चंडीगढ़ः पीजीआई में एमआरआई के लिए मिल रही छह महीने बाद की तारीख

आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 26 Sep 2018 05:20 PM IST
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पीजीआई में एमआरआई के लिए लगी लाइन
पीजीआई में एमआरआई के लिए लगी लाइन

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चंड़ीगढ़ पीजीआई में भीड़ एक लाइलाज बीमारी बन चुकी है। ऑपरेशन हो या ओपीडी कार्ड बनाने की लाइन। हर जगह लंबा इंतजार। कुछ महीने पहले तक एमआरआई की वेटिंग तीन महीने तक थी, मगर कुछ दिनों से वेटिंग टाइम छह महीने का हो गया है। यदि कोई मरीज आज एमआरआई कराने जाता है तो उसे मार्च के पहले हफ्ते की डेट दी जा रही है।
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 इससे मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जब तक एमआरआई नहीं होगा, तब तक मरीज डाक्टर को नहीं दिखा सकता। कुछ डाक्टर तो बाहर का एमआरआई मान लेते हैं, जबकि कुछ सिर्फ पीजीआई का ही एमआरआई मानते हैं। ऐसे में मरीज के सामने इंतजार करने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है। पीजीआई में एमआरआई की कुल पांच मशीनें हैं। दो मशीनें नेहरू हास्पिटल में, जबकि ओपीडी, कार्डियोलाजी, ट्रामा सेंटर में एक-एक मशीन लगी हैं। सीटी स्कैन का भी वेटिंग टाइम बढ़ गया है। पहले डेढ़ महीने का वेटिंग टाइम होता था। अब तीन महीने का वक्त हो गया है।
गंभीर मरीजों को भी एक महीने का वक्त
एक्सीडेंटल के अतिरिक्त गंभीर मरीजों को भी एक महीने की डेट मिल रही है। मुरादाबाद से आए एक मरीज के तीमारदार ने बताया कि उनके चाचा को कैंसर है। इसके बावजूद उन्हें अक्तूबर महीने की तारीख मिली है। पंजाब के समराला से आए मरीज ने बताया कि उन्हें दौरे आने की शिकायत है। न्यूरो के डाक्टर ने एमआरआई लिखा है। उन्हें छह महीने बाद की तारीख मिली है। हालांकि पीजीआई के स्टाफ को एक से डेढ़ महीने की तारीख मिल रही है।

सस्ता और अच्छा रिजल्ट के लिए पीजीआई पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि पीजीआई में होने वाले एमआरआई के रिजल्ट काफी अच्छे होते हैं। दूसरा यहां की एमआरआई सस्ती है। बाजार के मुकाबले यहां पर करीब आधे रेट में एमआरआई होती है। डाक्टर भी चाहते हैं कि मरीज पीजीआई से ही एमआरआई कराएं ताकि कोई कंफ्यूजन न रहे। हालांकि इमरजेंसी होने पर कुछ डाक्टर प्राइवेट डायग्नोस्टिक में मरीज को रेफर कर देते हैं।

इसका दूसरा पहलू यह भी है कि यदि मरीज उनके कहे अनुसार किसी दूसरे से एमआरआई कराता है तो डाक्टर उसे नहीं मानते। ऐसा अक्सर देखा जाता है। इन सबके बावजूद पीजीआई में मरीजों की संख्या बढ़ी है। सालाना डेढ़ लाख मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

पीजीआई में मरीजों की संख्या बढ़ने से एमआरआई का वेटिंग टाइम बढ़ गया है। पेशेंट लोड कम करने के लिए नई मशीन लगाने पर भी विचार है। कुछ महीने पहले ओपीडी में भी नई मशीन लगी है। -मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई

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