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मलोया के स्मॉल फ्लैट्स में नगर निगम ही कराएगा सफाई
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चंडीगढ़। मलोया के स्मॉल फ्लैट्स की सफाई व्यवस्था नगर निगम ही करेगा। इसके एवज में हाउसिंग बोर्ड निगम को भुगतान करेगा। हाउसिंग बोर्ड की ओर से लोगों को बसाने के बाद यहां कोई सफाई करने नहीं आ रहा था। इससे लोग काफी परेशान हो रहे थे।
मलोया के स्मॉल फ्लैट्स में करीब 10 हजार लोग रहते हैं, लेकिन यहां पर न तो डिस्पेंसरी है, न ही कोई मार्केट है। हजारों लोगों को बिना सुविधाएं दिए इन मकानों में शिफ्ट कर दिया गया है। यहां के पार्कों को कोई देखने वाला नहीं है। घास बड़ी-बड़ी हो गई है, जिसकी वजह से आए दिन सांप निकलने की घटनाएं सामने आ रही हैं। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने यहां करीब 5000 फ्लैट्स का निर्माण कराया था। पिछले साल जुलाई में कॉलोनी नंबर-4 से ढाई हजार परिवारों को मलोया के स्मॉल फ्लैट्स में शिफ्ट किया गया, लेकिन अब तक मूलभूत सुविधाएं नहीं दी गई हैं। यहां वीटा और वेरका के बूथ तो बनाए गए हैं लेकिन अभी तक इन्हें अलॉट नहीं किया गया है। इलाके में जगह-जगह कूड़े के ढेर पड़े हैं। पार्क पूरी तरह से बदहाल स्थिति में हैं। लोगों ने हंगामा किया तो बुधवार को प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा के नेतृत्व में एक बैठक हुई। जिसमें तय हुआ कि निगम सफाई करेगा और इसका भुगतान हाउसिंग बोर्ड करेगा।
जो विभाग बनाता है बिल्डिंग, पांच साल तक वही करता है देखरेख
बैठक में निगम आयुक्त ने कहा कि नियमानुसार जो विभाग बिल्डिंग बनाता है, अगले पांच साल तक उसे ही बिल्डिंग की देखरेख व सफाई व्यवस्था देखनी होती है। हालांकि, सेक्टर-26 मंडी में निगम सफाई करता है। उसके लिए मंडी कमेटी निगम को भुगतान करती है। इसी तरह निगम की ओर से मलोया स्मॉल फ्लैट्स में सफाई व्यवस्था कराने के लिए तैयार है, लेकिन हाउसिंग बोर्ड को उसका भुगतान करना होगा। इस बात पर सहमति के बाद अब एस्टीमेट बनाया जाएगा।
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मलोया के स्मॉल फ्लैट्स में करीब 10 हजार लोग रहते हैं, लेकिन यहां पर न तो डिस्पेंसरी है, न ही कोई मार्केट है। हजारों लोगों को बिना सुविधाएं दिए इन मकानों में शिफ्ट कर दिया गया है। यहां के पार्कों को कोई देखने वाला नहीं है। घास बड़ी-बड़ी हो गई है, जिसकी वजह से आए दिन सांप निकलने की घटनाएं सामने आ रही हैं। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने यहां करीब 5000 फ्लैट्स का निर्माण कराया था। पिछले साल जुलाई में कॉलोनी नंबर-4 से ढाई हजार परिवारों को मलोया के स्मॉल फ्लैट्स में शिफ्ट किया गया, लेकिन अब तक मूलभूत सुविधाएं नहीं दी गई हैं। यहां वीटा और वेरका के बूथ तो बनाए गए हैं लेकिन अभी तक इन्हें अलॉट नहीं किया गया है। इलाके में जगह-जगह कूड़े के ढेर पड़े हैं। पार्क पूरी तरह से बदहाल स्थिति में हैं। लोगों ने हंगामा किया तो बुधवार को प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा के नेतृत्व में एक बैठक हुई। जिसमें तय हुआ कि निगम सफाई करेगा और इसका भुगतान हाउसिंग बोर्ड करेगा।
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जो विभाग बनाता है बिल्डिंग, पांच साल तक वही करता है देखरेख
बैठक में निगम आयुक्त ने कहा कि नियमानुसार जो विभाग बिल्डिंग बनाता है, अगले पांच साल तक उसे ही बिल्डिंग की देखरेख व सफाई व्यवस्था देखनी होती है। हालांकि, सेक्टर-26 मंडी में निगम सफाई करता है। उसके लिए मंडी कमेटी निगम को भुगतान करती है। इसी तरह निगम की ओर से मलोया स्मॉल फ्लैट्स में सफाई व्यवस्था कराने के लिए तैयार है, लेकिन हाउसिंग बोर्ड को उसका भुगतान करना होगा। इस बात पर सहमति के बाद अब एस्टीमेट बनाया जाएगा।
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