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कमिश्नर ने एडवाइजर से की शिकायत, बोले- पार्षदों का यही रवैया रहा तो छोड़ दूंगा चंडीगढ़
Thu, 31 Oct 2019 12:04 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 31 Oct 2019 12:04 PM IST
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नगर निगम सदन से वॉकआउट करते कमिश्नर
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ नगर निगम की सदन बैठक में हुए हंगामे का शोर चंडीगढ़ सचिवालय में भी गूंजा। सदन की बैठक का बहिष्कार कर कमिश्नर केके यादव बुधवार को दोपहर में ही प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा से मिलने पहुंच गए। उन्होंने सलाहकार को बैठक में घटी सारी घटना की जानकारी दी और कहा कि पार्षद बदतमीजी पर उतर आए हैं।
पार्षदों का यही रवैया रहा तो वह यहां से चले जाएंगे। नगर निगम की सदन की बैठक में हुई इस घटना को लेकर एडवाइजर मनोज परिदा ने भी पार्षदों को अपने दायरे में रहकर काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शहर के पार्षदों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। जनप्रतिनिधि और अधिकारियों का पद, दोनों ही सांविधानिक पद हैं और दोनों की अपनी गरिमा है।
पार्षदों को मर्यादा में रहकर अपना कार्य करना चाहिए। अगर जनप्रतिनिधि और अधिकारी आपस में उलझेंगे तो शहर का ही नुकसान होगा। लोगों के काम रुकेंगे, उन्हें परेशानी झेलनी पड़ेगी। इससे दोनों की छवि खराब होगी। एडवाइजर ने कहा कि पार्षदों और अधिकारियों में एक दूसरे के प्रति आदर की भावना होनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि प्रशासन यह नहीं चाहता कि किसी कारण जनता के काम रुके इसलिए सभी अपने दायरे में रहकर ही काम करें। वहीं, प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पार्षदों को सोच समझ कर किसी भी अधिकारी से बात करनी चाहिए। आईएएस अफसर बनने में बेहिसाब मेहनत लगती है।
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पार्षदों का यही रवैया रहा तो वह यहां से चले जाएंगे। नगर निगम की सदन की बैठक में हुई इस घटना को लेकर एडवाइजर मनोज परिदा ने भी पार्षदों को अपने दायरे में रहकर काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शहर के पार्षदों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। जनप्रतिनिधि और अधिकारियों का पद, दोनों ही सांविधानिक पद हैं और दोनों की अपनी गरिमा है।
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पार्षदों को मर्यादा में रहकर अपना कार्य करना चाहिए। अगर जनप्रतिनिधि और अधिकारी आपस में उलझेंगे तो शहर का ही नुकसान होगा। लोगों के काम रुकेंगे, उन्हें परेशानी झेलनी पड़ेगी। इससे दोनों की छवि खराब होगी। एडवाइजर ने कहा कि पार्षदों और अधिकारियों में एक दूसरे के प्रति आदर की भावना होनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि प्रशासन यह नहीं चाहता कि किसी कारण जनता के काम रुके इसलिए सभी अपने दायरे में रहकर ही काम करें। वहीं, प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पार्षदों को सोच समझ कर किसी भी अधिकारी से बात करनी चाहिए। आईएएस अफसर बनने में बेहिसाब मेहनत लगती है।
अपनी ही पार्टी के लोग मुझे फेल करना चाहते हैं
कमिश्नर के बायकाट के बाद पार्षदों ने आगामी रणनीति बनाने के लिए एक बैठक की। सूत्रों के अनुसार बैठक में मेयर राजेश कालिया ने अपनी ही पार्टी के पार्षदों के रवैये को देखकर कहा कि ‘आप लोग हमें फेल करने में लगे हो’। इसपर पार्षदों के साथ मेयर की तीखी बहस हो गई।
पार्षद की इस टिप्पणी पर भड़के अफसर
अनिल दुबे ने कमिश्नर केके यादव को कहा कि अफसर एक बार परीक्षा पास कर आईएएस बन जाते हैं लेकिन उन्हें हर 5 साल बाद चुनाव की परीक्षा पास करनी पड़ती है। इसपर कमिश्नर ने कहा कि वह व्यक्तिगत कटाक्ष बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसके बाद माहौल और गरमा गया। पार्षद अनिल दुबे की टिप्पणी पर नाराज होकर कमिश्नर केके यादव बैठक से उठकर चले गए। कमिश्नर को जाते देख बाकी अफसरों ने भी बैठक का बहिष्कार कर दिया।
पार्षद की इस टिप्पणी पर भड़के अफसर
अनिल दुबे ने कमिश्नर केके यादव को कहा कि अफसर एक बार परीक्षा पास कर आईएएस बन जाते हैं लेकिन उन्हें हर 5 साल बाद चुनाव की परीक्षा पास करनी पड़ती है। इसपर कमिश्नर ने कहा कि वह व्यक्तिगत कटाक्ष बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसके बाद माहौल और गरमा गया। पार्षद अनिल दुबे की टिप्पणी पर नाराज होकर कमिश्नर केके यादव बैठक से उठकर चले गए। कमिश्नर को जाते देख बाकी अफसरों ने भी बैठक का बहिष्कार कर दिया।