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Chandigarh: एक परिवार में कई वेंडिंग लाइसेंस, 250 मामलों का सात साल बाद खुलासा, सभी को नोटिस जारी
Wed, 20 Dec 2023 01:55 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 20 Dec 2023 01:55 AM IST
सार
वेंडर एक्ट का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी वालों का पंजीकरण और पुनर्वास करना है ताकि उनका शोषण न हो। नियम कहता है कि लाइसेंस उसे ही दिया जाना चाहिए जिसके पास नियमित सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की नौकरी न हो।
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डेमो
- फोटो : डेमो
विस्तार
चंडीगढ़ में वर्ष 2016 में स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट-2014 के तहत सर्वेक्षण हुआ था और वेंडर्स को लाइसेंस दिए गए थे। अब करीब सात साल बाद खुलासा हुआ है कि वर्तमान में कई ऐसे लाइसेंसी हैं, जिनके एक ही परिवार के पांच-पांच सदस्यों का वेंडिंग लाइसेंस बना हुआ है। इन सभी को नोटिस भेजा गया है और एफआईआर दर्ज कराने की भी चेतावनी दी गई है।
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पिछले काफी समय से कई वेंडर लाइसेंस फीस नहीं जमा करा रहे हैं। इन वेंडरों के डाटा का जब नगर निगम के अधिकारियों ने विश्लेषण किया तो पाया कि कई व्यक्तियों ने अपने सभी परिवार के सदस्यों के नाम पर लाइसेंस लिया हुआ है।
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नगर निगम के संयुक्त आयुक्त-2 शंभू ने बताया कि उन्होंने वेंडरों के मोबाइल नंबर और घर के पते के आधार पर पता लगाया है कि एक ही परिवार में कई सदस्यों के नाम वेंडर लाइसेंस बने हुए हैं जबकि यह लाइवलीहुड मिशन के नियमों के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि ऐसे करीब 250 केस सामने आए हैं।
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संयुक्त आयुक्त ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले देखा कि एक ही मोबाइल नंबर पर कई वेंडरों के लाइसेंस बने हुए हैं। इसके बाद जब उनके पते देखे गए और माता-पिता के नाम का मिलान किया गया तो पता चला कि एक ही परिवार के कई सदस्यों ने लाइसेंस बनवाए हैं। इस पूरे मामले की जांच कराई जा रही है कि उन्होंने ऐसा कैसे किया। सभी के लाइसेंस को रद्द करने के नोटिस के साथ ऐसे लाइसेंसधारकों पर एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी गई है। इन सभी की 27 से 29 दिसंबर के बीच व्यक्तिगत सुनवाई तय की गई है।
रेहड़ी-पटरी वालों का पंजीकरण है उद्देश्य
बता दें कि वेंडर एक्ट का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी वालों का पंजीकरण और पुनर्वास करना है ताकि उनका शोषण न हो। नियम कहता है कि लाइसेंस उसे ही दिया जाना चाहिए जिसके पास नियमित सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की नौकरी न हो। कानून में कहा गया है कि विक्रेता को एक से अधिक साइटों से काम नहीं करना चाहिए।
नियमित लाइसेंस फीस देने वाले वेंडर्स को मिलेगा मौका
शहर में अभी भी कई ऐसे वेंडर हैं जिन्हें साइट्स आवंटित नहीं हुई है लेकिन वह हर महीने निगम को लाइसेंस फीस जमा करा रहे हैं। ऐसे वेंडर्स को निगम जल्द ही वेंडिंग साइट ऑफर करेगा। नगर निगम ने इसका खाका तैयार कर लिया है और जल्द होने वाली टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा। नगर निगम ने पाया है कि ऐसे करीब 350 लोग हैं जो नियमित रूप से लाइसेंस फीस चुका रहे हैं।
शहर में वेंडर ज्यादा थे लेकिन साइट्स कम थी, जिसकी वजह से कई लोगों को साइट्स आवंटित नहीं हुए। वह जहां बैठे थे, आज भी वहीं बैठकर काम कर रहे हैं। इसमें से कई लोगों ने लाइसेंस फीस जमा करानी बंद कर दी लेकिन कई लोग ऐसे हैं जो नियमित रूप से लाइसेंस फीस जमा करा रहे हैं। ऐसे लोगों को ही साइट्स आवंटित की जाएगी ताकि वह जगह पर बैठकर काम कर सकें। यह वेंडिंग साइट्स वह हैं जिन्हें या तो वेंडर्स ने खुद छोड़ दिया है या फिर जिन्हें नगर निगम ने रद्द किया है।
अधिकतर नहीं जमा कर रहे लाइसेंस फीस, रद्द करने का भेजा नोटिस
नगर निगम में 10,920 वेंडर पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से करीब साढ़े तीन हजार वेंडर ही हर माह लाइसेंस फीस जमा करवा रहे हैं जबकि शहर में इससे चार गुना वेंडर काम कर रहे हैं। अन्य वेंडरों के लाइसेंस फीस नहीं जमा कराने से नगर निगम को लाखों रुपये की चपत लग रही है। कई वेंडर्स ने तो वर्ष 2018 के बाद से लाइसेंस फीस चुकाया ही नहीं है। उनका लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया नगर निगम ने शुरू कर दी है।
संयुक्त आयुक्त-2 शंभू ने बताया कि कइयों को रद्द करने का नोटिस भेजा जा चुका है। बता दें कि छह जुलाई 2023 को टाउन वेंडिंग कमेटी ने यह सैद्धांतिक निर्णय ले लिया था कि जिन वेंडरों ने अप्रैल 2018 से अब तक फीस नहीं जमा कराई है, उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाए।