बात पूछना चाहता हूं कि उन्होंने देश के बच्चों के लिए क्या किया। इस डायलॉग से कही न कही भगत सिंह के विद्यार्थी होने के दौरान की सोच नजर आती थी, जिसने उन्हें देश के लिए कुछ करने के लिए कहा।
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पंजाब कला भवन में इंपेक्ट आर्ट ने रोट्रेक्ट क्लब मोहाली और दीद-ए-दीदार के सौजन्य से दो दिन के थिएटर फेस्टिवल का आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत हुई बॉलीवुड के जाने माने लेखक, सिंगर और एक्टर पीयूष मिश्रा के लिखे नाटक 'गगन दमामा बाज्यो' से। नाटक का निर्देशन इंदरजीत मोगा ने किया।
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नाटक की शुरुआत बटुकचंद और एक सूत्रधार के बीच से शुरू हुई बातचीत से होती है। जिस्में सूत्रधार लाहौर में जन्में एक ऐसे लड़के के बारे में बताते हैं, जिसने बचपन में देखे जलिया वाले बाग की घटना से भारत को आजादी दिलाने का प्रण लिया।
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इस बीच समय समय पर भगत सिंह के साथी गांधी द्वारा चलाई जा रही गतिविधियों के  बारे में चर्चा करते हैं, लेकिन एक दिन जब अंग्रेजों के लड़कों द्वारा अपने साथी की पीटने की सूचना पाकर वह अपनी सोच को बदल कर उन्हें हाथों से समझाने की बात करता है।

लाला लाजपत राय की मौत की खबर सुन वह जरनल डायर को मारने का प्लान बनात है और फिर असेंबली में खुद को पकड़वाकर जेल में अनशन पर बेठ जाते है। कहानी आगे बढ़ती है और अंत में अंग्रेजों द्वारा भगत सिंह को फांसी दे दी जाती है।


नाटक देखने आए दर्शकों की राय  
भगत सिंह की कहानी पर नाटक और फिल्में वैसे कई बार देखी और सुनी है लेकिन इसमें कुछ कुछ जगह कई नई चीजे जानने को मिली। जैसे की कितनी पार्टी भगत सिंह ने ज्वाइन करी। कितनी बार सोशलिस्ट पार्टी का गठन हुआ। नाटक में अभिनय तो इतना खान नहीं हा लेकिन ट्रेन लूटने का सीन बहुत अच्छे से दिखाया गया।
निर्मल कुमार, विद्यार्थी, पीयू

नाटक में कुछ जगह बहुत अच्छा लगा। लेकिन अभिनय कही पर बहुत कमजोर भी लगा। लेकिन भगत सिंह की कहानी जितनी बार भी देखो अच्छी लगती है।
 अनुज भल्ला, विद्यार्थी
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