मोदी के 'श्रमेव जयते' का पंजाब में विरोध
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मोदी सरकार की ओर से घोषित किए गए श्रम सुधारों के विरोध में पंजाब की ट्रेड यूनियंस उठ खड़ी हुई हैं। माकपा, भाकपा, सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन), एटक (ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस) की पंजाब इकाइयों ने इसके विरोध का कार्यक्रम भी तय कर दिया है। यह प्रदर्शन एक से 30 नवंबर तक चलेंगे।
इनके कार्यकर्ता आगामी पांच दिसंबर को देशभर में होने वाले प्रदर्शनों में भी बढ़ चढ़ कर शिरकत करेंगे। इस दिन दिल्ली में होने वाले बड़े प्रदर्शन में प्रदेश से इन संगठनों के कार्यकर्ता भारी संख्या में शिरकत करेंगे।
एटक की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष और भाकपा पंजाब के सचिव बंत बराड़ के अनुसार, केंद्र सरकार का यह सुधार श्रमिकों का हित नहीं, बल्कि अहित करेंगे। इनसे उनके कल्याण की स्कीमों पर कुठाराघात होगा। 70 फीसदी श्रमिकों का नुकसान हो जाएगा। विभिन्न श्रम एक्टों में यह संशोधन श्रमिक विरोधी हैं। इसके खिलाफ हर मुकाम पर संघर्ष किया जाएगा।
करीब 30 करोड़ श्रमिक नुकसान की स्थिति में
सीटू के प्रदेश महासचिव रघुनाथ सिंह ने कहा कि इस समय पूरे देश में 46 करोड़ श्रमिक हैं, जो केंद्र सरकार के इस फैसले से प्रभावित होंगे। नए संशोधनों से करीब 30 करोड़ श्रमिक नुकसान की स्थिति में पहुंच जाएंगे।
उन्होंने बताया कि इनके खिलाफ प्रदेश स्तरीय धरने एक से 30 नवंबर तक चलेंगे। रघुनाथ सिंह ने कहा कि सरकार इंडस्ट्रियल डिसप्यूट एक्ट 1947, फैक्ट्री एक्ट 1948 और कांट्रेक्ट लेबर एक्ट 1970 में बदलाव करने जा रही है।
इससे सरकार से इजाजत लिए बगैर श्रमिकों की छंटनी की न्यूनतम सीमा में काफी इजाफा हो जाएगा, जो उनके लिए अहितकारी होगा। वह इसके खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन करेंगे और पांच दिसंबर को होनेवाले प्रदर्शन में पंजाब से भारी संख्या में लोग शामिल होंगे। माकपा की पंजाब इकाई के सचिव चरण सिंह विर्दी भी इन संशोधनों को श्रमिकों के खिलाफ बताया।