बेटी अनीता का दर्द, एवरेस्ट से ऊंचा अब ‘कर्ज का पहाड़’
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‘मेरे हौसले बुलंद थे। मगर प्रकृति के आगे किसी का जोर नहीं चलता। इस बार सफल नहीं हो सकी। अब अगले वर्ष फिर कोशिश करूंगी। फिलहाल जो कर्ज लेकर इस अभियान के लिए निकली थी। उस कर्ज को चुकाने की बड़ी चुनौती मेरे सामने है।
अभियान शुरू करने से पहले आर्थिक मदद के लिए उद्योगपतियों से लेकर विधायकों तक के पास गईं। यही नहीं मैंने सीएम तक का दरवाजा खटखटाया। मगर मुझे सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला। आखिरकार मुझे कर्ज लेकर ही इस अभियान पर जाना पड़ा।’
एवरेस्ट अभियान से वापस लौटी पर्वतारोही अनीता कुंडू ने कुछ इसी तरह से अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट को तो अगले साल पार कर ही लूंगी, लेकिन कर्ज से पार उनके लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि 25 लाख रुपये का कर्ज लिया था, लेकिन विनाशकारी भूकंप ने उन्हें लौटने पर मजबूर कर दिया।
दुख में हमदर्द बनने वाला ही होता है असली साथी
अनीता कुंडू के मुताबिक अगर मैं इस अभियान में सफल हो जाती, तो सभी मुझे बधाई देने आते और मेरी सफलता को भुनाने की कोशिश करते। मगर अब मैं असफल हुई हूं, तो शायद अब कोई मेरा दुख बांटने नहीं आएगा।
अनीता कुंडू का कहना है कि मुझे कर्ज लेकर इस अभियान पर जाना पड़ा। उधर, सरकार भी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का अभियान जोर-शोर से चला रही है। मगर जब प्रदेश की ही एक बेटी ने सरकार ने मदद मांगी, तो सरकार ने हाथ खड़े कर लिए।
लक्ष्य से कुछ दूरी से वापस लौटना रहा दुखद
अनीता कुंडू के मुताबिक मैं 6400 मीटर (22 हजार फीट) तक पहुंच गई थी। वे लक्ष्य से सिर्फ 2448 मीटर दूर थी, लेकिन विनाशकारी भूकंप के चलते मजबूरीवश कुंडू को वापस लौटना पड़ा। चीनी सरकार ने वहां सभी अभियानों को तुरंत बंद कर दिया।
हालांकि सरकार का यह फैसला काफी हद तक सही भी था। क्योंकि हमारे साथ जो नेपाली शेरपा (गाइड) थे, भूकंप में उनके घर ध्वस्त हो चुके थे और वो एवरेस्ट पर चढ़ने की स्थिति में भी नहीं थे।
पहली दफा देखा पहाड़ फटते
अभियान के बारे में अनीता कुंडू ने बताया कि जब भूकंप आया, तो मैं साढ़े 20 हजार फीट की ऊंचाई पर थी। जैसे ही भूकंप आया, तो मेरे से 10 कदम दूर भूस्खलन हुआ। एक पहाड़ फट गया। वह ऐसा नजारा था, यदि कोई कमजोर दिल का व्यक्ति होता, तो उस नजारे को देखकर ही मर जाता।
मैंने खुद ऐसा नजारा पहली बाद देखा था। मुझे खुद समझ में नहीं आया था, कि अचानक यह क्या हुआ। जान बचाने के लिए भागना पड़ा। उस समय मेरे आसपास भी कोई नहीं था। भूकंप के चलते उनके कैंप में किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन कुछ पर्वतारोहियों को चोटें जरूर आईं।
आक्सीजन की कमी और बर्फीली हवाओं से पड़ा जूझना
अनीता कुंडू के मुताबिक नेपाल की बजाय चीन (उत्तरी दिशा) की तरफ से चढ़ाई करना ज्यादा मुश्किल लगा। क्योंकि यह रास्ता काफी लंबा है। इस तरफ हवाएं काफी तेज चलती है और आक्सीजन भी काफी कम है।
आक्सीजन के कमी के चलते ही कुछ पर्वतारोहियों बीमार हो गए और उन्हें वापस उतरना पड़ा। एवरेस्ट जैसी मुश्किल चढ़ाई पर सबसे ज्यादा स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना पड़ता है। हम प्रतिदिन उठने के साथ ही अपनी हेल्थ का निरीक्षण करते थे कि सब कुछ ठीकठाक है या नहीं।
आधी रात के बाद शुरू होती थी चढ़ाई
कुंडू ने बताया कि रात 12 बजे के बाद ही चढ़ाई शुरू करते थे और यह चढ़ाई सुबह 10 से 11 बजे तक चालू रहती थी। दिन के समय सूर्य की किरणें तेज होने के चलते बर्फ नरम हो जाती है, जिसके चलते बर्फ धंसने का खतरा ज्यादा रहता है। दिन के समय वहां का तापमान 15 डिग्री और रात के समय माइनस 30 से 40 डिग्री होता है।
सरकार तो दूर जिला प्रशासन ने नहीं किया सम्मानित
अनीता कुंडू का कहना है कि वह एक दफा एवरेस्ट फतेह कर चुकी है। मगर इसके बावजूद उसे सरकार तो दूर जिला प्रशासन तक ने सम्मानित करना उचित नहीं समझा। उधर, सरकार खिलाड़ियों को करोड़ों के पुरस्कार दे रही है। मगर आज तक उसे कोई आर्थिक मदद नहीं मिली।
मेरा सपना है कि मैं संसार की सभी 8 हजार मीटर से ज्यादा की चोटियों को फतह करूं। उधर, अनीता की मां राजपति का कहना है कि मेरी बेटी इस साल सफल नहीं हुई, तो कोई बात नहीं। वह अगले वर्ष फिर चढ़ाई करेगी। मुझे इस बात की ज्यादा खुशी है कि मेरी बेटी सही-सलामत वापस लौट आई।
चढ़ जाती, तो बन जाता नेशनल रिकार्ड
अगर अनीता कुंडु इस अभियान में सफल हो जाती, तो वह एक नया नेशनल रिकॉर्ड भी कायम कर देती। क्योंकि अभी तक देश की किसी भी महिला पर्वतारोही ने एवरेस्ट पर दोनों तरफ (नेपाल व चीन) से चढ़ाई नहीं की हैं। अनीता इससे पहले वर्ष 2013 में नेपाल की तरफ से एवरेस्ट की चोटी फतेह कर चुकी है।
पूरे वेतन से भी चुकता नहीं होगा ब्याज
अनीता की मानें, तो 14 लाख रुपये का लोन लिया है और 11 लाख रुपये निजी फाइनेंसर से ब्याज पर लिए हैं। उधर अनीता का वेतन ही 24 हजार रुपये हैं। इस हिसाब से वह अपने वेतन से पूरे कर्ज का ब्याज भी नहीं चुका सकती।