मातृ दिवस 2021: कोरोना काल में ममता के साथ समाज सेवा भी कर रहीं हैं चंडीगढ़ की ये माताएं
सेक्टर- 52 निवासी अनीता अपने बच्चों की अकेली परिजन हैं। फिलहाल उनके पति साथ नहीं रहते, बावजूद इसके अनीता ने बच्चों की शिक्षा को नहीं रोका। अनीता की बेटी नर्सरी और बेटा आठवीं में पढ़ता है। सुबह बच्चों के लिए दिनभर का खाना तैयार कर खुद काम पर जाती है और उसके बाद बेटे की मदद से बेटी की भी देखभाल करती है।
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मां हमेशा अपने बच्चों को बेहतर परवरिश देना चाहती है। फिर चाहे उसके कंधों पर कितनी ही जिम्मेदारियां क्यों न हो। नगर निगम की सफाई कर्मचारी अनीता के साथ भी कुछ ऐसा ही है। बीए पास अनीता को जब नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने चार साल की बेटी और 12 साल के बेटे को बेहतर परवरिश देने के लिए सफाई कर्मचारी का काम चुना। बच्चों को शिक्षा के साथ उनकी हर जरूरत को पूरा करके एक ओर अनीता ममता का फर्ज निभा रही हैं, वहीं कोरोना महामारी में कंटेनमेंट जोन की सफाई का काम करके अपने कर्मक्षेत्र में डटी हुई हैं।
सेक्टर- 52 निवासी अनीता अपने बच्चों की अकेली परिजन हैं। फिलहाल उनके पति साथ नहीं रहते, बावजूद इसके अनीता ने बच्चों की शिक्षा को नहीं रोका। अनीता की बेटी नर्सरी और बेटा आठवीं में पढ़ता है। सुबह बच्चों के लिए दिनभर का खाना तैयार कर खुद काम पर जाती है और उसके बाद बेटे की मदद से बेटी की भी देखभाल करती है। अनीता का कहना है कभी थक जाती हूं तो बच्चों के भविष्य के बारे में सोचकर फिर से जोश आ जाता है।
आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए छह साल की बेटी को भी ले जाती हूं फील्ड में : मंजुला सलारिया
एक मां हमेशा चाहती है कि उसकी बेटी आत्मविश्वास से लबालब रहे ताकि हर क्षेत्र में वह अपनी भूमिका अदा कर सके। एक मां अपने बच्चों की गुरु भी होती है। इसी उद्देश्य से अपनी छह वर्षीय बेटी को फील्ड में साथ लेकर जाती हूं। यह कहना है सेक्टर- 18 निवासी मंजुला सलारिया का।
मंजुला बच्चों के लिए प्रसन्न चेतस नाम से सामाजिक संस्था चलाती हैं। उनके पति डीआरडीओ में वैज्ञानिक हैं। घर में बच्ची के लिए किसी केयर टेकर को रखने से बेहतर वह अपनी बेटी को समाज के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराना बेहतर समझती हैं। मंजुला का कहना है कि कोरोना महामारी में लोगों को समाजसेवी संस्थाओं की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे में घर बैठ जाना ठीक नहीं, वहीं एक मां होने के नाते बेटी का ध्यान रखना भी जरूरी है। जब भी कंटेनमेंट जोन या ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के सहयोग के लिए जाती थी, बेटी को पूरी सुरक्षा के साथ अपने साथ ही लेकर जाती थी। आज मेरी बेटी सैनिटाइजर, मास्क व अन्य सुरक्षा उपकरणों को पहचानना सीख गई। यही मेरी शिक्षा है, इसमें मेरी बेटी सफल हो गई है।
जीवन में संबंधों की पूंजी कमाई, आज महामारी में कर रहीं उसका उपयोग
छात्र जीवन से ही समाज सेवा से जुड़ी असतिंदर कौर कोरोना महामारी के दूसरे चरण में चंडीगढ़ समेत विभिन्न राज्यों में लोगों तक मदद पहुंचा रही हैं। कौर ने बताया कि जिंदगी भर उन्होंने संबंधों की पूंजी कमाई है, जिसका इस्तेमाल वे महामारी में कर रही हैं। शहर में ज्यादातर युवक जो संस्थाएं चला रहे हैं, वे असतिंदर कौर के ही विद्यार्थी हैं।
वह कई संस्थाओं की सलाहकार व को-आर्डिनेटर हैं। उन्होंने बताया कि इस समय चारों तरफ बेड, ऑक्सीजन, दवाइयों की तलाश में आजकल लोग इधर-उधर भटक रहे हैं। परेशान लोग रोजाना उनसे संपर्क कर रहे हैं और फिर विभिन्न राज्यों में अपने विद्यार्थी, जानकार, दोस्त व रिश्तेदारों की मदद से उन तक जरूरत का सामान पहुंचा रहे हैं।
कौर ने कहा कि उनके दोनों बेटे सेटल हैं। इसलिए भगवान ने जो कुछ उन्हें दिया है, अब वह लोगों को लौटा रही हैं। उनका ज्यादातर समय फोन पर ही गुजरता है। हर समय लोग फोन व मैसेज कर मदद मांगते हैं। कोरोना के पहले चरण में घर में लंगर बनवाया, राशन आदि सामान बांटे।
सरकारी स्कूल के पांच बच्चों को भी गोद लिया है, जिन्हें सारा सामान मुहैया कराया जाता है। असतिंदर कौर ने कहा कि अब उनकी यही ख्वाहिश है कि उनके सभी विद्यार्थी जो समाजसेवा कर रहे हैं, वो एक साथ आएं और चंडीगढ़ को एक बेहतर शहर बनाने के लिए कार्य करें।
महामारी में मां-बेटी समाज सेवा में जुटीं
कोरोना वायरस की पहली लहर से लेकर अब तक सेक्टर-21 में रहने वाली अनीता मिड्ढा अपनी बेटी रिया मिड्ढा के साथ गरीब परिवार व बच्चों की मदद करने में जुटी हैं। अनीता का कहना है कि उनकी बेटी, एक दोस्त की तरह उनके काम में हाथ बंटाती है और जब भी किसी सेवा का काम होता है तो वह उसे करने के लिए आगे खड़ी रहती है।
बताया कि वह गरीब बच्चों के लिए स्कूल चलाती हैं, जिसमें उनकी बेटी पढ़ाती है। कोविड काल में भी बेटी ने ऑनलाइन कक्षाएं ली हैं। अनीता मिड्ढा इनर व्हील क्लब ऑफ चंडीगढ़ हार्मोनी की अध्यक्ष भी हैं। वर्तमान में वह युवा स्तंभ के उपेंद्र मौर्य, अनीष गोयल के टैक-द आर्ट कैफे और भारत विकास परिषद के साथ मिलकर घर में रह रहे करीब 50 कोरोना संक्रमितों तक रोजाना खाना पहुंचा रही हैं।
उन्होंने बताया कि क्लब के सहयोग से 18 गरीब परिवारों को पिछले एक साल से हर महीने का राशन मुहैया कराया जाता है। शहर में कई जरूरतमंदों की आंखों का ऑपरेशन, गरीब बच्चों को स्टेशनरी व किताबें, मास्क, सैनिटाइजर, पीपीई किट आदि की पिछले एक साल से सेवा चल रही है। सिर्फ गरीब बच्चों के लिए स्कूल भी चल रहा है। बताया कि उनकी संस्था चंडीगढ़ के अलावा लद्दाख तक राहत सामग्री भेजती हैं। इसमें क्लब की अन्य सदस्य जिनमें इंदिरासेन घोष आदि का सहयोग रहता है।