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टेक्सटाइल इंडस्ट्रीः 22 की उम्र में लगाई और ऊंचाइयों पर पहुंचाई
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Wed, 16 Dec 2015 06:33 PM IST
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मिलिए एक शख्स से, जिसने पंचकूला में 22 की उम्र में टैक्सटाइल इंडस्ट्री लगाई और उसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इनका नाम है अरूण ग्रोवर। अमरटैक्स के सीएमडी अरुण ग्रोवर ने बताया कि उन्होंने मुंबई में वर्ष 1981 में अपना लूम लगाया। वर्ष 1984 में पिता अमरनाथ ने उनको पंचकूला बुला लिया।
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पंचकूला में उन्होंने अपनी इंडस्ट्री लगाई। अरुण ग्रोवर ने बताया कि जब वह पंचकूला आए तो न यहां रोड थीं न ही इंडस्ट्री, बिजली की सप्लाई भी पर्याप्त नहीं थी। ऐसे में प्रोडक्शन हाउस खोलना चैलेंजिंग काम था। उन्होंने वर्ष 1984 में टेक्सटाइल इंडस्ट्री लगा डाली। उन्होंने बताया कि मुंबई से वह तीन टेक्नीशियन को अपने साथ लाए थे। काम शुरू हुआ तो सबसे पहले बनाई मैटी। जिसने मार्केट में क्रांति ला दी।
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मैटी के कपड़े ने किया प्रसिद्ध
अमरटैक्स के एमडी अरुण ग्रोवर ने बताया कि उन्होंने पंचकूला में टेक्सटाइल इंडस्ट्री लगाई तो सबसे पहला उद्देश्य रहा कि क्वालिटी को मेंटेन किया जाए। इसी के तहत पहला प्रोडक्ट निकला मैटी। उस समय मैटी की धूम मच गई। मैटी का प्रोडक्शन पंचकूला में होता था और उसका कपड़ा भीलवाड़ा में प्रोसेस होता था। उन्होंने बताया कि इस मैटी को राइडर का नाम दिया। अरुण ग्रोवर ने बताया कि अमृतसर में हाल यह हो गया था कि आढ़ती इस मैटी को लेने के लिए उत्साहित रहते थे।
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स्विट्जरलैंड की मशीन से रेवोल्यूशन
अरुण ग्रोवर ने बताया कि वर्ष 1991 के बाद भारत सरकार की नीति आई कि विदेशी मशीन लाने पर पांच फीसदी एक्साइज ड्यूटी पड़ेगी। उन्होंने अपनी यूनिट्स में लगाई गईं सभी मशीने बदल दी। स्विट्जरलैंड की मशीने लगाईं तो वीवींग क्वालिटी एकदम से बेहतर हो गई। इसके बाद वर्ष 1998 में अपना डाइंग और प्रोसेसिंग प्लांट भी डेराबस्सी में लगा दिया। अब सारा कुछ इनहाउस होने लगा। वह बताते हैं कि पहले प्रतिमाह चार हजार मीटर कपड़ा बनता था और अब चार लाख मीटर कपड़ा तैयार होता है।
फार्म टू फ़ॉर्क का कांसेप्ट
अरुण ग्रोवर ने बताया कि उन्होंने काफी मार्केट स्टडी करने के बाद फार्म टू फॉर्क का कांसेप्ट अप्लाई कर दिया। यह कांसेप्ट सीधा मैन्युफैक्चरर से कंज्यूमर का था। जिससे सभी मिडलमैन खत्म हो गए और परिधान किफायती दरों पर उपभोक्ताओं को मिलने लगे। उन्होंने बताया कि इसके बाद इटली का डिजाइन किया गया ग्रैवियानों लाए तो उसको भी लोगों ने खूब पसंद किया।
तीनों बेटों ने संभाल लिया मोर्चा
अरुण ग्रोवर ने अपने तीनों बेटों को अपनी ही इंडस्ट्री में साथ में लगा लिया। उनके बड़े बेटे वरुण ग्रोवर ने टेक्सटाइल से बीटेक किया और कंपनी का प्रोडक्शन संभालने लगे, करन ने एमबीए किया और कंपनी का आपरेशन संभालते हैं शिवम ने एमबीए किया और कंपनी का फाइनेंस संभालते हैँ। अरुण ग्रोवर ने बताया कि कंपनी का सारा कंट्रोल उनके पास ही रहता है।
लंगर लगता है, पढ़ाई भी होती है
अरुण ग्रोवर ने बताया कि अमरटैक्स की इंडस्ट्री लगने के बाद यहां के लोगों को उन्होंने रोजगार भी दिया और स्किल्ड लेबर भी तैयार की। अब उनकी इंडस्ट्री द्वारा यहां आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए लंगर भी लगाया जाता है और वह अपनी कंपनी में काम करने वालों को एजूकेट भी करते हैं।
प्रोफाइल
अरुण ग्रोवर, सीएमडी, अमरटैक्स
स्कूलिंग-न्यू पब्लिक स्कूल सेक्टर-18 चंडीगढ़
डिप्लोमा-सस्मीरा वर्ली (डिप्लोमा इन टेक्सटाइल)
टिप्स
1-जेड-जील यानी जोश
2-डी-डिसिप्लिन यानी अनुशासन
3-पी-पेशेंस यानी संयम
4-पी-पर्सवीरेंस यानी धुन
5-एच-हार्ड वर्क यानी कठिन परिश्रम