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मोरनी में बनेगा वर्ल्ड फारेस्ट हर्बल पार्क, पतंजलि के साथ एमओयू
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 18 Jan 2017 10:44 PM IST
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वर्ल्ड हर्बल फॉरेस्ट के लिए पतंजलि के साथ एमओयू
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मोरनी में वर्ल्ड फारेस्ट हर्बल पार्क विकसित करने के लिए हरियाणा वन विभाग और पतंजलि अनुसंधान संस्थान हरिद्वार के बीच करार हो गया है। समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर सरकार की ओर से वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आरआर जोवल और पतंजलि के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने हस्ताक्षर किए। इसके निर्माण से प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि वातावरण एवं जैव विविधता के अनुकूल मोरनी की पहाड़ियों में ये अपनी तरह का दुनिया का पहला वर्ल्ड हर्बल फॉरेस्ट होगा। दुनिया भर के आयुर्वेद से संबंधित डॉक्टरों एवं वैज्ञानिकों के लिए अच्छा प्लेटफॉर्म मिलेगा। यहां भ्रमण कर औषधीय पौधों की जानकारी प्राप्त कर अनुसंधान कर सकेंगे।
मोरनी क्षेत्र की पूरी भूमि यथावत संबंधित लोगों व वन विभाग के स्वामित्व एवं अधिकार क्षेत्र में रहेगी। वर्तमान में लगे पौधों के संरक्षण के साथ-साथ देश में पाए जाने वाले करीब 25 हजार औषधीय पेड़ों, पौधों, लताओं और हर्बल को लगाया जाएगा। इसके लिए लगभग 53 हजार एकड़ वन को विभिन्न क्षेत्रों (क्लस्टर) में विभाजित किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि वातावरण एवं जैव विविधता के अनुकूल मोरनी की पहाड़ियों में ये अपनी तरह का दुनिया का पहला वर्ल्ड हर्बल फॉरेस्ट होगा। दुनिया भर के आयुर्वेद से संबंधित डॉक्टरों एवं वैज्ञानिकों के लिए अच्छा प्लेटफॉर्म मिलेगा। यहां भ्रमण कर औषधीय पौधों की जानकारी प्राप्त कर अनुसंधान कर सकेंगे।
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मोरनी क्षेत्र की पूरी भूमि यथावत संबंधित लोगों व वन विभाग के स्वामित्व एवं अधिकार क्षेत्र में रहेगी। वर्तमान में लगे पौधों के संरक्षण के साथ-साथ देश में पाए जाने वाले करीब 25 हजार औषधीय पेड़ों, पौधों, लताओं और हर्बल को लगाया जाएगा। इसके लिए लगभग 53 हजार एकड़ वन को विभिन्न क्षेत्रों (क्लस्टर) में विभाजित किया जाएगा।
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आर्थिक-व्यावसायिक लाभ नहीं लेंगे : बालकृष्ण
वर्ल्ड हर्बल फॉरेस्ट के लिए पतंजलि के साथ एमओयू
आर्थिक-व्यावसायिक लाभ नहीं लेंगे : बालकृष्ण
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि इस फॉरेस्ट से कोई आर्थिक या व्यवसायिक लाभ नही लेंगे, उनका उद्देश्य समाज सेवा के लिए बनाए गए पौधों के विश्वकोश को धरातल पर उतारना है। वर्तमान सामान्य जंगल को वह विशेष जंगल बनाने का प्रयास करेंगे।
वैज्ञानिकों की टीम को पूरा सहयोग दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के हर्बल प्रदर्शन केंद्र में भी पूरा सहयोग देंगे। इसमें देश में पाई जाने वाली अधिकतर किस्मों के पौधों का रोपण किया जाएगा। पतंजलि अनुसंधान केंद्र खाली जगहों पर औषधीय पौधे लगाने के साथ खरपतवार साफ करने का काम भी करेगा।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि इस फॉरेस्ट से कोई आर्थिक या व्यवसायिक लाभ नही लेंगे, उनका उद्देश्य समाज सेवा के लिए बनाए गए पौधों के विश्वकोश को धरातल पर उतारना है। वर्तमान सामान्य जंगल को वह विशेष जंगल बनाने का प्रयास करेंगे।
वैज्ञानिकों की टीम को पूरा सहयोग दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के हर्बल प्रदर्शन केंद्र में भी पूरा सहयोग देंगे। इसमें देश में पाई जाने वाली अधिकतर किस्मों के पौधों का रोपण किया जाएगा। पतंजलि अनुसंधान केंद्र खाली जगहों पर औषधीय पौधे लगाने के साथ खरपतवार साफ करने का काम भी करेगा।