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‘अध विचाले’ में दिखी विधवा की दर्दभरी दास्तां
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 14 Jul 2014 04:11 PM IST
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औरतों पर मढ़े गए पुराने विचार और इससे प्रताड़ित महिलाओं के दर्द को रविवार शाम पंजाब कला भवन में नाटक अध विचाले में दिखाया गया। अमृतसर के रंगकर्मी थिएटर ग्रुप के इस नाटक का निर्देशन मनप्रीत ने किया।
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नाटक को दो भागों में बांटा गया। पहले भाग में कंजक कहानी का मंचन हुआ। मंच पर शादी का एक दृश्य सामने आता है, जिसमें कुछ लोग छोटी उम्र की लड़की की शादी की बात करते हैं। शादी के बाद लड़की एक दिन ससुराल में रहने के बाद वह अपने घर आ जाती है।
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कुछ दिन बाद लड़की को खबर मिलती है की उसके पति की दुर्घटना में मौत हो गई है। वह ससुराल आ जाती है और उसे विधवा की जिंदगी जबरदस्ती जीनी पड़ती है। जब बूढ़ी होती है तो वह नवरात्रों में कंजक पूजन करती है। एक दिन उसके जेठ की लड़की घर में अपने मंगेतर को बुलाती है।
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वह उसे अपमान जनक स्थिति में देख लेती है। वह सोचती है कि दिखावे वाले समाज ने उसे अभी तक विधवा बना कर रखा। अंत में वह कंजक नहीं रखती है। साथ ही निश्चय करती है कि वह सामाजिक बंधन नहीं मानेगी।
नाटक की दूसरी कहानी एक ऐसी लड़की की ही जो बचपन में शारीरिक प्रताड़ना झेलती है। बड़े होने पर उसका दिमागी संतुलन खो जाता है तो उसका पति भी उसे छोड़ देता है। अंत में वह पागलों की तरह भटकने लगती है।
लोग उसे माता का रूप समझने लगते है। अंत में कुछ लोग उसको एक कमरे में बंद कर देते हैं। उसका बुत बना कर उसपर चढ़ने वाले चंदे को लूट लेते हैं।