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पंचकूलाः आतंक ने पंजाब छुड़ाया, जज्बे से नाम कमाया

ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला Updated Sat, 12 Dec 2015 05:00 PM IST
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पहले एमईएस में ठेकेदारी, फिर पंचकूला में वुडन डोर की इंडस्ट्री और अब वुडन डोर, स्टील विंडो और पीवीसी डोर के साथ कैबिनेट्स की मैन्युफैक्चरिंग। यह है राम फैब्रिकेटर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर रमेश अग्रवाल की सक्सेस स्टोरी। शिक्षा पूरी करने के बाद न तो उनके पास बिजनेस के लिए कोई जमापूंजी थी और न ही कोई अन्य साधन।
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उनके पास था तो बस जज्बा। इसी जज्बे ने उनको ऐसी राह दिखाई कि वह बन गए हैं चार राज्यों के नामी उद्यमी।
रमेश अग्रवाल ने बताया कि उनके पिता फिरोजपुर (पंजाब) के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में एक क्लर्क थे। पांच भाई बहनों का पालन पोषण करना उनके लिए काफी कठिन था। अपने खाली समय में वह कढ़ाई का काम करते थे।


रमेश अग्रवाल ने बताया कि उनकी पढ़ाई भी अधूरी ही रह गई। उन्होंने घर की स्थिति को देखते हुए वर्ष 1980 में स्पेयर पार्ट्स का काम शुरू किया। वर्ष 1982 में एमईएस में सप्लाई करने लगे। आतंकवाद के दौर में उन्होंने वर्ष 1989 में पंजाब छोड़ दिया और पंचकूला में बस गए। एमईएस की सप्लाई का काम लगातार करते रहे। वह एमईएस में बिल्डिंग मैटेरियल की सप्लाई करते थे।

1999 में पंचकूला के इंडस्ट्रियल प्लाट लिया

प्लाट लेकर वुडन डोर की इंडस्ट्री लगाई। रमेश अग्रवाल ने बताया कि क्वालिटी की वजह से उनके बनाए वुडन डोर एमईएस से अप्रूव हो गए। इसके बाद वर्ष 2003 में पीवीसी डोर, स्टील विंडो की इंडस्ट्री लगा दी। उन्होंने कहा कि ठेकेदारी में जो कमाया वह इंडस्ट्री में लगाते गए।

घर का चाहिए सिविल इंजीनियर
रमेश अग्रवाल ने बताया कि उनके पिता आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण उनको ज्यादा पढ़ा नहीं सके। उनके दिमाग में यही बात बसी थी। उनका ज्यादा काम कंस्ट्रक्शन से जुड़ा था, इसलिए उनको एक सिविल इंजीनियर की आवश्यकता थी, यही कारण रहा कि अपने दोनों बेटों (साहिल अग्रवाल और सारांश अग्रवाल) को सिविल इंजीनियरिंग बनाया। शिप्रा (बेटी) को उन्होंने इलेक्ट्रानिक कम्युनिकेशन और एमबीए करवाया।

पचास हजार से की थी शुरुआत
रमेश अग्रवाल ने कहा कि जब उन्होंने पंचकूला में अपनी फैक्ट्री लगाई तो कुल जमांपूंजी पचास हजार रुपये थी। इतनी सी राशि में काम करना काफी कठिन था। लेकिन हिम्म्त थी और जज्बा भी था। ठेकेदारी के काम से जो पैसा आया उसको अपनी फैक्ट्री में लगाते गए और धीमे धीमे काम बढ़ता गया। अब एक फैक्ट्री पंचकूला और दूसरी बरवाला में है।

सामाजिक कार्य में हमेशा आगे
रमेश अग्रवाल सामाजिक कार्य में भी हमेशा आगे रहते हैं। उन्होंने बताया कि रायपुररानी में 38 मंदबुद्धि बच्चों और लेडीज के लिए बनाए गए सांत्वना केंद्र में वह आर्थिक मदद करते हैं। इसके साथ ही चंडी माता मंदिर और मुंडी खरड गौशाला में भी वह आर्थिक मदद देते हैं। पीजीआई चंडीगढ़ में वह लाइफ लाइन सोसायटी के आजीवन सदस्य हैं। रमेश अग्रवाल ने कहा कि कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी सबसे ज्यादा आवश्यक है।
 
प्रोफाइल
रमेश अग्रवाल (डायरेक्टर, राम फैब्रिकेटर्स प्राइवेट लिमिटेड)
स्कूलिंग-एसडी स्कूल फिरोजपुर (पंजाब)
कालेज-आरएसडी कालेज फिरोजपुर (पंजाब)
प्रधान-इंडस्ट्री एसोसिएशन, पंचकूला
पूर्व प्रधान-एमईएस बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया
अग्रवाल सभा पंचकूला के लाइफ मेंबर
शिव मंदिर सेक्टर-9 पंचकूला के लाइफ मेंबर
पीजीआई की लाइफ लाइन सोसायटी के लाइफ मेंबर
 
यहां है फैक्ट्री
पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2
एचएसआईडीसी रामगढ़ के समीप

इसकी मैन्युफैक्चरिंग
वुडन डोर
स्टील विंडो
पीवीसी डोर एंड कैबिनेट्स

टिप्स

1-इंडस्ट्री लगाने के लिए सर्वे सबसे ज्यादा आवश्यक है।
2-इंडस्ट्री को शुरू करने के पहले फाइनेंस जरूर देख लें।
3-एक सफल बिजनेस के लिए साइड बिजनेस जरूरी है।
4-किसी प्रोफेशनल सलाहकार को अपने साथ में रखें।
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