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दो सौ रुपये से शुरू किया था उद्योग, आज पांच इकाइयां
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला
Updated Wed, 20 Jan 2016 04:04 PM IST
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अंबाला कैंट में दादा शिव दयाल सूद ने शिव दयाल संयुक्त पंजाब के होशियारपुर से यहां परिवार समेत अंबाला आए थे। लेकिन दादा द्वारा एक किराए के कमरे में लगाए गए उद्योग के पौधे को, उनके बेटे और पोते ने पांच बड़ी इंडस्ट्रीज में तबदील कर दिया है।
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उनके बेटों और उनके पोतों ने शिव दयाल से विरासत में मिले साइंसटिफिक इंस्ट्रूमेंट का डंका अपने देश में ही नहीं, बल्कि 40 अन्य देशों में भी बजा रखा है। शिव दयाल सूद एंड संस के नाम से शुरू की गई ये इंडस्ट्रीज आज अमेरिका, यूरोप, मिडिल ईस्ट, अरब के 40 देशों में लैबोरट्री इक्यूपमेंट, ग्लासवेयर एंड प्लास्टिक वेयर इंक्यूपमेंट सप्लाई करती है।
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शिव दयाल के बेटे ललित सूद और कुंदल लाल सूद ने जहां अपने पिता के बिजनैस को बढ़ाया, वहीं उनके पोते आलोक सूद ने एमबीए करने के बाद सन 1999 के बाद से अपनी इंडस्ट्रीज को और ज्यादा बुलंदियां दी। इसी का नतीजा यह रहा कि इस इंडस्ट्रीज को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा कई अवार्ड दिए जा चुके हैं। इस कामयाबी में आलोक सूद के साथ उनके भाइयों अजय सूद, अरविंद सूद व अनिल सूद का भी खासा योगदान रहा।
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ये मिल चुका सम्मान
-पिछले माह इस इंडस्ट्रीज को केंद्रीय गृहमंत्री ने आउटस्टैंडिंग एक्पोर्ट अचीवमैंट अवार्ड से नवाजा गया है
-दो बार राज्य सरकार इस इंडस्ट्रीज को आउटस्टैंडिंग एक्पोर्ट के लिए नवाज चुकी है
-छह बार इंजीनियरिंग एक्पोर्ट प्रोमोटर्स काउंलिस इंडस्ट्रीज को नवाज चुकी है।
नैतिकता से छूई सफलता की बुलंदी
उद्यमी आलोक सूद बताते हैं कि उन्होंने अपने दादा और पिता से यही सिखा है कि ईमानदार का दामन कभी नहीं छोड़ता, सफलता तुम्हे कभी नहीं छोड़ेगी। उनके अनुसार आज दादा द्वारा छोटी सी राशि से शुरू किया बिजनैस का टर्नओवर करोड़ों में है। यह सभी नैतिकता के बूते पर ही है। उन्होंने बताया कि सफलता के लिए जोखिम उठाने की क्षमता, टीम को साथ लेकर चलने की क्षमता, समाज के प्रति साकारात्मक रवैया रखने की क्षमता भी होनी बहुत जरूरी है। चुनौतियों से कभी घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उसका सामना जरूर करना चाहिए। उनके अनुसार यही वजह है कि आज उनकी पांच मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, जो 40 देशों में एजुकेशनल, रिसर्च और मेडिकल संबंधी चार सौ आइटमें सप्लाई करती है।