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'मुंबई आकर पता चला क्यों कहते हैं इसे जान'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 15 Jun 2014 01:16 PM IST
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फिल्म उद्योग में अपनी पहचान बनाने मुंबई आए पांच युवकों की जिंदगी पर आधारित एकजुट प्रोडक्शन कंपनी के नाटक ‘ये है बॉम्बे मेरी जान’ को शनिवार शाम टैगोर थिएटर में प्रस्तुत किया गया।
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नाटक का आयोजन डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर, हरियाणा ने किया। नादिरा जहीर बब्बर द्वारा लिखित और निर्देशित इस नाटक का शहर में यह दूसरा शो था। करीब 2 घंटे 10 मिनट की अवधि के इस नाटक के दौरान बीच में एक अंतराल भी लिया गया।
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नाटक शुरू होता है देश के विभिन्न हिस्सों में बैठे पांच युवकों की जिंदगी से, जो सपनों के शहर मुंबई में आकर फिल्म इंडस्ट्री में कुछ करना चाहते हैं। मुंबई आकर जो पहली सच्चाई से वे वाकिफ होते हैं वह है रहने का ठिकाना। पैसों की तंगी सभी को है इसलिए वह सभी एक कमरे में रहने की ठानते हैं।
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मकान मालकिन एक कैथोलिक है जिसका पति शराबी है और अक्सर उसे गाली गलौच करता है। मकान मालकिन ने अपने घर के अन्य हिस्सों में कई धर्मों के लोगों को किराए पर कमरे दे रखे हैं। युवक मुंबई आकर यह देख कर हैरान हो जाते हैं कि किस तरह से विभिन्न धर्म के लोग आपस में प्यार और जरूरत के वक्त एक दूसरे के काम आते हैं।
इससे प्रेरणा लेकर वह भी संघर्ष के दिनों में अलग अलग राज्यों के होने पर भी एक दूसरे की मदद करते हैं। नाटक के अंत में युवक अंत में कुछ बनने की चाह में कड़ी मेहनत करते हैं और समझ जाते है कि क्यों मुंबई को जान कहते है।