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गजब! स्वच्छता रैंकिंग के लिए शहर की पहचान ‘सुखना लेक’ को भूला निगम, नहीं दिया फीडबैक
Mon, 10 Feb 2020 01:59 PM IST
खुशबू गोयल
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 10 Feb 2020 01:59 PM IST
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सुखना लेक
- फोटो : अजय वर्मा
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स्वच्छता रैंकिंग के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर चंडीगढ़ नगर निगम अपने जल स्रोतों का फीडबैक देना ही भूल गया। वहीं निगम शहर की पहचान सुखना को ही भूल गया। मंत्रालय की वेबसाइट पर जल स्रोतों के कॉलम को कर्मचारियों ने खाली छोड़ दिया। जबकि इससे शहर को बेहतर रैंकिंग मिल सकती थी।
अब मंत्रालय ने रैंकिंग के लिए लोगों के सुझाव प्रक्रिया को भी बंद कर दिया है। अप्रैल में स्वच्छता रैंकिंग जारी होगी। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रत्येक शहर को विभिन्न क्षेत्रों को लेकर फीडबैक देना होता है। उसी केआधार पर शहर को नंबर मिलते हैं। इसमें लोगों से सुझाव के आधार पर भी नंबर मिलते हैं।
पानी के स्रोतों की संख्या व उनकी सफाई की जानकारी भी दी जाती है। चंडीगढ़ ने इस कॉलम को खाली ही छोड़ दिया। यहां तक की चंडीगढ़ की पहचान सुखना लेक के बारे में भी कोई जिक्र नहीं किया गया। इससे चंडीगढ़ को लगभग 50 से 60 नंबर मिल सकते थे। वर्ष 2018-19 में स्वच्छता रैंकिंग में चंडीगढ़ देश में 20वें स्थान पर आया था।
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इससे नगर निगम सवालों के घेरे में आ गई थी। तत्कालीन मेयर राजेश कालिया ने इसकी जिम्मेदारी ली। उसके बाद निगम ने स्वच्छता के लिए कई प्रयास किए। स्कूल, कॉलेज व अन्य संस्थानों में अभियान चलाए, लेकिन शहर के हालात देखते हुए रैंकिंग में एक बार फिर सिटी ब्यूटीफुल की साख दांव पर लगी है।
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अब मंत्रालय ने रैंकिंग के लिए लोगों के सुझाव प्रक्रिया को भी बंद कर दिया है। अप्रैल में स्वच्छता रैंकिंग जारी होगी। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रत्येक शहर को विभिन्न क्षेत्रों को लेकर फीडबैक देना होता है। उसी केआधार पर शहर को नंबर मिलते हैं। इसमें लोगों से सुझाव के आधार पर भी नंबर मिलते हैं।
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पानी के स्रोतों की संख्या व उनकी सफाई की जानकारी भी दी जाती है। चंडीगढ़ ने इस कॉलम को खाली ही छोड़ दिया। यहां तक की चंडीगढ़ की पहचान सुखना लेक के बारे में भी कोई जिक्र नहीं किया गया। इससे चंडीगढ़ को लगभग 50 से 60 नंबर मिल सकते थे। वर्ष 2018-19 में स्वच्छता रैंकिंग में चंडीगढ़ देश में 20वें स्थान पर आया था।
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इससे नगर निगम सवालों के घेरे में आ गई थी। तत्कालीन मेयर राजेश कालिया ने इसकी जिम्मेदारी ली। उसके बाद निगम ने स्वच्छता के लिए कई प्रयास किए। स्कूल, कॉलेज व अन्य संस्थानों में अभियान चलाए, लेकिन शहर के हालात देखते हुए रैंकिंग में एक बार फिर सिटी ब्यूटीफुल की साख दांव पर लगी है।
साल दर साल गिरता जा रहा शहर का प्रदर्शन
वर्ष 2016 में चंडीगढ़ पूरे देश में स्वच्छता रैंकिंग में दूसरे स्थान पर रहा था। वर्ष 2017 में चंडीगढ़ 11वें स्थान पर फिसल गया। किरकिरी के बाद 2018 में तीसरे स्थान पर रहने के बाद, वर्ष 2019 में चंडीगढ़ पिछड़कर 20वें स्थान पर चला गया। मंत्रालय की ओर से दिसंबर में वर्ष 2020 के दो क्वार्टर के परिणाम जारी किए गए थे।
अप्रैल से जून तक के लीग में चंडीगढ़ 11वें और जुलाई से सितंबर तक की लीग में 27वें नंबर पर रहा था। तीसरे लीग में अक्तूूबर से नवंबर तक का परिणाम फिलहाल अभी नहीं आया है। जबकि चौथे लीग के लिए सर्वे चार जनवरी से शुरू किया था। अप्रैल में इसका परिणाम आएगा।
डोर टू डोर गारबेज कलेक्टरों से समझौते हुई देरी
स्वच्छता रैंकिंग में गीला और सूखा कचरा अलग लेने व उसका निस्तारण करने के तरीकों पर भी नंबर मिलते हैं। पूरे साल जेपी प्लांट और निगम में कचरा लेने को लेकर ठनी रही। इससे कचरे का बेहतर तरीके से निस्तारण नहीं हो सका। वहीं घरों से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग लेने के लिए गारबेज कलेक्टरों से निगम का समझौता होने में भी काफी देर हो चुकी थी। ऐसे में रैंकिंग में सुधार कर पाना निगम के लिए संभव नहीं था।
अप्रैल से जून तक के लीग में चंडीगढ़ 11वें और जुलाई से सितंबर तक की लीग में 27वें नंबर पर रहा था। तीसरे लीग में अक्तूूबर से नवंबर तक का परिणाम फिलहाल अभी नहीं आया है। जबकि चौथे लीग के लिए सर्वे चार जनवरी से शुरू किया था। अप्रैल में इसका परिणाम आएगा।
डोर टू डोर गारबेज कलेक्टरों से समझौते हुई देरी
स्वच्छता रैंकिंग में गीला और सूखा कचरा अलग लेने व उसका निस्तारण करने के तरीकों पर भी नंबर मिलते हैं। पूरे साल जेपी प्लांट और निगम में कचरा लेने को लेकर ठनी रही। इससे कचरे का बेहतर तरीके से निस्तारण नहीं हो सका। वहीं घरों से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग लेने के लिए गारबेज कलेक्टरों से निगम का समझौता होने में भी काफी देर हो चुकी थी। ऐसे में रैंकिंग में सुधार कर पाना निगम के लिए संभव नहीं था।
वर्ष 2020-21 के लिए शुरू की तैयार
निगम ने वर्ष अब वर्ष 2020-21 के लिए तैयारी शुरू कर दी है। इस वर्ष निगम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत 75 लाख रुपये का बजट तैयार किया है। दो मशीनें मंगाई हैं। जिससे कि सड़कों को बेहतर तरीके से साफ कर सकें। रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था भी निगम ने अब शुरू कर दी है। वहीं डोर टु डोर कचरा लेने के लिए भी जल्द गाड़ियां खरीदी जाएंगी।
वेबसाइट पर जलस्रोतों के बारे में पूछा गया था। हमारे कर्मचारियों को लगा कि जिससे पेयजल सप्लाई होती है उसके लिए फीडिंग करनी है। इस कारण उस कॉलम को खाली छोड़ दिया गया।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम
इस साल प्रयास करेंगे कि शहर को बेहतर रैंकिंग दिला सकें। योजना बनाएंगे और उस पर बेहतर तरीके से अमल करेंगे। इस साल डोर टु डोर गारबेज लेने के लिए गाड़ियां भी आ जाएंगी।
- राजबाला मलिक, मेयर
वेबसाइट पर जलस्रोतों के बारे में पूछा गया था। हमारे कर्मचारियों को लगा कि जिससे पेयजल सप्लाई होती है उसके लिए फीडिंग करनी है। इस कारण उस कॉलम को खाली छोड़ दिया गया।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम
इस साल प्रयास करेंगे कि शहर को बेहतर रैंकिंग दिला सकें। योजना बनाएंगे और उस पर बेहतर तरीके से अमल करेंगे। इस साल डोर टु डोर गारबेज लेने के लिए गाड़ियां भी आ जाएंगी।
- राजबाला मलिक, मेयर