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अमर उजाला इंपेक्ट: नगर निगम के अधिकारी बोले, इस खबर से आंखे खुल गईं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 12 Jan 2018 09:34 AM IST
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Mayor Davesh Moudgil
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स्वच्छता एप शिकायतों के निपटारे में बरती जा रही लापरवाही को उजागर करने वाली अमर उजाला की खबर से नगर निगम के अधिकारियों की आंखें खुल गई हैं। सेक्टर 17 स्थित नगर निगम के कार्यालय में वीरवार को आयोजित प्रेस वार्ता में अतिरिक्त कमिश्नर एवं सचिव सौरभ मिश्रा और मेयर देवेश मोदगिल ने कहा कि अमर उजाला की खबर से जो फीड बैक मिला है, वो आंख खोलने वाला है।
इससे पता चला कि शिकायतों के निपटारे में कहां लापरवाही बरती जा रही है। शिकायतों के प्रति और गंभीरता बरती जाएगी। कोशिश रहेगी कि शिकायतों को जल्द से जल्द निपटाया जाए और उनके निपटारे में कोई भी लापरवाही न बरती जाए। दरअसल वीरवार के अंक में अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में बताया था कि नगर निगम के स्वच्छता एप में आने वाली शिकायतों के नाम पर शहरवासियों के साथ छल किया जा रहा है।
पड़ताल में पता चला कि शहरवासी जो भी शिकायत स्वच्छता एप पर करते हैं, प्रशासन की तरफ से उसका निपटारा कर देने का रिप्लाई आ जाता है लेकिन असल में वहां की सफाई नहीं की जाती है। एक मामले में शिकायत की जगह पर पहुंचे कर्मियों ने कूड़े को एक जगह से हटाकर दूसरे जगह पर रख दिया और फिर वहां की तस्वीर खींच कर शिकायतकर्ता को भेज दिया। साथ ही रिप्लाई कर दिया कि शिकायत का निपटारा कर दिया गया है।
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नगर निगम के अफसर दावा कर रहे हैं कि एप पर आई शिकायतों का तुरंत समाधान हो रहा है, जबकि पड़ताल में सामने आया कि एप पर डाली जा रही शिकायतों का 24 घंटे में समाधान होना तो दूर 2-3 दिन में भी नहीं हो पा रहा। जो कुछ हो रहा है वो सिर्फ खानापूर्ति है। शिकायतें को मौके पर जाकर देखा गया तो पता चला कि कचरा जस का तस बिखरा पड़ा है।
वीरवार को प्रेस वार्ता में अतिरिक्त कमिश्नर सौरभ मिश्रा ने अमर उजाला की रिपोर्ट का खास तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें प्रशासन की आंखें खोलती हैं और हमसे चूक कहां हो रही है ये पता चलता है, जिससे सबक लेकर हम प्रणाली को और दुरुस्त करते हैं।
यहां पढ़ सकते हैं पोल-खोल वाली खबर: स्वच्छता के नाम पर नगर निगम लोगों को ऐसे बना रहा बेवकूफ
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इससे पता चला कि शिकायतों के निपटारे में कहां लापरवाही बरती जा रही है। शिकायतों के प्रति और गंभीरता बरती जाएगी। कोशिश रहेगी कि शिकायतों को जल्द से जल्द निपटाया जाए और उनके निपटारे में कोई भी लापरवाही न बरती जाए। दरअसल वीरवार के अंक में अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में बताया था कि नगर निगम के स्वच्छता एप में आने वाली शिकायतों के नाम पर शहरवासियों के साथ छल किया जा रहा है।
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पड़ताल में पता चला कि शहरवासी जो भी शिकायत स्वच्छता एप पर करते हैं, प्रशासन की तरफ से उसका निपटारा कर देने का रिप्लाई आ जाता है लेकिन असल में वहां की सफाई नहीं की जाती है। एक मामले में शिकायत की जगह पर पहुंचे कर्मियों ने कूड़े को एक जगह से हटाकर दूसरे जगह पर रख दिया और फिर वहां की तस्वीर खींच कर शिकायतकर्ता को भेज दिया। साथ ही रिप्लाई कर दिया कि शिकायत का निपटारा कर दिया गया है।
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नगर निगम के अफसर दावा कर रहे हैं कि एप पर आई शिकायतों का तुरंत समाधान हो रहा है, जबकि पड़ताल में सामने आया कि एप पर डाली जा रही शिकायतों का 24 घंटे में समाधान होना तो दूर 2-3 दिन में भी नहीं हो पा रहा। जो कुछ हो रहा है वो सिर्फ खानापूर्ति है। शिकायतें को मौके पर जाकर देखा गया तो पता चला कि कचरा जस का तस बिखरा पड़ा है।
वीरवार को प्रेस वार्ता में अतिरिक्त कमिश्नर सौरभ मिश्रा ने अमर उजाला की रिपोर्ट का खास तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें प्रशासन की आंखें खोलती हैं और हमसे चूक कहां हो रही है ये पता चलता है, जिससे सबक लेकर हम प्रणाली को और दुरुस्त करते हैं।
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